Powered by Blogger.

Contributors

Followers

Showing posts with label गंधर्व विवाह. Show all posts
Showing posts with label गंधर्व विवाह. Show all posts

Tuesday, 27 November 2012

गंधर्व विवाह

गंधर्व विवाह

 

 

निशा मेरी एक मात्र लंगोटिया दोस्त है।एक दिन की बात है, जब मैं निशा के बुलाने पर उसके घर गया तो उसके घर वाले कहीं बाहर गए हुए थे। घर में हम दोनों ही अकेले थे, उसके जान-पहचान के कोई बाबा उसके घर पर आये हुए थे।निशा बोली- ये बहुत ही अच्छी जन्म-पत्री देखते हैं। तुम अपनी जन्मपत्री इन्हें बताओ http://goo.gl/r2kMG  !उसके कहने पर मैं मान गया और झट से अपनी जन्मपत्री बना कर उन्हें दिखा दी।बाबा मेरी पत्री देख कर बोला- तुम एक वर्ण शंकर में हो।तो निशा ने पूछा- इसका क्या मतलब बाबाजी?तो वो बोले- इसका मतलब यह है कि इस जातक के लिंग पर ३ तिल हैं, ये जातक विशेष होते हैं, इनमें स्त्री को वश में रखने की विशेष क्षमता होती है, इनकी दो शादियाँ होती हैं।http://goo.gl/r2kMG निशा ने मुझसे पूछा- क्या यह सच है?मैंने कहा- मुझे नहीं मालूम !तो बोली- जाओ और तुम यह देखकर बताओ।मैं बाथरूम में गया और देखा तो सुचमच मेरे लिंग पर तीन तिल थे।मैंने जाकर उसे बताया- सही है।मुझे भी आश्चर्य हुआ, जो बात मुझे नहीं पता थी, आज वो एक अनजान बाबा ने मुझे बताई थी।फिर वो बाबा बोला- आप किसी भी पराई औरत से सावधान रहें और हर किसी से सेक्स सम्बन्ध स्थापित न करें, नहीं तो इन तिल का मतलब ख़त्म हो जायेगा, इसका विशेष ध्यान रखें।और चाय नाश्ता करके पचास रुपए की दक्षिणा लेकर बाबा चलता हुआ।अब निशा ने जल्दी ही दरवाजा बंद किया और मेरे पास आकर बोली- जरा मैं भी तो देखूँ मेरे यार के लिंग का तिल !और वो झुक गई, मेरी निकर की ज़िप से और मेरा लिंग बाहर निकाल कर ध्यान से देखने लगी और जोर जोर से चूमते करते हुए बोली – क्या बात है। तब ही तो मैं कहूँ क्या आलिशान लौड़ा है, मेरी चूत के लिए तो एकदम फिट है।मैं बोला- बाबा ने परस्त्रीगमन का मना बोला है न, तुम अब मुझसे दूर रहा करो।तो वो बोली- एक उपाय है।मैं बोला- वो क्या?”हम दोनों गंधर्व विवाह कर लेते है।”मैंने पूछा- वो कैसे?तो निशा बोली- पुराने ज़माने में जब राजा महाराजा शिकार खेलने जाते थे http://goo.gl/r2kMG  तो कोई अपनी रानी को तो ले नहीं जाते थे, जंगल में जो भी सुन्दर औरत मिलती थी, तो उसे अपनी संगिनी बना लेते थे और अपनी कोई निशानी दे देते थे। ये विवाह कुछ समय के लिए ही होता है।मैंने कहा- कोई जरूरी है?तो वो बोली- हाँ, मुझे तुम्हारा साथ जो चाहिए।और वो अन्दर कमरे में गई और बन संवर कर दुल्हन के लिबास में आई तो मैं उसे देखता ही रह गया, क्या खूब लग रही थी, टिपिकल मराठा लड़की !उसके हाथ में एक सिन्दूर की डिबिया थी, बोली- लो मेरी मांग भरो ! आज हम गंधर्व विवाह कर रहे हैं। हम दोस्त सही, पर कुछ समय के लिए हम पति-पत्नी बन कर रहेंगे।और मैंने निशा की मांग में सिन्दूर भर दिया। अब हमने खाना खाया और वो मुझे अपने शयनकक्ष में ले गई, फिर बोली- आज अपनी सुहागरात है ! जी भर के मुझे प्यार करो, जैसे तुम चाहो ! आज से मैं तुम्हारी हूँ।और हम दोनों ही बेड पर थे, मैंने निशा के सारे कपड़े उतार दिए, उसने मेरे भी ! http://goo.gl/r2kMG फिर वो बोली- अन्नू, जब तुमने पहली बार पार्क में मुझे छुआ था, तब से मैं एक बात सोच रही थी कि तुम्हारे हाथों में जादू है। न जाने क्यों मैं पागल हो जाती हूँ, सारे बदन में एक करेंट सा फ़ैल जाता है ! जानू, मेरा तो रोम रोम खड़ा हो जाता है, ऐसा लगता है कि आज तक ऐसा स्पर्श मैंने कभी भी नहीं पाया। तुम्हारे छूने से, चूमने से मैं अति रोमांचित हो जाती हूँ, मुझे आज तक तुम जैसा मर्द नहीं मिला, यार तुम्हारे हाथों में तो कमाल का जादू है, अन्नू तुम मेरे हो, जब चाहो मेरे पास आ जाना, मैं तुम्हारी हूँ और तुम्हारा स्पर्श पाकर मैं धन्य हो जाती हूँ। आज तो जी भर कर मुझे नख-शिख तक प्यार करो, http://goo.gl/r2kMG जानू मैं तुम्हारी हूँ।और मैंने उसे सर से पांव तक चूमा।अब उसकी बारी थी, उसने भी मुझे सर से पांव तक चूमा। मेरा मन रोमांच से भर गया था और लिंग को किसी सुरक्षित स्थान की तलाश थी आराम के लिए !वो पागलों की तरह मेरा लिंग मुह में लिए चूसती रही और बोली- सचमुच मैं कितनी भाग्य शाली हूँ कि तुम जैसा दोस्त मुझे मिला।उस दिन हमने चार बार सेक्स किया दिन में 11 बजे से शाम 6 बजे तक।फ़िर हम यदा-कदा मिलते और अपनी सेक्स की भूख मिटाते रहे। यह सिलसिला 5-6 साल तक चला।फिर अकसर वो मुझसे कहती- अन्नू, तेरे साथ सेक्स किये बिना मुझे चैन नहीं मिलता, तुमसे मिलने के बाद सारा हफ्ता मजे से गुजरता है, http://goo.gl/r2kMG पर एक ही सप्ताह तुम नहीं मिलते तो सारा बदन ऐंठने लग जाता है, लगता है कि भाग कर तुम्हारी बांहों में समा जाऊँ और तेरे हाथों का स्पर्श पा लूँ ! यार तुम तो कोई आसमानी बंदे लगते हो ! क्या जादू है रे तेरे हाथों में ! मैं तो दीवानी हूँ तेरी अन्नू ! आज जरूर मिलना ! मैं तेरे बिना पागल हुए जा रही हूँ अन्नू ! प्लीज़ वक्त निकाल लेना जानू !इस तरह से वो मेरी सेक्स टीचर थी।मेरी निशा अब कुर्ला छोड़कर बांद्रा में रहने लगी थी, मेरे लिए ऑफ रूट था बांद्रा, मैं कम ही मिल पाता था उससे।आज भी कभी उसकी याद आ जाती है तो मन श्रद्धा से भर जाता है। 
http://goo.gl/r2kMG

Published: By: Nirmala - 01:01

Marathi Sexy Stories,Sexy story in Marathi,Hindi sexy stories,Read online sexy stories

Marathi Sexy Stories

↑ Grab this Headline Animator

 

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner