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Wednesday, 22 August 2012

मैडम की चाहत

मैडम की चाहत
प्रेषक : ankita rai




मेरा नाम रोहित है। बात उस समय की है जब मैं 18 साल का था, स्कूल में नया दाखिला लिया था, मैं बहुत खुश था।

मेरे स्कूल में एक मैडम थी जिसका नाम लीना था, उसकी अभी अभी नई शादी हुई थी, वो देखने में बहुत सुन्दर थी और उसका फिगर 34-28-36 था।
जब वो चलती थी तो सबके लौड़े उसके चूतड़ों को देख कर सलामी देने लगते थे।

उसका पति एक डॉक्टर था, जो घर से दूर जॉब करता था। मैं तो उस पर

मिटा था। मैं जब उसे देखता तो मेरा मन उसे चोदने को करता था। पर मैं क्या करता। जब वो हमें केमिस्ट्री पढ़ाने आती तो मैं उसे देखता रहता, वो मेरे अन्तर्मन की भावनाओं को समझने लगी थी।

एक दिन वो हमारी लैब ले रही थी। उस दौरान जब वो पढ़ाते हुए पीछे आ रही थी तो मैं जानबूझ कर उसके साथ पीछे से चिपक गया जिसके कारण मेरा लौड़ा जो करीब 7 इंच का था उसकी गाण्ड में धंस गया, जिससे वो घबरा कर एकदम हट गई और मुझे घूर कर देखने लगी। मैं डर गया कि अब यह मुझे डांटगी। पर ऐसा कुछ हुआ नहीं और वो वहाँ से चली गई।

मुझे पता लग गया कि इससे उसे भी थोड़ा मज़ा आया है क्यूंकि उसका पति काफी दिनों बाद उससे मिलने आता जिसके कारण उस में भी सेक्स की भूख जगती होगी। मैंने फैसला कर लिया कि मैं इसे चोद कर ही रहूँगा।

तो मैंने एक योजना बनाई जिससे मैं उसे आसानी से चोद सकूँ। मैंने उससे टयूशन पढ़ने का बहाना लगाया और वो मान गई।

मैं बड़ा खुश हुआ कि मैंने एक किला तो फतह कर लिया है, बाकी की बाद में देखी जायेगी।

मैं उसके घर पढ़ने पहुँचा। वो बहुत ही सुन्दर नजर आ रही थी, मन तो कर रहा था कि उसे वहीं पकड़ कर चोद डालूं लेकिन हिम्मत नहीं पड़ रही थी, इसलिए मैंने जल्दबाजी ना करने की सोची।

मुझे देख कर वो बहुत खुश हुई और मुझे बैठने के लिए बोला। मैं उसे सब्जेक्ट की प्रोब्लम बताने लगा।

जब वो पढ़ा रही थी तो मैं बस उसे ही देख रहा था जिसका उसे पता लग गया था।

वो मुझे पूछने लगी- क्या रोहित, ऐसे क्यूँ देख रहे हो?

तो मैंने कहा- मैडम, मैं देख रहा था कि आप बहुत सुन्दर हो ! मन करता है कि आपको देखता ही रहूँ।

ना जाने मुझमें इतनी हिम्मत कहाँ से आ गई थी।

मैं डर गया कि कहीं मैडम बुरा ना मान जाए लेकिन हुआ इसका उल्टा ! वो मुस्कुराने लगी और चाय बनाने के लिए कह कर वहाँ से चली गई।

मैंने ज़िन्दगी में इससे पहले कभी सेक्स नहीं किया था। लेकिन ना जाने उस दिन इतनी इच्छा कहाँ से जाग गई थी।

जब वो जा रही थी तो मैं उसके चूतड़ों को हिलते हुए देख रहा था और मेरा लौड़ा एकदम तयार हो गया था उसकी चूत चोदने के लिए लेकिन मैंने जैसे तैसे खुद पर काबू किया।

मैडम चाय बना कर लाई और हम चाय पीने लगे।

चाय पीते पीते मैं उसके शरीर को देख रहा और सोच रहा कि काश ऐसी चूत मुझे चोदने को मिल जाती तो मौजाँ ही मौजाँ हो जाती।

शाम के सात बज गए थे और हमें पढ़ते पढ़ते दो घंटे हो गए थे, मैं मन ही मन सोच रहा था कि पता नहीं इसे चोदने का मौका मिलेगा या नहीं लेकिन शायद भगवान् भी यही चाहता था।

मैं जैसे ही अपने घर के लिए जा रहा था, तभी उस समय बारिश शुरु हो गई। बारिश बहुत जोर से लगी थी जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो गया था।

मेरा घर मैडम के घर से काफी दूर था इसलिए मुझे बस पकड़ कर जाना था लेकिन बारिश की वजह से मैं लेट हो रहा था।

मैडम ने कहा- अगर बारिश नहीं रूकती तो तुम आज यहीं रुक जाओ, कल चले जाना।

मैंने उनका प्रस्ताव एकदम मान लिया और वहीं उनके घर रूक गया। मैं बहुत खुश था कि आज मौका है आज मैडम को चोदने का।

मुझे सर दर्द होने लगा था तो मैंने मैडम सर दर्द की दवाई मांगी, मैडम ने मुझे दवाई दी और मैं दवाई खाकर लेट गया।

मैडम थोड़ी देर में खाना लेकर आई और खाना खाकर हम दोनों टीवी देखने लगे। मैडम घर मे अकेली थी और हम मैडम के कमरे में ही बैठे थे।

9 बजे टीवी देखते देखते मुझे नींद आ रही थी, मैं सोच रहा था कि सरदर्द भी आज ही होना था जब इतना अच्छा मौका हाथ से चला जा रहा था।

रात के करीब 11 बजे थे जब मेरी नींद खुली। मैंने देखा कि मैडम बिस्तर पर मेरे ही बगल में सोई हैं। मेरी थोड़ी हिम्मत बढ़ने लगी और मैंने सोचा कि अब नहीं तो कभी नहीं।

और मैंने धीरे-धीरे अपना काम करना चालू कर दिया, मुझे डर बहुत लग रहा था लेकिन मैंने फिर भी ठान ली कि मैं आज यह मौका नहीं गवाऊँगा।

मैं धीरे से मैडम की रजाई में घुस गया। मैंने अपना लौड़ा निकाला जो एकदम लोहे की तरह सख्त हो गया था। मेरा लौड़ा ढाई इंच मोटा है।

मैंने लौड़ा निकल कर मैडम के चूतड़ों की दरार में घुसेड़ दिया और देखने लगा कि मैडम की इस पर प्रतिक्रिया क्या होती है। लेकिन शायद मैडम गहरी नींद में थी या फिर नाटक कर रही थी।

पर क्या गाण्ड थी, एकदम मुलायम ! मैं तो सातवें आसमान पर पहुँच गया था। फिर मैंने मैडम की चूचियाँ पकड़ ली और उन्हें मसलने लगा और थोड़ी देर बाद चूचियाँ एकदम सख्त हो गई।

मैडम थोड़ा पीछे होकर मेरे लौड़े को और अंदर अपनी गाण्ड में धंसवाने लगी। मैं समझ गया कि मैडम जागी हुई हैं।

और कुछ ही देर में मैडम ने मेरा लौड़ा पकड़ लिया। इशारा मिलते ही, क्यूंकि मैं एकदम गर्म था, मैंने फटाफट काम निपटाने की सोची और मैडम की सलवार खोल कर उनकी चूत में अपना लौड़ा डालने के लिए उन पर सवार होने लगा लेकिन मैं इस खेल में अनाड़ी था, मेरा लौड़ा चूत का रास्ता ढूंढ नहीं पाया।

फिर मैडम ने अपने हाथ में मेरा लौड़ा लेकर अपनी चूत के मुँह पर रखा और मैंने बिना कुछ सोचे लौड़ा चूत में धकेल दिया और लौड़ा चूत को चीरता हुआ जड़ तक जा पहुँचा। मैडम के मुँह से चीख निकल गई, चूत काफी तंग थी, लगता था मैडम के पति ने उसे बहुत कम चोदा था।

फिर मैं जोर जोर के झटके देने शुरू हो गया, मैडम ने मेरे कान में कहा- धीरे करो ! दर्द हो रहा है।

लेकिन मैं नहीं रूका और पाँच मिनट में अपना वीर्य उनकी चूत में छोड़ कर उन पर गिर गया। वो अभी झड़ी नहीं थी।

फिर उन्होंने कहा- तुम अभी इस खेल में अनाड़ी हो, मैं तुम्हें सिखाती हूँ कि किसी औरत को कैसे संतुष्ट किया जाता है।

फिर उन्होंने मुझे उनकी चूचियाँ चूसने को कहा और उनकी चूत चाटने को कहा।

मैंने वो सब कुछ किया जो उन्होंने मुझे कहा लेकिन मैंने शर्त रखी कि मैं यह सब रोशनी में ही करूंगा, जो उन्होंने मान ली।

मैंने जैसे ही बत्ती जलाई, तो मैं उस अप्सरा का जिस्म देख कर पागल सा हो गया।

एकदम गोरा जिस्म और चूत पर एक भी बाल नहीं। मैं उनकी चूचियों पर टूट पड़ा और 15 मिनट उनकी चूचियाँ चूसने के बाद उनकी चूत चाटने लगा। वो भी मेरे लौड़े को चूस कर खड़ा करने में लग गई और आधे घंटे में हम दोनों फिर अगले दौर के लिए तैयार हो गए थे।

फिर मैडम ने कहा कि अब उनसे सहन नहीं होता और मैं उन्हें चोदना शुरू करूँ।

और उन्होंने मुझे अच्छा और लम्बे समय तक सेक्स करने का तरीका भी बताया।

उन्होंने कहा कि मेरा लौड़ा बहुत लम्बा और मोटा है मेरी उम्र के हिसाब से ! जिसे सुन मैं बहुत खुश हुआ।

हमारा अगला दौर 15 मिनट तक चला और मैडम उस बीच दो बार झड़ चुकी थी। मैडम की चूत इतनी कसी थी कि मेरे लौड़े को अन्दर कस कर जकड़ ले रही थी जिससे मेरा लौड़ा और भी फूल गया था और मैं जोरदार झटके दे रहा था जिससे मैडम तकलीफ हो रही थी लेकिन बाद में मैडम गाण्ड उछाल कर जोर से चोदने के लिए कह रही थी।मैडम के कहने पर उस रात हमने कई बार सेक्स किया।

मैडम से सुबह उठ कर ढंग से चला भी नहीं जा रहा था। मैंने मैडम को घर में नंगा ही घूमने को कहा और मैडम ने वैसा ही किया। सुबह जब मैडम नहा धोकर चाय बनाने लगी तो मैं उनकी मटकती गाण्ड देख कर खुद संभल नहीं पाया और किचन में उन्हें घोड़ी बनाकर पीछे से चोद डाला।

मैडम ने बताया कि उनके पति के जाने के बाद वो सेक्स के लिए बहुत प्यासी थी और उस दिन लैब मैं मेरी हरकत ने उन्हें और भी उतावला कर दिया था।

इसके बाद रोज ही हम ट्यूशन के बहाने चुदाई करने लगे। सारे स्कूल के दोस्तों को मुझ पर और मैडम पर शक हो गया क्यूंकि मैडम ने मेरे अलावा किसी और को ट्यूशन पढ़ाने से मना कर दिया।

हम दोनों में सम्बन्ध को अभी तीन ही महीने हुए थे कि मैडम ने मुझे बताया कि वो मेरे बच्चे की माँ बनने वाली है जिसे सुन कर मैं बहुत खुश हुआ, परेशान भी हुआ कि कहीं किसी को शक ना हो जाए। लेकिन मेरी परेशानी देख मैडम ने मुझसे कहा कि वो किसी तरह अपनी पति से चुदवा लेंगी और किसी शक भी नहीं होगा।

ठीक 9 महीने बाद मैडम ने एक सुन्दर लड़के को पैदा किया और वो बिल्कुल मेरी तरह था।हम दोनों बहुत खुश हुए।

गले एक साल तक हम चुदाई करते रहे। फिर मैडम का तबादला हो गया और वो मुझे छोड़ कर चली गई।

लेकिन उनके जाने के 20 दिन बाद मुझे मैडम का फ़ोन का फ़ोन आया कि वो फिर से माँ बनने वाली हैं। और उन्हें दूसरी बार लड़की हुई।

मैडम से सीखे तजुर्बे से मैंने बहुत सी भाभियों और कॉलेज की लड़कियों को चोदा। लेकिन किसी ने मुझे मैडम जैसा मजा नहीं दिया।

वो मैं अगली कहानी में बताऊँगा।
Published: By: Nirmala - 01:13

Sunday, 5 August 2012

सुहागरात दोस्त क़ी बीवी के साथ - 6

 
अगर हमे चुदाना नहीं था तो मै कौन तेरे ग़ौर का लंड जैसे लंड से अपनी चुत फट्वती. अब जल्दी से चुदाई शुरू कर और मेरी चुत को भोसरा बना. साला चुत में लंड पेलने के बाद पूछता है क़ी चुदाई शुरू करून या नहीं?"

मै नमीता को उसके कहने के मुताबिक चुदाई शुरू किया लेकिन उसको अभी भी दर्द हो रहा था और इसलिए वो बर्बर रही थी, "बहनचोद, पर्रे चुत मुफ्त मैं चोदने को मिल गयी है इस लिये मेरी चुत फाड रहे हो." मै उसको चोदना चालू रखा और थोरी देर के बाद नमीता को भी मज़ा आने लगा और अब व्हो चिल्ला रही थी, "है! क्या चुदाई है, और जोर जोर से मुझे चोदो, अब मेरी चुत में चीतियन रेंग रही है, है! कुछ करो. और जोर से मरो, तुम्हे मेरी कसम मेरी चुत क़ी फिकर मत करो बस ऐसे ही जोर जोर से अपना लंड मेरी चुत में पलते रहो. "

मै नमीता क़ी बात सुन कर खुस हो गया और उसकी चुत क़ी तरफ देख्तने लगा. उसकी चुत से बूँद बूँद कर खून निकल रहा था. मै समझ गया क़ी नमीता क़ी चुत अभी तक किसी से चुदी नहीं थी और मैंने ही इस चुत क़ी साल तोड़ी है. मैंने नमीता से पूंचा क्या नीरज ने तुम्हे ऐसा चोदा कभी ? तो उसने कहा तुम ज्यादा नाटक मत करो.. मेरी चुत क़ी हालत देख कर भी नहीं समझे क़ी नीरज ने आज ताके मेरी चुत के अन्दर उसका पेंसिल का टुकड़ा डाला ही नहीं कहा मै समझ गया रानी..

तेरी चुत कुंवारी थी और आज से तेरा कुंवारा पण ख़तम हो gaya अब मै पुरे जोश में आगया और अपने कमर उचल उचल कर नमीता क़ी चुत में अपना लंड पेलने लगा. नीचे से नमीता भी अपनी कमर उचल उचल कर नहरे धक्के का जबाब दे रही थी और बदबदा रहे थी, "है मेरे चोदु रजा, और जोर से दहक्के मरो बहुत मज़ा अ रहा है. अगर मै जानती क़ी चुदाई में इतना मज़ा है तो मै बहुत पहले से पानी चुत में लंड पिलवाती, मरो मरो और जोर से चोदो, कुछ मत रखना अपने पास, सारा का सारा लंड मेरी चुत में दल दो."



मै भी जोर जोर से नमीता क़ी चुत में अपना लंड पेल रहा था और बदबदा रहा था, "है मेरी चुद्दाकर रानी, ले! ले! अपनी चुत में हुम्रारा लंड ले, खाजा अपनी चुत से मेरा लंड, तेरे चुत में तो दाँत नहीं है तो क्या हुआ अपनी चुत से मेरा लंड चूस चूस कर इसका सब रस पीजा." अब नमीता ने अपनी दोनों टांगो को मेरे कमर पर रख कर मुझे पाने दोनों हातों से पाकर लिया और बोल रही थी,

"बस अब कुछ मत बोलो और ऐसे ही छोड़ते रहो मुझको, मै अब तुमसे हमेशा ही चुद्वंगी, जब भी तुम्हारा लंड खरा हो मुझसे बोलना, मै अपनी चुत तुम्हारे लौरे के लिया खुली रखूंगी. हमलोग इसतरह एक-दुसरे से बाते करते हुए खुब जमकर चुदाई कर रहे थे और नमीता क़ी चुत से फच फच क़ी आवाज निकल रहा था. नमीता बोले, "है शाम! सुन रहे हो, मेरी चुत तुम्हारा लंड खा कर मस्त हो गयी है और गाना गा रही है." मै बोला, "है मेरी रानी! एह आवाज हम दोनों क़ी चुदाई क़ी आवाज है और तुम्हारी चुत जितना पानी चोरेगी आवाज उतना ही मधुर होगा. तुम्हे मेरा लंड क़ी चुदाई पसंद आरहा है न? नमीता अपनी कमर उचलते हुए बोले,

"अबे चूतिया, अगर मुझे तुम्हारा लंड और तुम्हारे लंड क़ी चुदाई पसंद नहीं होता तो क्या मै इसतरह तुम्हारे नीचे नंगी अपनी टांग उठाई पानी चुत में तुम्हारा लंड लती? बस अब बहुत बाते कर चुके अब जरा मन लगा कर जम के नहरे चुत चोदो." थोरी देर बाद नमीता बोले, "है और जोर से चोदो, मेरा पानी छूटने वाला है. आने दो तुम्हारा लंड नहरी चुत में. तुमभी अपने लंड मेरी चुत में झरो, है अब मै झरने वाली हूँ, बस ऐसे ही पलते रहो."

मै भी दाना-दान नमीता क़ी चुत में अपना लंड पेल रहा था और उससे बोला, "है मेरी रानी, मै भी अब झरने वाला हूँ, ले अब ले नेहरा लंड का पानी अपने चुत से पी-जा, है अब मै तेरे चुत में अपना लंड का पानी चोरने वाला हूँ. अपनी टांगो को और फैला दे, अपनी हातों से अपनी चुत को और खोल और अब मै झरने वाला हूँ." इतना कहते ही मै नमीता के चुत में दो चार कास कास कर धक्के मरे और झर गया.

नमीता क़ी चुत भी नहरे लॉरे के झरने के साथ ही झर गयी और हम लोग एक दुसरे से चिपटे हुए १०-१५ मिनुतेस के लिए पर्रे रहे. फिर मैंने अपना लंड नमीता क़ी चुत से निकला. लंड निकलते ही नमीता क़ी चुत से सफ़ेद पानी क़ी धर निकलने लगी और उसकी गंड से हो कर बिस्तर पर गिरने लगी. मैंने नमीता से कहा, "नमीता बिस्टर ख़राब हो गायेगा और यह दाग बहुत हो मुस्किल गायेगा, अब तुम उठो और जा कर अपनी चुत और गंद को धोलो." नमीता मुस्कुराते हुए बोले,

मै कैसे बाथरूम में जून, तुमने तो मेरा सारा बदन ही तोंर दिया, अभी तक मेरे सरे बदन में चुदाई का क्नेहर चढ़ा हुआ है और फिर बाथरूम नहरे बहन के कमरे से होकर जाना परेगा." फिर मैंने नमीता क़ी पेतोकोअत से उसकी चुत और गंड पोंछ डाली, . अब नमीता उठी और मेरे लौरे को पाने मुंह में ले कर उसको कहते लगी और नमीता लंड को अपने जिव से चाट चाट कर उसको साफ कर दिया. इस तरह अह उस्दीन हमलोग ने यह चुदाई क़ी. .. बाद में पता चला क़ी नीरज तो नपुंसक था ... इसलिए वो और उसकी बीवी इतनी जल्दी मान गये थे॥ खर मुझे इससे क्या में तो अब जब चाहुगा नीराज क़ी बीवी से मजा लूंगा॥

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Published: By: Nirmala - 21:34

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मै भी अब रुकना नहीं चाहता था. मै ने अपने हातों से नमीता के दोनों पैर घुटने से मोर कर उठा दिया और उनको फैला दिया और नमीता से कहा, "डार्लिंग अपने हातों से मेरे लंड को अपनी चुत के छेद पर रक्खो. नमीता ने मेरे कहने के मुताबिक अपने नाजुक मुलायम हातों से मेरा फर्फरता हुआ लंड को पाकर कर अपने चुत क़ी छेद के उप्पेर रख दिया और बोले,

"है अब जल्दी से पेलो, रहा नहीं जाता. आज तुम मेरी चुत चोद चोद कर उसको भोसरा बना डालो. देखते नहीं हो कैसे मेरी चुत लंड खाने के लिए लार टपका रही है?" तब मैंने उसकी होटों पर चुम्मा लेते हुए धीरे से अपना लंड का सुपर नमीता के चुत में घुसाया. वो मेरे लंड अपने चुत में लेने के लिए कमर उचका रही थी. जैसे ही मेरे लंड कतीब २-३" नमीता के चुत में घुसा, नमीता चिल्लाने लगी, "है,

मेरी चुत फट रही है. ऊओईईईईए ऊओईईई ओह ओह ओई माँ ही मैं मेर गयी. ऊईई मेरी चुत फट गयी ऊ ऊ ही माँ ओई मेरी चुत फट गयी."नमीता क़ी आवाज इतना तेज था क़ी मुझे डर लग रहा था उसकी बहन सुन न ले और जाग गए. मै उसके मुंह के उप्पेर अपना हाथ रख दिया लेकिन वो रो रही थी और बोल रही थी, "मेरी चुत फड्ड दी, ऊईई मेरी चुत फट गयी, बहार निकालो नहीं तो मैं मेरर जाऊं गी." मै धीरे धीरे उसकी चुन्ची को अपने दोनों हातों से दबाने लगा और अपनी होटों से उसके होटों पर चुम्मा दिया. नमीता फिर बोले, "प्लेअसे बहार निकालो अपना लंड वरना मैं मर जाऊंगी." मै उसकी दोनों बूब्स थोरा जोर देकर दबाने लगा और बोला, "मैं तुम्हे मरने नहीं दूनघा, बस थोर्री देरर मे ठीक हो जायेगा".

नमीता अपना एक हाथ अपने चुत पर ले गयी और मेरा लंड को पाकर कर बोली, "उफ़ यह बोहत मोत्ता हाय, इस ने मेरी चुत फार दी हाय." ओह मेरी माआअ! मर गयीईए! मेरी चुत से तुम अपना लौरा जल्दी निकालो." लेकिन मै कहाँ सुनने वाला था. मै अपना होटों से नमीता क़ी होटों को दबाते हुए एक जोरदार धक्का मारा.

नमीता चिल्ला तो नहीं पी लेकिन हमको अपने उप्पेर से हटाने के लिए हमे अपने हातों से धकेलने लगी. मै नमीता को अपने दोनों हातों से कसकर पाकर रक्खा था और इसी दौरान मैंने अपनी कमर उठा कर एक जोरदार धक्का उसकी चुत में और मारा और अपना लंड उसकी चुत में पूरा का पूरा घुस गया.



मै अपना पूरा का पूरा लंड नमीता के चुत में घुसेड कर चुप चाप पड़ा रहा. मै उसकी चुन्ची को कास कर पकड़ लिया और अपना आधा लंड बहार किंच कर निकला. जैसे ही मेरा आधा लंड बहार निकल कर आया मै फिर से एक धक्का मारा. नमीता रोने लगी, "ऊईए हेई नहीं मैं मरर जाऊं गी मेरी चुत फट जाय गी, प्लेअसे अभी आपने लंड को नहीं हिलाऊ," करीब १० मिनुतेस के बाद नमीता ने मेरी आँखों में देखती हुई मुस्कुरा कर बोली, "है, तुम्हारा लंड बहुत ख़राब है.

इससमे मेरी चुत फट गयी, अब तुम्हारा लंड और कितना बाकि है?" मै उसकी बूब्स को मसलते हुए पूछा, "है, मेरी चुद्दाकर नमीता रानी, लगता है क़ी तेरी चुत में अब दर्द कम हो गया है और अब वो लंड के धक्के खाने को तयार है. तो अब मै शुरू करून तेरी चुत क़ी चुदाई?" नमीता मेरे गल पर अपने दांतों से हलके से कटा और फिर बोली, "है, मेरे चोदु रजा, मै कब से अपनी चुत में तुम्हारे लंड के धक्के खाने के लिए ताराप रही हूँ, और तुम पुचेतो हो चुदाई शुरू करूँ या नहीं?..
 
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मुझे बहुत मज़ा अरह है, मेरी पुरे जिसम में कुछ कुछ हो रहा है. है मुझको इतना मज़ा कभी नहीं मिला. और दबाव मेरी बूब्स को." मई अब नमीता के कपडें उतर दिए मै फिर उसकी ची को चूसते हुए उसकी पेतिकोअत का नारा भी खोल दिया जो क़ी उसकी चिकने झंघ से सरकती हुए नेचे गिर गया. अब नमीता मेरे सामने अपनी सिर्फ पंटी पहने खरी हुए थी. मै नेहा के पंटी के उप्पेर से उसकी चूत तो अपने हाटों मलकर मसलने लगा और अपनी एक उंगली से उसकी चूत के छेद को खोदने लगा. अब नेहा क़ी गर्मी अपनी इंतहा पर थी और वो पहले मेरा पंट और फिर मेरा underwear को खोल दिया.

अब मै नमीता के सामने बिलकुल नंगा खरा था. मुझको नंगा कर नमीता हमसे थोरी दूर जा कर खरी हो गयी और मुझको घूरने लगी और बोली, "है शाम! तुम नंगे बहुत सुन्दर दीखते हो, तुम्हारा खरा हुआ लंड देखने में बहुत ही अच्हा लगता है और कोई भी लारकी या औरत इसको अपनी चूत में लेकर चुदवाना चाहेगी." मै अब नमीता का पास गया और अपने बंहू में ले कर उससे पूछा, "मुझे कोई और लरकी या औरत से मतलब नहीं है, क्या तुम मेरे लंड को अपने चूत के उंदर लेना चाहती हो क़ी नहीं?"


तब वो बोले, "आरी तुम अभी नहीं समझे, मै तो कब से तुम्हारे लंड से अपनी चूत क़ी साल फोर्वना चाती हूँ. अब जल्दी से तुम हमको चोदो. मेरे चूत में आग लगी है." इतना सुनते ही मैंने नमीता की पंटी उसके चूतर के उपर से निकल दिया और फिर पंटी को उसकी टांगो से अलग कर दिया. नमीता ने अब झुक कर मेरा लंड को गौर से देखने लगी और देखते देखते ही उसका टोपे पर चुम्मा दिया और फिर उसको अपने मुंह में ले कर चूमने लगी.

मै तब गरम हो कर बोला, "लंड को सिर्फ चूमो मत, उसको अपने जबान से चाटो और जोर जोर से चुसो." नमीता तब बोली, "तुम चुप करो, मुझे अपना वर्क करना अता है और मै अपना कम कर रही हूँ." फिर नमीता ने मेरे लंड के टोपे को अपने मुंह में ले कर चूसने लगी और कभी कभी उसको अपने जबान से चाटने लगी. मुझको अपने लंड चुसी से रहा नहीं गया और अपना लंड नमीता के मुंह में पेल दिया.



नमीता लंड को अपने मुंह के उंदर लाती हुई बोले, "वह मेरे शाम अभी और पेलो अपने लंड को मेरे मुंह में, बादमे इसको मेरे चूत में डालना." अब मै नमीता को बिस्तर पर लेटा दिया और उसके दोनों पैर फैला दिया. मेरे आँखों के सामने उसकी clean शवेद चुत पूरी तरह से खुली हुई थी और मेरे लंड खाने के लिया तयार थी. मै अपना उंगली उसकी चूत में पेल कर उंदर-बहार करने लगा. नमीता तब जोर से बोली, "है, कौन टाइम बर्बाद कर रहे हो, मेरे चुत को उंगली नहीं चाहिए. वो लंड खाने क़ी लिए तरस रही है, उसको अपना लंड खिलाओ."

मै बोला, "कौन फिक्र कर रही हो, अभी तुम्हारी चुत और मेरा लंड का मिलन करवा देते हूँ. पहले मै तुम्हारी चुत का रस चख तो लू. सुना है क़ी सुंदर और सेक्सी औरत के चुत का रस बहुत मीठा होता है." तब नमीता बोले, "ठीक है, तुम मेरा चुत चाटो मै तुम्हारा लंड चुसुंगी," और हम दोनों 69 position ले कर बिस्तर पर लेट गए. अब नमीता क़ी चुत बिलकुल मेरे आंकों के सामने थी. मैंने देखा क़ी उसकी चुत लंड खाने के लिए लर चोर रही थे और उसकी चुत बहार और उंदर से रस से भीगा हुआ था. मैंने जैसे ही नमीता क़ी चुत में अपना जिव घूसेरा वो चिल्लाने लगी, "है, चुसो चुसो, और जोर से चुसो मेरी चुत को. और उंदर तक अपनी जीव घुसाओ, है मेरी चुत क़ी घुन्दी को भी चाटो,

बहुत मज़ा अ रहा है. ही मै अब छूटने वाली हूँ." और इतना कहते ही नमीता क़ी चुत गरम गरम मीठा रस छोर दिया जिसको क़ी मै अपने ज़बान से चाट कर पूरा का पूरा पी गया. उधर नमीता ने अपनी मुंह में मेरा लंड लेकर उसको खुब जोर जोर से चूस रही थी. अब नमीता का चेहरा चमक रहा था और वो मुस्कुराती हुई बोले, "चुत चुसी में बहुत मज़ा आया, अब चुत चुदाई का मज़ा लेना चाहती हूँ. तुम जल्दी से अपना लंड मेरे चुत में पेलो, अब मुझसे रहा नहीं जाता."......

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Published: By: Nirmala - 21:30

सुहागरात दोस्त क़ी बीवी के साथ - 3

 
फिर नमीता मेरे लंड को मसलते हुए बोली, लेकिन अभी चुदाई में मजा नहीं आयेगा, मेरी बहन लंच के बाद टीवी देखते हुए २-३ घंटे के लिए सो जाती है और उस समय हमलोग मस्ती कर सकते है. मैंने पुचा कैसी मस्ती? नमीता मुस्कुरा कर बोले, "है, इतने भोले मत बनो संजय, मेरी चूत में आग लगा कर पूछते हो क़ी कैसी मस्ती? अरे मस्ती का मतलब जब मेरी बहन लंच के बाद सो जायेगी तो तुम अपने मस्त लंड से मेरी चूत चोदना, अब समझे मेरे चोदु रजा?"

मै उसकी इस तरह क़ी खुलाम खुल्ला बात सुन कर और गरमा गया और उसकी चूंची को ब्लौसे के बहार निकल कर उनकी घुन्दी को चूसने लगा और नमीता भी मेरे लंड को मेरे पंट से निकलने के लिए मेरी पंट का जिप खोला और underwear से लंड को बहार निकला ७.५ इंच का मोटा लंड फुफकारते हुए स्प्रिंग क़ी तरह बहार आ गया.. नमीता के मुंह से निकला..राम कितना लम्बा.. बाप रे.. तुम्हारा लंड तो मेरी चूत फाड़ डालेगा.. मै मार जाउंगी रजा, मैंने कहा डरो नहीं मै तुम्हे बहुत प्यार से चोदुंगा, वैसे भी निराज तो तुम्हे चोदता है न, इस्लियिए ज्यादा तकलीफ नहीं होगी, उसने कहा उसका लंड तो इसके सामने पेंसिल का टुकड़ा है.

वो तो ठीक से खड़ा भी नहीं होता, और अन्दर जाने से पहले ही दो बूँद रस निकलकर मुरझा जाता है.ये कहा कर नमीता ने मेरे लंड को दोनों हाथों से जोर जोर से मसलने लगी. तभी हमें बहार का दरवाजा खुलने क़ी आवाज़ आयी, उसकी बहन दुकान से सामान ले कर वापस आ गयी थी. हम लोगो ने जल्दी से अपने कपडे ठीक थक कर ड्राविंग रूम में जा कर बैठ गए और नॉर्मली बातें करने लगे. नमीता कितचेन में जाकर चिल्ली चिक्केन और रोटी ले आयी और हम तीनो लोग टीवी देखते हुए लंच लेने लगे.उसकी बहन ने पूंछा क़ी ये कौन है , तो नमीता ने कहा ये तेरे जीजा के बहुत करीबी दोस्त है और ऑफिस के काम से आये है.

अभी खाना खा कर ऑफिस चले जायेंगे. लंच के बाद में नमीता ने आंख मार कर मुझसे पुचा क़ी, "क्या आप अब ऑफिस वापस जायेंगे?" मैंने नमीता को लंच के धन्यवाद् दिया और आंख मार कहा, "हाँ मै अब ऑफिस वापस जाऊंगा."

नमीता मुझको बहार के दरवाजे तक छोड़ने आयी और नज़र बचा कर मेरे लंड को सहलाते हुए कहा, "तुम १०-१५ मिनुतेस के बाद वापस घर आ जाओ, तबतक मेरी बहन सो जायेगी. मै दरवाजा खुला रखूंगी और तुम चुप चाप चले आना." मै नमीता के घर से बहार जा कर उसकी कालोनी के बहार तक गया और एक पान वाले से पान खाया और एक मीठा पान नमीता के लिए लेलिया. फिर करीब १५ -२०मिनुतेस के बाद मै नमीता के घर गया. बहार का दरवाजा खुला ही था और मै चुप चाप उसके घर में घुस गया और दरवाजा धीरे से बंद कर दिया. नमीता सामने ही थी वो मेरे पास आयी और धीरे से बोले, "please १० मिनुतेस और इन्तेजार करो, मेरी बहन अभी अभी सोयी है." मैंने नमीता को मीठा पान अपने हाटों से खिला दिया.

फिर नमीता करीब १० मिनुतेस के बाद मेरे पास आयी और दोनों कमरों के बीच का दरवाजा धीरे से बंद कर दिया. जैसे ही नमीता ने दरवाजा बंद किया मै उसके पास पहुँच गया और उसको अपने बाँहों में पीछे से भर लिया. नमीता भी हमसे लिपट गयी और मुंह घुमा कर मेरे होंटो को चूमने लगी. मै भी उसको जोर से लिपट लिया और उसकी मखमली होंटो को चूमने लगा. फिर मैंने धीरे से हाथ बाधा कर उसकी गोल गोल तहस चूंची को अपने हाथ में लेकर धीरे धीरे मसलने लगा. नमीता चूंची मसले से ओह! ओह! करने लगी और मेरा लंड को पंट के ऊपर से पकड़ कर सहलाने लगी...

मै अब अपना हाथ उसके ब्लौसे के अंडर ले गया और उसकी नुकेली घुन्दी (निप्पल) को अपने उंगली के बीत्च ले कर मसलने लगा. मैंने अब नमीता के ब्लौसे को खोल दिया और उसकी बूब्स को उसकी ब्रा के उप्पेर से दबाने लगा. नमीता मुझसे लिपटे हुए बोली, "और जोर जोर से मेरी बूब्स को मसालों, बहुत मज़ा अ रहा है. तुम्हारे हाथ में जादू है, तुम मेरी बूब्स को दबा रहे हो और मेरी चूत पानी छोर रही है." मै उसकी ब्रा का हूक्क्स खोलते हुए कहा, "अभी तुमने मेरा हाथ का जादू ही देखा है, मै अभी तुमको अपना लोरे का जादू भी दिकाहुंगा," और मै उसकी एक चूंची मेरे मुंह में भर कर चूसने लगा. नमीता मेरे से अपनी बूब्स चुसवा कर बहुत गरमा गयी और जोर जोर से बर्बराने लगी, "है सम और जोर से मेरी बूब्स मसालों, इनको खूब दबाओ, दबा दबाके इनका सारा रस पिजाऊ....


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Published: By: Nirmala - 21:28

सुहागरात दोस्त क़ी बीवी के साथ - 2

 
पानी का ग्लास लेते हुए मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खिंचा.. वो मेरे गोद में आ कर गिरी, मैंने उसे दोनों हाथों से पकड़ा और अपनी बाँहों में भर लिया. वो छुड़ाने क़ी कोशिश करने लगी. मैं कहा क़ी रानी रुक जाओ. उसने मेरी तरफ देखा , फिर वो थोडा आगे बढ़ी मैंने फिर से उसे अपने पास खिंचा नमीता मेरे पास आगयी और मुझसे मैंने उसे कास के अपने सीने से लगा लिया, अब नमीता भी मुझसे लिपट गयी, मैंने उसके गालों पर और गरदेन पर सनेहा फिर उसका चेहरा ऊपर उठा कर उसके पतले गुलाबी होंठो को सनेहा और चूसने लगा, करीब ५ मिनट तक मै उसे चूमता रहा अब नमीता भी खुल गयी और मुझको चूमने लगी.

मै भी नमीता को अपने से लिपट लिया और उसकी ग्लू को चूमने लगा और उसकी चूंची को सारी और ब्लौसे के उप्पेर से मसलने लगा.मेरे चुम्बन और चुन्ची के मसलने से नमीता गरम होने लगी. मैंने एक हाथ उसके चूतड पर रखा, आहा. क्या मस्त चूतड थे, उसका फिगुरे था ३४ २६ ३६, अब आप खुद सोच लीजिये उसके गोल चूतड सहलाते हुए मैंने बहुत दबाया और पीचे से गांड को दबाते हुए चूत तो टटोला. नमीता क़ी चूत में सामने से मेरा मोटा लंड धक्के मार रहा था, और नमीता ने इसे महसूस किया और फुसफुसा कर बोली..आपका तो बहुत लम्बा और मोटा लग रहा है...

मैंने कहा खुद हाथ लगा कर देख लो तब नमीता अपना हाथ मेरे पंट के जिप्पेर के पास ला कर मेरे लंड को अपने हाथों से सहलाने लगी और मेरे आँखों में झांक कर मुस्कुराते हुए बोली बहुत मोटा और लम्बा लग रहा है..उफ़ इसे हाथ लगाने से मुझे कुछ हो रहा मैं कहा बन्धा आपका घुलाम है आप जो चाहे करो जी. नमीता धीरे से मुस्कुरा कर अपने हाथों से मेरे लंड पंट के उप्पेर से मसलने लगी और बोली, "हाँ, मै तुम्हारी assistant हूँ इसलिए मुझको चूमना और मेरा बूब्स को मसलना तुम्हारा कम है." फिर वो मुझसे बोले "please मेरी चुन्चियों को और जोर से दबाओ, बहुत मज़ा अ रहा है, तुम्हारे हाथो में जादू है मुझे नशा सा हो रहा है. तुम मेरी चूंची दबा रहे हो और मेरी चूत में कुछ कुछ हो रहा है. है! तुम्हारा तो लंड भी अब खरा हो गया है.

अब तुम इसका क्या करोगे." मैंने उसे चुमते हुए कहा, "हाँ मै तुम्हरी चुन्ची को दबाते दबाते बहुत गरम हो गया हूँ , तुम्हारी चुंचियां सच में बहुत मस्त है, ऊपर से दबाने में इतना मजा आ रहा है तो नंगी करके दबाने में और मजा आयेगा. तुम्हारे चूत क़ी आग मेरे लंड तक पहुँच रही है और इसीलिए मेरा लंड खरा हो गया और अब मै तुमको बिना चोदे छोड नहीं सकता. अब तुम जल्दी से अपने कपडे उतर कर नंगी हो गाओ और बिस्टर पैर पैर फैला कर लेट जाओ.

मै अपना लंड तुम्हारे चूत में पेलूँगा और अपने लंड को सकून दूंगा. नमीता ने मेरे लंड को मसलते हुए कहा "है, अब मुझसे भी रहा नहीं जाता मेरी चड्डी भी गीली हो रही है. चूत से लगातार पानी निकल रहा है मै चुदवाने के लिए बेकरार हो रही हूँ, और तुम अपने खड़े लंड से जल्दी चूत क़ी कास कर चुदाई करो और मेरी चूत चोद चोद कर उसको भोसड़ा बना दो. मेरी चूत पानी छोड रही है. है! मेरा पंटी मेरे चूत के रूस से भीघ रही है.".....

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Published: By: Nirmala - 21:26

सुहागरात दोस्त क़ी बीवी के साथ - 1


मैं आज जो कहानी सुनाने जर आहा हूँ वो एकदम सच्ची है.. लेकिन काफी दिन पुरानी है.. फिर भी हर घटना को आपके सामने ला कर आपके लंड या चूत का रसीला पानी निकलने क़ी कोशिश करूँगा.. पहले मैं आपको अपने बारे में बता देता हु. मेरे highet १७३ cm है, मेरा weight ७९ कग है और मेरा लंड ७.५ इंच लम्बा और करीब २.५ इंच मोटा है. अब अपनी बात पर आते हैं. ये घटना फिछले सन्डे क़ी है. मेरा एक दोस्त है जिसका नाम निराज है. नरेन्द्र एक दुबला पतला लड़का है और financial weak भी है. कुछ दिनों पहले निराज क़ी शादी नमीता से हुई..

नमीता एकदम मस्त लडकी है. जब से मैंने उसको देखा मैं उसको चोदना चाहता हूँ. एक दिन निराज ने मुझसे कहा क़ी यार पैसे क़ी बड़ी किल्लत है और घर का खर्च नहीं चल प् रहा है. मुझे ये सुनकर लगा क़ी शायद मेरा काम बन सकता है.उसने कहा कुछ पैसे का इंतज़ाम करवा दे. मैंने कहा क़ी यार मैं तेरी मदद कर सकता हूँ अगर तू मेरी बात मान ले. उसने पुछा कौन से बात? तब मैंने कहा मै तेरी परेशानी मिटा दूंगा लेकिन इसके बदले में तू मुझे क्या देगा? उसने कहा मेरे पास तो कुछ भी नहीं है..



मैंने कहा तेरे पास जो है वोही दे दे. वो मेरी तरफ देखने लगा. फिर पूंछा क्या है मेरे पास? मैंने उसे कहा क़ी मैं नमीता को चोदना चाहता हूँ. ये सुनकर वो दांग रह गया और बोला क़ी मुझे तेरे से पैसा नहीं चाहिए और चला गया. कुछ दिन बात वो आया और बोला क़ी अगर मैं मान भी जाऊ तो नमीता को कैसे राजी करूंगा. मैंने कहा क़ी ये तेरा काम है.तू सोंअच क़ी नमीता को कैसे मानना है. वो कुछ नहीं बोला और चला गया.

फिर वो आया और बोला क़ी नमीता राजी है. लेकिन सिर्फ एक बार. मैं कहा ओके. फिर सन्डे का दिन फिक्स हुआ. मैं सन्डे को उनके घर पंहुचा.निराज घर से निकल गया था. नमीता ने दरवाजा खोला. नमीता बहुत डरी हुयी थी और घबरा रही थी. शायद निराज ने उसे सब बता दिया था.मैंने जाते ही उसको देखा फिर उसने मुझसे सोफे पर बैठने के लिए कहा, और अन्दर से पानी का ग्लास ले कर आई. आज उसने बहुत ही पारदर्शक सारी पहनी थी और खुले गले का ब्लौसस. उसमे से उसकी गोरी गोरी आधी चुंचिया बहार झांक रही थी..... 



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Published: By: Nirmala - 21:14

Wednesday, 4 July 2012

शुभारम्भ -part1

दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ से मेरी नींद खुल गयी
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अनीता चाची रूम साफ़ करने आई थी. मैं यूँही ऑंखें बंद कर के पड़ा रहा. रात को पोर्न देखते देखते दो बार मूठ मार चूका था इस लिए थक गया था.

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चाची मेरे कंप्यूटर टेबल को साफ़ कर रही थी. तभी मुझे याद आया की मैंने जिस न्यूज़ पेपर मैं मूठ मारी थी उसको वही पर छोड़ दिया था.

shit
चची ने वो कागज़ उठाया और नीचे फ़ेंक दिया. मेरी जान मैं जान आई तभी चची पीछे मुड़ी और उन्होंने कागज़ फिर से उठा लिया
http://goo.gl/oSu6W
सारा माल तो सुख चूका था मगर सूखे माल के दाग और उसमे से आती नमकीन खुशबू ये बताने के लिए काफी थे की वो क्या है. चची ने एक दम से उसे फ़ेंक दिया अचानक मुझे देखा और कमरे से बाहर निकल गयी. मेरी गांड भी फट रही थी और हंसी भी आ रही थी

मेरा नाम शील है, फर्स्ट इयर मैं हूँ और अपनी उम्र के सब लडको जैसे महा ठरकी हूँ. आज तक सिर्फ कंप्यूटर पर पोर्न देख देख कर मूठ ही मरी है और कुछ किया नहीं था. शुरू से ही थोडा गांड फट हूँ और स्कूल मैं भी चुप चाप ही रहा करता था क्योकि मैं हकलाता हूँ. कही किसी लड़की से बात ही नहीं कर पाया. स्कूल मैं रिया जो मेरी क्लास मैं थी, उसे पसंद करता था मगर कभी बात भी नहीं की.

अभी चची के जाने के बात मेरी गांड फटने लगी की कहीं चची मोम, पापा या चाचा को बोल न दे. रूम से बाहर आया तो कोई भी नहीं था. चाचा और पापा दुकान जा चुके थे.
मोम मंदिर गयी होगी और चची शायद नहा रही थी.
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मैंने सोचा की बात दबा ही लेते है. तभी चची आ गयी

चची : अरे शील चाय पिएगा क्या ?
मैं : ह ह हा च च चची

चची : क्या हुआ तुझे ? ( मैं जब भी गुस्से में या नर्वस होता हूँ तो हकलाने लगता हूँ )
में : न न नहीं क क कुछ नहीं

में : वो च च चची .....म म मेरे रूम में ......व व वो कागज़ थ थ था ना .......व व वो स स सॉरी.

शायद वो कुछ समझी नहीं. तभी उनको क्लिक हुआ की में मूठ वाले कागज़ की बात कर रहा हूँ

चची : (माथे पर सल लाकर बोली ) देख शील यह गंदे गलत काम मत किया कर. पड़ने लिखने की उम्र है. पढ़ ले नहीं तो तेरे चाचा जैसे दुकान की गुलामी ही करता रह जायेगा
मैंने चैन की ठंडी सांस ली और सर झुका के बोला की अब नहीं करूँगा चची. चची ने स्वीट से स्माइल दी और कहा की चल में चाय बना देती हूँ .
तभी मोम आ गयी और बोली की चची भतीजे में सुबह सुबह क्या खिचड़ी पक रही है. चची ने कुछ नहीं कहा और मुझे चाय दे दी.
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कॉलेज में मेरे ज्यादा दोस्त नहीं थे. सब भेन्चोद मेरे हकले पन का मजाक बनाते थे इस लिए में थोडा रिसेर्वे ही रहता था. आज कॉलेज के लिए निकला तो बस छुट गयी और मुझे पैदल जाना पड़ा. लेट तो हो ही गया था सोचा कैंटीन में कुछ खा लूँ. में घुसा और मुझे नवजोत और उसका गेंग दिख गया. में चुप चाप साइड में जाके बैठ गया और सर झुका के बुक देखने लगा. तभी

नवजोत : ए हकले .........अबे ओ हकले ........इधर आ
में ( नर्वस होके ) : क क क्या हुआ ?

नवजोत : इधर आ लोडू

में गया और उनकी टेबल के पास खड़ा हो गया:
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नवजोत : चल गाना सुना

हुआ यूँ था की कॉलेज में मेरे फर्स्ट डे को जब हम सब की रेगिंग ली गयी थी तो मुझे कहा गया की "सलामे इश्क मेरी जान" गाना गाऊ. उस दिन नर्वस होने की वजह से में बहुत हकलाया था और नवजोत जो की मेरे से २ साल सीनियर था उन सब का लीडर था . उस ने मेरी इज्ज़त धुल में मिला दी थी और सब जान गए थे की में हकला हूँ

में : सॉरी मेरा गला ख़राब है
नवजोत : साले लोडू गाता है या दू गांड पे लात.

और उस ने मेरे छोटे मगज पर हाथ मार दिया, चटाक की आवाज़ आई. दिल तो ऐसा किया की साले का खून कर दूँ. उस ने दुबारा हाथ उठाया ही था.

तभी कैंटीन में कुछ लड़किया आई. उनमे से एक लड़की जो पिंक कलर के सुट में थी, खुले हुए सुनहरे बाल, सोने और दूध की मिलावट का रंग. एक हाथ में चूड़िया और गांड में बला की लचक. वो सीधी हमारी टेबल के पास आई और नवजोत से बोली
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भैया, मेरी गाड़ी पंक्चर हो गयी है. क्या आप मुझे साथ में घर ले चलेंगे

नवजोत : अरे पिया कहां हुई पंक्चर ? गाड़ी कहां है ?

(ओ तो इसका नाम पिया है और ये अप्सरा इस मादरचोद की बहन है )

पिया : कॉलेज में ही है भैया. ये लो चाबी
नवजोत : अरे विक्की , ये ले चाबी और घर छोड़ देना

नवजोत जाने लगा अचानक मुड़ा और मुझसे बोले की फिर सुनेगे तेरा गाना तानसेन......पिया ने भी मेरी तरफ देखा. हमारी नज़रे मिली और उस ने माफ़ी से भरी एक हाफ स्माइल दी. और चली गयी

रात को सपने मैं मैंने देखा की चाची मेरे रूम को साफ़ कर रही है मगर उन्होंने साडी नहीं पहनी हुयी है. ब्लाउस मैंने उनके बूब्स हिल रहे है और पेटीकोट में उनकी गांड का शेप साफ नज़र आ रहा है. फिर वो मेरे पास आई और मेरे जांघों पर हाथ फिराने लगी और धीरे धीरे मेरे लंड पर हाथ फेरने लगी. तभी मेरी नींद खुली और पजामे में ही मेरा माल निकलने लगा. ओ गोड....मैंने फटाफट मेरी कॉपी में से एक पेज फाड़ा और अंडरविअर और लंड को साफ़ कर लिया और वापस सो गया.
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सुबह किसी के हिलाने से मेरी नींद खुली. देखा तो चाची थी और काफी गुस्से में लग रही थी.

मैं : क क क्या हुआ चाची ??
चाची : कल ही समझाया था ना ? क्या है ये ? उस कागज़ की तरफ इशारा कर के उन्होंने पुछा

मैं : व व वो मेरा नहीं है.
चाची : मतलब कोई और आके रख गया है क्या ?

मैं : न न न नहीं वो अपने आप हो गया था
चाची : मतलब ?

मैं : न न न नींद में हो गया था चाची मैंने नहीं किया
चाची : ऐसा कोई होता है क्या ? झूट मत बोल.
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मैं : न न नहीं चाची मैंने स स सपना देखा और अपने आप हो गया. म म मैंने तो इस से सिर्फ साफ़ क क किया था
चाची : ऐसा क्या सपना देखा ?

अब मेरी बोलती पूरी तरह से बंद.

मैं फटाफट रेडी हुआ और घर से निकल लिया. चाची को फेस नहीं कर सकता था.

कॉलेज मैं घुसा और गार्डन में बैठा था तभी मैंने देखा की नवतोज की बहन, अप्सरा सी सुंदर पिया एक लड़के से बातें कर रही है. मेरी गांड सुलगने लगी कि भेन्चोद ऐसा माल मुझे क्यों नहीं मिलता.

अकाउंट की क्लास में मैंने देखा की वो भी बैठी थी. मैंने अपने पास वाले से पुचा भाई ये अभी न्यू एडमिशन कहाँ से आया. वो बोला अबे सरदार प्रताप सिंह की बेटी है.
फायनल एक्साम के पहले भी आती तो एडमिशन मिल जाता. मैं अकाउंट में होशियार था और जो सर हमे अकाउंट पड़ते थे, वो न जाने क्यों मुझसे नरमी से पेश आते थे
शायद मेरे मार्क्स अच्छे आते थे और फिर मैं उनकी नज़र मैं सीधा सादा हकला था.
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क्लास ख़तम हुई और सब निकल लिए. मगर पिया रुक के सर से बातें करने लगी. मैं जा ही रहा था की सर ने मुझे आवाज़ दी और बुला लिया.

सर : शील, ये पिया है. लेट एडमिशन है इसलिए स्टार्टिंग के तीनो चेप्टर मिस कर चुकी है. तुम्हारे नोट्स वगेरह इसे दे देना.

मैंने कुछ बोला नहीं सिर्फ सर हिला दिया. फिर सर के जाने के बाद थोडा धीरे धीरे बिना हकलाये उस से बोला की कल देता हूँ ताकि उसके सामने इज्ज़त बच जाये. वो भी थैंक्स बोल के निकल ली.

घर पे गया तो आँखों में पिया का ही चेहरा घूम रहा था. डायनिंग टेबल पर बैठा था और टीवी देखा रहा था तभी चाची वहां पर झाड़ू मरने लगी. मैं चाची को बोलने ही वाला था की मेरी नज़र चाची के ब्लाउस पर गयी. उनका आंचल नीचे आ गया था और सावले सलोने दोनो बूब्स जोर जोर से हिल रहे थे. शादी के ५ साल बाद भी उन्हें बच्चा नहीं हुआ था इस लिए आज भी कड़क थी. अभी तक मैंने उन्हें उस नज़र से देखा नहीं था पर सपने में माल निकल देने के बाद से मेरी नज़रे बदल गयी थी.

तभी वो सीधी हुई. मैंने तुरंत नज़रे टीवी की तरफ कर ली. चाची ने अपने आंचल से गले का पसीना पोचा और अचानक अपनी चूत की साइड में खुजाने लगी.
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ओ shit . मेरा माहोल बनने लगा. अचानक उन्होंने मुझे देखा और अपना हाथ हटा लिया. चाची को शायद गुस्सा आ गया था क्योकि उनके माथे पर फिर से सल आ गया था. मै वहा से चुपचाप सरक लिया.

अगले दिन कालेज में अकाउंट के लेक्चर के बाद पिया मेरे पास आई और बोली

पिया : हाय
मैं : ह ह हाय

पिया : नोट्स लाये हो आप

माँ की चूत.....मैं नोट्स घर पर भूल आया था.

मैं : स स सोरी .....क क कल देता हूँ

उसका चेहरा थोडा उतर गया. कसम से इतनी क्यूट और सेक्सी लग रही थी की बस पकड़ो और..........मैंने अपने सर झटका और उसको बाय बोल के निकल आया.

रात तो घर लेट पहुंचा. सब सो चुके थे मेरे पास मैं घर के डोर की चाबी रहती है. बिना आवाज़ किये डोर खोला और अपने रूम में जाने लगा तभी चाची के रूम से कुछ आवाज़ आई. उनका रूम और मेरा रूम पास पास है और उनके बीच में एक दूर था जो अब बंद कर दिया है, मैं मेरे रूम में गया और कान लगा के सुनने लगा

चाची : ममम सुनो न .....ऐ जी .... सो गए क्या ?
चाचा : हम्म क्या है ?

चाची : यहाँ आओ ना
चाचा : क्या है नीलू ?
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चाची : देखो ना मुझे यहाँ पर आजकल बहुत खुजली होती है
चाची : नीलू गर्मी में रेश आ जाते है. क्रीम लगा ले.

मैं समझ गया था की चाची को कहाँ खुजली हो रही है. मैंने डोर की दरारों में देखने की कोशिश की और एक दरार से उनका बेड दिखने लगा. चाची ने सामने से ओपन होने वाला गाउन पहना था और मेरा चाचा पट्टे वाली चड्डी में था.

चाची : अरे देखो तो सही की मुझे हुआ क्या है ? इतनी खुजली क्यों होती है ?
चाचा : नीलू सो जा यार. दिन भर दुकान में गांड मराने के बाद मुझ में इतनी शक्ति नहीं की तेरा चेकअप करू.

चाची : मम्म देखो ना जी. ऐसी खुजली होगी तो नींद नहीं आयगी

साली मुझे बोलती है की गंदे गलत कम मत किया कर और यहाँ पर .....

चाचा : नीलू प्लीज़ यार
चाची गोउन खोलते हुए : देखो ना जी.......क्या हुआ हे. दिन भर खुजली मचती रहती है. क्या आप को भी वहां पर खुजली होती हे.

ये बोलकर चाची ने चाचा के चड्डे में हाथ ड़ाल दिया और चाचा के लुंड को सहलाने लगी. साली चाची तो बहुत गरम है.
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चाचा ने हुन्कार भरी और चाची को किस करने लगा. चाची के मुह से मम मम की आवाज़ साफ़ आ रही थी. चाचा ने उसके गाउन को खोल दिया और चाची के गोल संतरों की दर्शन करा दिए. बच्चा भले ही ना हुआ मगर मेरी चाची के मम्मे इतने शानदार होगे इसका मुझे अंदाज़ा भी नहीं था. साली लेटी हुई थी फिर भी उसके बादाम जैसे निप्प्ले अलग ही दिख रहे थे. अचानक मेरे चाचा ने चड्डी खोली चाची का गाउन खोला. मैं तो चाची की चूत भी नहीं देख पाया और मेरा चाचा उसकी टांगों के बिच में बैठ गया. बस चाची की मोटी मोटी जांघें दिख रही थी. मैंने अपना लैंड बहार निकल लिया और हिलाने लगा.

चाची : मम्म मुझे और किस करो ना . इन का ख्याल कोन रखेगा ( अपने मम्मे अपने हाथों में लेकर बोली)

चाचा ने अपना थुक लंड पे लगाया और सीधा ही चाची की चूत में ठोक दिया. चाची के मुह से आह निकल गयी. चाचा की बाल भरी गांड जोर जोर से हिलने लगी.
दस पंद्रह धक्के मारे और चाचा सांड जैसा हुन्कारने लगा.

चाची : नहीं अभी नहीं. डौगी करो. पीछे से डालो आ आअह. नहीं ना ना आह

चाचा तो अनसुनी कर के धक्के मरता गया और एक दम उसका शरीर अकड़ा और भेन्चोड ने अपने माल छोड़ दिया.

चाची : ये क्या किया आपने ? ऊह मुझे हर बार ऐसे ही छोड़ देते हो. मुझे और जोर से खुजली हो रही hai.n

चाचा ने चड्डी से अपने लंड पोछा और चाची की तरफ पीठ करके सो गया. चाची के साथ तो चोट हो गयी. कहाँ तो डौगी में चोदने का बोल रही थी और कहाँ दस धक्के मैं कहानी ख़तम.
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मेरा लंड मेरे हाथ में ही था. मैं कभी अपने लंड को देखता और कभी बेचारी चाची को.

चाची की चूत दिख नहीं रही थी. मगर मैंने देखा की उनका हाथ धीरे धीरे अपनी चूत की तरफ गया और वो उसे रगड़ने लगी. उनके मुह से फिर सिसकारी छुटी और मेरा लंड फिर तनने लगा. चाची का एक हाथ अपने बूब्स को दबा रहा था, उनके निप्प्लेस उनकी उँगलियों के बीच थे. वाव क्या सीन था.

मैंने अभी अपना लंड जोर से हिलाना शुरू कर दिया. चाची की सिस्कारियां तेज़ होती गयी और मेरे हाथ की स्पीड और उनकी उँगलियों का मोशन फास्ट होता गया.

अचानक उन्होंने जोर जोर से सांस लेना शुरू कर दिया और मादक स्वर में आह आह उहुहू ......उहुह....आह...करने लगी. चाची का ओर्गेस्म हो रहा था
मेरे गोटे भी कड़क होने लगे. मैंने इधर उधर देखा और टेबल पे पड़ा हुआ कागज़ उठाया और उसमे अपने लंड हिलाने लगा. अचानक एक सुरसुरी और गुदगुदी का मिला जूला एहसास हुआ और मेरे लंड ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया. मगर ये क्या .......पहली धार जोर से निकली और हवा में उड़ के डोर पे जा गिरी. फच फच करके पानी निकलता ही रहा. मेरा सर पीछे हो गया ऑंखें बंद हो गयी.....ओ गोड.....यस.

मैंने कागज़ फोल्ड कर के वही रखा और बिस्तर पे पड़ गया. वाव इतना मज़ा आज तक नहीं आया था.
सुबह नींद खुली तो दस बज चुके थे. 10.30 पर तो कॉलेज ही था. फटाफट तैयार हुआ बुक्स उठाई और पुराने नोट्स भी उठा लिए. पिया के लिए
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चाची नाश्ता लगा रही थी. पर मैं जाने लगा तो बोली

चाची : शील, नाश्ता कर ले.
मैं : नहीं चाची लेट हो गया हूँ.

चाची पास आके मुझे बिठाते हुए : नाश्ता नहीं करेगा तो ताक़त कैसे आएगी. अब तू जवान हो गया है

मेरी समझ में कुछ आया नहीं. ओह god कल रात की रास लीला देखके जो माल निकला था वो तो कागज़ फिर से कंप्यूटर टेबल पर ही छोड़ दिया था.
कहीं फिर से चाची ने वो कागज़ तो नहीं देख लिया. मेरी फटी.

मैं : च च चाची ......वो .......म म मेरा मतलब है की वो कागज़ ......आई ऍम सॉरी ......अब नहीं होगा

टेड़ी मुस्कान के साथ बोली : कोनसा कागज़...अच्छा वो वाला.....

मैंने सर नीचे झुका लिया.

चाची: अब तू कॉलेज जाने लगा हे, जवान हो गया है....चलता है मगर थोडा कन्ट्रोल रखा कर.....रोज़ रोज़ कोई करता है क्या ?
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मैंने झटके से सर उठाया, चाची कुटिल तरीके से मुस्कुरा रही थी. तभी उन्होंने वो किया जिस से मेरे दिमाग में हतोड़े पड़ने लगे

अचानक वो अपनी टांगों के बीच खुजली करने लगी ये करते हुए तो बेशरमी से मुझ से बातें भी कर रही थी. मुझे तो यह भी नहीं पता की वो क्या बोल रही है. मेरा सारा ध्यान उनकी उंगिलयों के खेल पर था.

चाची : शील तू सुन रहा है न ? शाम को जल्दी आ जाना
में : ह ह हाँ च च चाची

चाची :अच्छा तू लेट हो रहा है. जल्दी कर नहीं तो बस नहीं मिलेगी.

और झुक कर मेरी प्लेट उठाई. हाय क्या नज़ारा दिखा. उनके दोनों संतरे ब्लैक ब्रा में कैद थे और हमेशा की तरह उन्होंने काफी टाईट ब्लाउस पहना था जिसके कारण उनके बूब्स उभर के बहार निकल रहे थे. बूब्स के बीच के घाटी पूरी अन्दर तक दिख रही थी . मेरे बदन की नसे गरम हो गयी और वही मेरा माहोल बन गया. जींस में जैसे तैसे अड्जेस्ट किया. चाची मुझे वो ही बेशरमी भरी मुस्कान से देखे जा रही थी. बड़ी मुश्किल से मैंने बुक्स समेटी और कॉलेज के लिए भागा.
 अनीता चाची जिनका प्यार का नाम नीलू है. मेरे चाचा की बीवी. पिछले साल ही गाँव से आई थी. जब गाँव में बाड़ आने से सब तबाह हो गया और चाचा सड़क पे आ गया, तो मेरे पापा ने उनको शहर बुला लिया और अपने साथ दुकान पे लगा लिया. मेरा बनिया बाप बहुत शाना है. दूकान के दो नोकरों की छुट्टी करके उनका पूरा काम मेरे चाचा से ही कराता था, शायद इसी लिए मेरा चाचा इतना थका रहता था की नीलू की खुजली नहीं मिटा पा रहा था. बेचारी को शादी के ५ साल बाद भी बच्चा नहीं था.सांवले रंग में ढली उसकी चिकनी काया में अजंता की मूर्तियों जैसे घुमाव और उठाव थे. तीखा नाक जैसे चोंच हो, कंटीली भंवे, थोड़े भरे भरे होंठ और उसके ऊपर एक तिल.
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गाँव से आई चाची को डौगी पोसिशन में करना पसंद है यह सोच सोच के मेरा सांप फिर फन उठाने लगा.

अपनों अरमानो की गाड़ी को ब्रेक लगा कर कॉलेज में घुसा. अकाउंट का लेक्चर ख़तम हो चूका था. तभी सामने से आती पिया दिखी. उसने सफ़ेद शर्ट और ब्लू जींस पहनी थी, बाल खुले थे, क़यामत दिख रही थी. वो आई और

पिया : हाय ...मेरे नोट्स लाये हो ना
मैं : ह ह हाय (साला ये हकलापन). हाँ यह लो.

पिया : थेंक्स. तुम्हे जल्दी तो नहीं चाहिए.
मैं : न न नहीं. अ अ आप आराम से कॉपी कर लो.
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पिया : यह आप आप क्या लगा रखा है. अरे हम दोस्त है. इतने फोर्मल मत बनो
मैं : थ थ ठीक है.....अ अ आप....मेरा मतलब है की तुम को अब तुम कहूँगा

वो हंसी और उसके गुलाबी होटों के बीच में उसके मोती जैसे दांत चमक उठे. तभी मैं नोटिस किया किया की उसके होटों के ऊपर एक तिल है. ऐसा ही एक तिल चाची के होटों पर भी है. चाची की याद आते ही मेरा दिमाग उनकी रात की और सुबह की बातें याद करने लगा. तभी पिया बोली

पिया : अरे कहाँ खो गए. आज लेट कैसे हो गए. क्लास में तो दिखे ही नहीं आज.
मैं : ह ह हाँ म म मैं वो .....

पिया (शरारती मुस्कराहट के साथ बोली) : पार्क में GF के साथ थे क्या ?

मैं तो एक दम घबरा गया और मेरा मुह लाल हो गया

मैं : म म मेरी कोई gf नहीं हैं.
पिया : अच्छा पुरे कोलेज में ऐसा कोई लड़का या लड़की नहीं जिसका कोई सीन नहीं है
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मैं : स स सच में नहीं है. क क कसम से.
पिया : इट्स ओके यार. वैसे तो मेरा भी नहीं पर बोलना येही पड़ता हैं, की कोई है. भाई के डर से सब दूर ही रहते है.
अच्छा चलो मुझे जाना है बाय

आज मुझे अपने हकले होने पर जितना गुस्सा और शर्म आई की क्या बोलू.घर पे पहुंचा तो पूरा घर खाली था. अपनी चाबी से दरवाजा खोल के जब अन्दर गया और आवाज़ लगायी तो चाची के कमरे से
आवाज़ आई.

चाची : कोन हैं ? शील ?
मैं : हाँ चाची......सब कहाँ गए ?

चाची : अरे सुबह बोला तो था की सब मंदिर में जायेंगे. रणछोड़ दास जी के भजन हैं.

अब मैं क्या बोलू की सुबह मेरा ध्यान कहा था.

चाची : मैं कपडे धो कर आती हूँ. खाना रेडी है.
मैं : अरे चाची...मेरे कपडे भी धो दिए क्या ?
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चाची : नहीं....ला दे... जल्दी.

मैं रूम में गया और अपनी जींस, टी शर्ट और अंडरवियर उठाई. जैसे ही बाथरूम में घुसा मेरी साँसे रुक गयी.
चाची गाँव वालो की तरह उकडू बैठ कर कपडे धो रही थी, उनको वाशिंग मशीन में कपडे धोना नहीं आता था. उनका आचल गिरा हुआ था और ऐसे बैठने की वजह से उनके बूब्स मचल मचल के बाहर आ रहे थे. उन्होंने साड़ी घुटनों के ऊपर तक उठा रखी थी जिससे उनकी पानी से भीगी चिकनी जाघें चमक रही थी.

मैं : ये लो च च चाची
चाची : सारे कपडे ले आया ना ?

मैं : हाँ ..जींस ...टी शर्ट ....और ये ........(कहकर मेने अंडरवीयर भी रख दी)
चाची : यहाँ रख दे......( फिर वो ही कुटिल मुस्कान के साथ बोली) ....अंडरवियर की हालत तो कागज़ जैसे नहीं कर रखी ?

मेरे तो कान गरम हो गए.
मैं : न न नहीं चाची
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चाची : सुन......ये साड़ी सही कर दे ना.

वो अपने ढलके हुए आंचल की तरफ इशारा कर रही थी. मैंने कांपते हुए हाथों से उनका आंचल जो उनके कंधे से गिर गया था उसे फिर से कंधे पर रखने लगा तभी वो थोडा सा मुड़ी और मेरा हाथ उनके सोफ्ट मम्मो से टकरा गया.
चाची धीरे धीरे मुस्कुरा रही थी. फिर बोली

चाची : लल्ला....ये बाल्टी भी खाली कर के दे दे ना.

मैंने बाल्टी उठाई और मुड़ा. फर्श चिकना होने से मेरा बैलेंस बिगड़ा और बाल्टी मेरे हाथ से छुट कर ठीक चाची के पीछे गिर गयी. उनका पूरा पिछवाडा गीला हो गया.

चाची : हाय राम यह क्या किया. मेरी पूरी साड़ी गीली हो गयी.

और वो खड़ी होकर साड़ी को झटकने लगी.

चाची : क्या करता है लल्ला......अन्दर तक पानी चला गया .....सारे कपडे धो रखे है...मेरे पास तो अलमारी में दूसरा पेटीकोट भी नहीं है.
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कह कर उन्होंने साड़ी खोलना शुरू कर दी. मेरे सामने मेरी खुजली वाली चाची बिना आंचल के .. और ....भीगी हुई.......साड़ी खोल रही थी. मेरी जींस में तम्बू तन चूका था. तभी जैसे उसे होश आया बोली

चाची : शील ..बाहर जा. देखता नहीं में कपडे बदल रही हूँ

मैं हकलाता हुआ सॉरी बोलता हुआ बाहर आके खड़ा हो गया.

चाची : मेरे सारे कपडे गीले कर दिए लल्ला. अब मैं क्या पहनू ? जा जाके मेरे रूम में कोई पेटीकोट, ब्लाउस मिले तो ले आ.

मैंने जाके देखा मगर कुछ नहीं था. तभी मुझे चाची का नाईट गाउन दिखा. पूरा पारदर्शी था.

मैं : ये लो चाची.
चाची : अन्दर मत आ. बाहर से ही दे दे.

मैंने दिया और चाची अन्दर से ही चिल्लाई

चाची : लल्ला और कुछ ना मिला क्या ?
मैं : चाची मुझे और कुछ नहीं दिखा.....आप ही तो बोली की सारे ही कपडे धो दिए.
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चाची : हाय राम यह तो बहुत झीना हैं. अरे बाहर का दरवाजा बंद है ना ? ऐसे में भाभी और भाई साहब आ गए तो.
मैं : चाची मैं कुण्डी लगा देता हूँ .

मैं जैसे ही मुड़ा चाची बाथरूम से बाहर आई और अपने रूम की तरफ भागी. गाउन सामने से खुला था और अन्दर वो सिर्फ ब्रा और पेंटी में थी. भीगने से उनका गाउन पूरा ही पारदर्शी हो गया था. काली ब्रा और फूल की प्रिंट वाली पेंटी साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी. उनके मम्मे भागने की वजह से जोर जोर से हिल रहे थे और उनके भरे भरे गोल गोल नितम्ब पेंटी के अन्दर बाहर आने के लिए मचल रहे थे. उन्होंने से अपने रूम में घुस कर दरवाजा बंद कर लिया और जोर जोर से हसने लगी. मेरा दिमाग ख़राब हो गया.

चाची : लल्ला ....अब लगा लो कुण्डी ....हा हा हा ......बुद्धू बन गए भोले लल्ला.
मेरा सांप फुफकारे मार रहा था, मुझसे रहा नहीं गया मैं फटाफट रूम में गया और सुबह के न्यूज़पेपर को खोल कर टेबल पार रखा , जींस उतारी और अपना लंड हिलाने लगा. उत्तेजना की वजह से मेरी ऑंखें बंद हो गयी थी. आज सुबह से ही चाची ने मुझे इतना गरम कर दिया था कि रुकना मुश्किल था. बार बार चाची के भीगे बदन का चित्र मेरी आँखों के सामने आ रहा था.
मुझे वो ही सुरसुरी फिर होने लगी मेरा निकलने वाला था. तभी भड़ाक से मेरे रूम का दरवाजा खुला और चाची अन्दर आ गयी.

चाची : चल लल्ला ..साड़ी मिल गयी और खाना लगा दिया है.....आज दाल......हाय राम ये क्या .....
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मेरा माल निकलना शुरू हो गया.....मैंने अपने लंड हाथ में छुपाने कि कोशिश कि मगर उसमे से फच ....फच.....धार छुटती
ही जा रही थी. कुछ उड़ कर चाची के पैरों के पास भी गिरी. चाची की आँखों गोल गोल हो गयी थी और वो कभी मुझे और कभी धार पे धार मारते मेरे लंड को देख रही थी. अचानक जैसे उन्हें होश आया और वो बाहर चली गयी.

मैने उसी कागज़ से लंड को पोछा. मेरी गांड फटफटी की तरह फट रही थी. बेटा आज तो गए. बाप जल्लाद है....मार मार के गांड सुजा देगा और माँ मारे शर्म के मार जाएगी. मैं सर झुका के बाहर गया.

मैं : च च च चाची........

चाची मेरी तरफ मुड़ी. उनका चेहरा लाल हो गया था. उनकी वो तीखी नाक कोनो से फूली हुई थी. या तो वो गुस्से में थी या उनको भी मस्ती आ गयी थी.

चाची : लल्ला......हद होती है.....तू बहुत बिगड़ गया हैं......भाभी और भाई साहब को पता चला की तू पढाई छोड़ कर ये सब
हरकते करता है तो उन कर क्या गुजरेगी ? ऐसे आदतों की वजह से ही तेरे चाचा का ये हाल हैं. जो आज तक बाप नहीं
बन पाए
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मैं : च च चाची प प प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो. म म माँ और प प पापा को मत बोलना. मैं अब कभी मूठ नहीं मारूंगा.
प प प्लीज़ चाची प्लीज़

चाची एक दम से शांत हो गयी. फिर से उनके चेहरे पे वो ही टेड़ी मुस्कान हलके हलके आई.

चाची : लल्ला.......मैं ये नहीं कहती की बिलकुल मत कर. पर रोज़ रोज़ करना तो गलत है. कमजोरी आ जाएगी. कल तेरी
शादी होगी, फिर क्या करेगा. बहु को खुश नहीं रखेगा तो इधर उधर झाँकेगी. मर्द बनेगा कि ग्वाला ?

मैं : ठ ठ ठीक है चाची ......ध्यान रखूँगा.....

चाची : ये ले खाना खा ले....

मैं : चाची ....ये रोटी पर कितना घी लगाया है ? ? मुझे इतना घी मत दो.
चाची टेड़ी मुस्कान के साथ बोली : अरे लल्ला......घी नहीं खायेगा तो ताक़त कैसे आएगी. घी से ही तो धातु बनती है.

मैं : धातु ? धातु क्या ?
चाची : वो ही जो तुम रोज़ इधर उधर .....कागजों में उड़ाया करते हो.
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माँ कसम......अभी मूठ मरी थी और चाची की टेड़ी मुस्कान और ऐसी बातें सुन कर सांप ने फन उठा ही लिया. मैंने अडजस्ट करने के लिए नीचे हाथ लगाया और चाची बोली

चाची : लो अभी घी खाया भी नहीं और फिर निकालने चले ?

मैने घबरा के हाथ ऊपर कर लिया और चाची जोर जोर से हसने लगी. उन्होंने फिर वहीँ पर खड़े खड़े मेरे सामने ही अपनी टांगो के बीच खुजाना शुरू कर दिया. मैं इधर उधर देखने लगा. तभी चाची बोली

चाची : अरे लल्ला....बहुत परेशान हो गयी रे.....मरी इस खुजली के मारे......कोई क्रीम व्रिम ला दे ना.....खुजली मिटती ही नहीं.

मेरे सर में हथोड़े चलने लगे. सारा शरीर सुन्न हो गया बस लंड धड़क रहा था. चाची अभी भी मुझे देख कर मंद मंद मुस्कुरा रही थी. तभी बेल की आवाज़ आई. माँ - पापा आ चुके थे.
मैं खाना खा के सीधा रूम में घुस गया. सर चकरा रहा था की ये आज कल हो क्या रहा हैं.....चाची ने कभी ऐसे नहीं किया था....और न ही मैंने उन्हें इस नज़र से देखा था.
मगर आज कल जब भी मैं उनको देखता तो वो मुझे ही देख रही होती और मंद मंद मुस्कुरा रही होती. साले चाचा से इसकी खुजाल मिट नहीं रही इसी लिए चाची दूसरा रास्ता देख रही थी. ये सोच कर मुझे थोडा कांफिडेंस आ गया. चलो देखते है क्या होता है......
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सोचते सोचते कब नींद लग गयी पता ही नहीं चला. अचानक मेरा सेल बजने लगा और मैं झटके से उठा. घडी मैं १२ बजे थे. मैंने नंबर देखा. अनजाना नंबर था.

मैं : ह ह हेल्लो....
फ़ोन पर : हेल्लो.....इज इट शील ?

मैं : य य येस .......ह ह हु इस इट ?
फ़ोन पर : इसका मतलब तुम नहीं पहचाने....

मैं : न न नहीं ?
फ़ोन पर : भूल गए......रोज़ बस स्टॉप पर मिलते हो.......उस दिन मुझे स्मायल भी दी थी ....मेरा नंबर माँगा था और अपना नंबर दिया था

मैं कनफ्युस हो गया. कौन है ये ? डॉली शर्मा से आज तक बात नहीं की वो भेन्चोद तो नकचड़ी है.......ये हैं कौन ? ?

मैं : द द देखिये.....मैं अ अ आप को नहीं जानता.......और न ही मैंने मेरा नंबर आप को दिया था.
फ़ोन पर : फिर आप ......तुमसे कहा था न आप नहीं बोलना......

मैं : प प प पिया.....तुम हो ?
पिया : खिल खिला के हँसते हुए : हाँ यार.....क्या तुम भी.....लगता है सच मुच में कोई GF नहीं है तुम्हारी.....ये फ़ॉर्मूला तो हमेशा काम करता है. पर तुम भी न..

मेरी तो उड़ के लग गयी. स्वयं अप्सरा इस मिटटी के माधव को फ़ोन करे.........
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मैं : प प प पर तुम्हे मेरा नंबर दिया किस ने ?
पिया : कहीं से भी मिला .....तुमसे मतलब.......अरे वो लायब्रेरी के कार्ड पर लिखा था. मैंने सेव कर लिया था की कभी काम पड़ा तो......

मैं : इतनी रात को कैसे फ़ोन किया.....
पिया : इतनी रात को मतलब......अरे मिस्टर अभी तो १२ ही बजे है...कोनसा तुमको नींद में से उठा दिया. अरे तुम सोये थे क्या ?

मैं : ह ह हाँ ...न न नहीं वो ....
पिया : यार सॉरी ...मुझे लगा की मैं लेट सोती हूँ तो सब लेट सोते होंगे....

मैं : अरे नहीं नहीं.....बोलो न....क्या हुआ ?
पिया : यार.....वो नोट्स न......मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा हैं.......नेक्स्ट मंथ तो सेम की एक्साम ही हैं......अब मैं क्या करू ?

मैं : क क क्या समझ नहीं आ रहा ?
पिया : देखो.....मैंने बेलेंस शीट बना ली........ट्रेडिंग अकाउंट बना लिया....मगर प्रोफिट अन लोस बनाया तो टोटल नहीं मिलती

मैंने सर ठोक लिया. इस पागल को जब येही नहीं पता तो घंटा अकाउंट में पास होगी. मैंने थोड़ी देर उसको समझाया मगर वो सब उसके सर के ऊपर से चला गया.
आखिर मैंने उसको बोला.

मैं : प प पिया.....तुम्हारे तो बेसिक ही क्लिअर नहीं हैं,
पिया : हाँ यार.....मैंने साईंस से कॉमर्स में स्विच किया था ना .....अब क्या होगा.....१५ दिन के लिए कोई ट्यूशन भी नहीं मिलेगी और मिली भी तो बेसिक कहाँ से आएगी.
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मैं चुप था.....मगर मेरे दिमाग में कीड़ा कुलबुलाने लगा था.

मैं : प प पिया...तुम घर पर किसी प्रायवेट ट्यूटर से पढ़ लो ?
पिया : अरे पर अभी मिलेगा कौन यार ??? एक मिनिट ........तुम भी तो पढ़ा सकते हो....

मेरा दिल हाई जम्प मार रहा था. पहले तो मैंने नाटक किया फिर धीरे से मान गया.

मैं : ठीक हैं तुम कल शाम को मेरे घर आ जाओ........पांच बजे ठीक हैं ?
पिया : यार...वो क्या है की भाई को तुम जानते हो.......वो आने नहीं देगा.....क्या तुम मेरे घर पर आके नहीं पढ़ा सकते ?

अगर गांड फटने से आवाज़ आती होती तो बोफोर्स से तेज आवाज़ मेरी गांड फटने की आती. मैं उस सांड नवजोत के सामने तो फटकता नहीं था.....उसके घर जाना तो मौत को गले लगाने जैसा था.....पिया मुझे मनाने लगी और मैं चूतिया उस की बातों में आ गया.सन्डे था. इस लिए आराम से उठा. चाय पी कर टीवी देख रहा था की चाची आई और बोली

चाची : लल्ला वो क्रीम लाया क्या ?
मैं : कौन सी क्रीम ? अच्छा वो.....हाँ वो वाली. सामने ही रखी है......चाची वो दवाई वाले ने कहा है की इसको लगाने के बाद ....

और मैं झिझकने की एक्टिंग करने लगा......
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चाची : लगाने के बाद क्या ? बोल ना...
मैं : व व वो....आप वो मत पहनना..

चाची : क्या ? साड़ी ? बोल ना लल्ला ?
मैं : व वो पैंटी....म म मत पहनना.....ऐसा बोला दवाई वाले ने.

चाची : ओफ़ फ़ो........अरे लल्ला वो तो मैं दो दिन से उन्ही नहीं पहन रही.....इतनी खुजली चलती है. पैंटी पहनती तो अब तक
छील जाती मेरी..........

आप को तो पढ़ के मज़ा आ रहा हैं. मगर मेरी वहां पर हालत ख़राब हो गयी.......चाची मुझे मुस्कुरा कर देख रही थी और मैं कालिदास उनकी आधे ढलके आँचल में मचलते मम्म्मे और साड़ी की साइड से दिखती उनकी नाभि को देखे जा रहा था. मेरी सांसें तेज़ हो गयी थी..........तभी वो बोली

चाची : लल्ला....क्या बैठे बैठे सोफा तोड़ रहा है, चल मेरी मदद करवा दे. पानी की टंकी साफ़ करनी है. तेरी छुट्टी है और आज
नल भी नहीं आये टंकी पूरी खाली है.

अब चाची बोले और मैं मना कर दूँ ये संभव है क्या.......मैं चुप चाप चाची के साथ छत पर गया और सीधा टंकी में उतरने लगा.
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चाची : अरे...ये कपडे गंदे नहीं हो जायेंगे क्या ? फिर मुझे ही धोना पड़ेंगे......ये पजामा और टी शर्त खोल और फिर अन्दर जा.

ये कह कर वो फिर वो ही मंद मंद मुस्कुराने लगी.

मैंने चाची से नज़ारे मिलते हुए अपना टी शर्ट खोला....अन्दर कुछ भी नहीं पहना था......मेरे सीने पर बाल ऊग चुके थे......
रोज़ दंड लगाने से कंधे और सीना भी मांसल और कसरती हो चला था. चाची बोली

चाची : हाय राम ......लल्ला तू तो पूरा गबरू जवान हो गया है रे......जब शादी हो कर आई थी तब तो लड़कियों जैसी आवाज़ थी
तेरी और वैसे ही दीखता था. एक दम चिकना.......मगर अब तो पहलवान दिखने लगा है.

मेरा सांप फुफकारी मारने लगा था. सुबह सुबह की ठंडी हवा.......मेरा नंगा सीना और चाची की गरमा गरम बातें.

मैंने उनको थोडा छेड़ा...

मैं : तो क्या चाची .....तब तो आप की लड़की जैसी दिखती थी..... अब तो आंटी हो गयी हो
चाची : राम.....राम......आंटी ? क्यों रे लल्ला ? मैं आंटी जैसी कहाँ से लगने लगी ?

मैंने हिम्मत जुटाई और उनकी उभरे हुए नितम्बो की तरफ इशारा कर दिया......
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चाची ऑंखें तरेर कर बोली : हैं.......इतने भी मोटे नहीं हुए की आंटी बोलो.......

यह कहकर वो अपने ही नितम्ब दबा दबा कर देखने लगी.....जैसे जताना चाह रही हो की उनके नितम्ब आज भी सुडोल है. कौन कमबख्त कह सकता था की चाची के नितम्ब सुडोल नहीं.......कोई भी उनको देखता तो सबसे पहले उनके होटों के ऊपर का वो तिल ही देखता और फिर सीधी नज़र उनके गोल गोल उभरे हुए नितम्बो पर ही जाती........चाची अच्छी खासी गदराई हुयी थी.......मम्मे भी ऐसे थे की ब्लाउस से बाहर ही झाँका करते......कमर का घुमाव इस कदर नशीला था की नज़र उस पर रुक नहीं पाती और उन की नाभि पर ही जाके कर रूकती.

मैं : चाची......आपको पीछे से दीखता नहीं.....मगर सच्ची बहुत बढ गए है ये ....
चाची : तू तो यूँही कहता है लल्ला.....मुझे चिड़ा रहा है ना ? मैं कोई मोती थोड़ी ना हुई हूँ ?

कहकर थोड़ी मायूस सी शकल बना ली.
मैंने हिम्मर जुटाई और आगे बढ कर उनके नितम्बो पर हाथ रक्खा और दबाते हुए बोला......

मैं : य य ये देखो..... य य ये जो है ना......यहाँ पर थोडा सा मोटापा दीखता है. इतना मांस होने से अ अ अ अप म म मोटी
दिखती हो.

मैं लगातार उनके नितम्बो को अपने हाथो से नाप रहा था. वो एकटक मेरी तरफ ही देख रही थी......उनकी ऑंखें थोड़ी से नशीली हो गयी थी.....मैं हाथ उनकी कमर पर लगाया और बोला
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मैं : अ अ अब ज ज जैसे यहाँ पर.......क क कम मांस है........पर आप के पिछवाड़े और (फिर हाथ उनकी मोटी मोटी जांघों पर फिरा कर बोला ) और आप के यहाँ पर थोडा मोटापा आ गया है.........और.....ये जो है ना.....(कहकर उनकी गांड मसकाने लगा)
यहाँ पर ही आप को देख कर कोई ब ब ब बोल सकता है की .....

तभी.................माँ नीचे से आवाज़ लगा रही थी.

माँ : नीलू अरे ओ नीलू

मैंने तो माँ की आवाज़ सुनते ही घबरा कर हाथ चाची के नितम्बो से हटा दिया. मगर चाची के चेहरे पर शिकन तक नहीं आई. उन्होंने ऊपर खड़े खड़े ही माँ को बताया की वो टंकी धुलवा रही है और आधे घंटे मैं नीचे आएगी. यह बोल कर मेरी तरफ मुड़ी और बोली

चाची : चल लल्ला....मुझे तो तुने आंटी बना ही दिया....अब तो टंकी धो ले......
मैं टंकी में उतरने लगा और चाची फिर से मेरे पजामे की तरफ इशारा कर के बोली

चाची : अरे....इसको तो खोल लल्ला.....
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मैंने सकपकाते हुए पजामा का नाडा खीचा और उसको नीचे उतार कर खड़ा हो गया. मैंने जौकी का अंडरवियर पहना था. चाची के बदन का मोटापा बताने के चक्कर में सांप खड़ा हो गया था..... चाची के माँ से बात करने के दौरान वो तो फिर से बैठ गया था मगर कुछ precum की बूंदें मेरे अंडरवियर के अगले हिस्से पर साफ़ दिख रही थी. एक गोल गोल गीला धब्बा आ गया था. चाची ने सीधा वही पर देखा.मैं उसे हाथों से छुपाने लगा मगर वो निर्लज्ज औरत तो ऐसे घुर घुर कर देख रही थी जैसे बिल्ली चूहे को घूरती है. उनके चेहरे पर वो ही टेडी मुस्कराहट थी. मैं चुप चाप टंकी में उतार गया. हमारी टंकी बहुत बड़ी है, उसे साफ़ तो करना ही था मगर कुछ दिन पहले टंकी में पानी देखने के चक्कर में माँ की एक सोने की चूड़ी भी उस में गिर गयी थी. टंकी में पानी तो ज़रा सा था मगर नीचे गंदगी होने से कुछ दिख नहीं रहा था, मैंने चाची से टार्च मांगी, वो तो सब सामान साथ लायी थी. मैंने टोर्च ली और उसे नीचे घुमा घुमा कर ढूँढना शुरू कर दिया, तभी चाची ने कुछ कहा और मैंने टंकी में से ऊपर देखा.

टंकी का मुंह ज़रा सा था, और चाची उसके दोनों और पैर कर के खड़ी थी. दोनों पैर खुल जाने से साड़ी झूल गयी थी. मैंने उनकी टांगो के बीच देखा, चिकनी चिकनी टंगे घुटनों तक दिख रही थी. मैंने टोर्च ऊपर की और उसका फोकस चाची की टांगो के बीच कर दिया और नज़ारे का मज़ा लेने लगा. मेरी नज़र एक कीड़े के तरह उनके पैरों पर चद्ती चली गयी. जैसे की मैंने बताया उनकी टांगे बहुत ही चिकनी थी......उनकी जांघें साफ़ साफ़ नज़र आ रही थी.....चाची सांवली थी मगर उनकी टांगे चिकनी होने के वजह से गोरी गोरी लग रही थी. तभी मैंने ध्यान से देखा....उनकी दांई जांघ पर कुछ लिखा था.....मैंने ध्यान से देखने की कोशिश की तो दिखा की वो गोदना थे. चाची ने जांघ पर कुछ लिखवा रखा था. मैंने गाँव के लोगो को अक्सर हाथों पर अपना या भगवन का नाम गुदवाये हुए देखा था मगर जांघ पर ...... ??? क्या लिखा है सोचते सोचते मेरी नज़र और ऊपर उठी और मेरी नस नस सनसनाने लगी.
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चाची की वो चूत, जो मैं न ही दरवाजे की आड़ से जब वो चाचा से ठुकवा रही थी और न ही जब वो कपडे धो रही थी, नहीं देखा पाया था. वो चूत मेरी नज़र के सामने थी.
उन्होंने सही में पेंटी नहीं पहनी थी.

चाची मस्ती में अपनी दोनों टाँगें चौड़ी कर के टंकी के मुंह पर खड़ी थी और मैं टंकी के अंदर से टोर्च उनकी साड़ी के अंदर मार कर वो नज़ारा देख रहा था जो किसी सन्यासी को भी भोगी बना देता. भले चाची सांवली थी मगर उनकी चूत का सांवलापन मदहोश कर देने वाला था. चूत बालों से भरी हुयी थी .........चारो तरह झांटे इस तरह उगी हुयी थी जैसे खेत की सुरक्षा में बागड़ लगी हो. उनकी चूत के दोनों होंट थोड़े थोड़े से खुले और बाहर आये हुए थे. जैसे ही टोर्च की रौशनी उस पर पड़ी वो चमकने लगी पहले तो मैंने सोचा की ये क्या है ? फिर मुझे समझ में आया की चाची की मोटी मोटी गांड दबाने से उनकी चूत पनिया गयी है और कामरस निकलने लगी है. मेरे मन में आया की हाथ बड़ा कर चूत को छू लूँ......मगर मैं ठहरा गांडफट .....बड़ी मुश्किल से अपने आप को रोका, मगर लंड महाराज अपना सर उठा चुके थे.
मैं अंडरविअर में था. कहाँ छुपाता ? तभी चूड़ी मेरे पांव से टकराई और मैंने चाची की चूड़ी पकड़ा दी.......वो झुकी और मुझे उनके कसे हुए मम्मे मेरे चेहरे के ठीक ऊपर झूलते हुए दिखे. साली ने खुजली की वजह से पेंटी नहीं पहनी थी मगर ब्रा क्यों नहीं पहनी ये मेरी समझ से बाहर था....
चाची के झूलते मम्मे मेरे चेहरे से मुश्किल से २ फीट की दुरी पर थे. उनकी मीठी साँसें मेरे चेहरे से टकरा रही थी. उन्होंने चूड़ी ली और खुश होके बोली.
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चाची : लल्ला......ये तो मानना पड़ेगा की नज़र तो तेरी तेज़ है. भाभी जी खुश हो जायेंगे. चल अब बहार आ जा.

मैं क्या बोलता और क्या बाहर आता. इतनी सी देर में इतना नज़ारा देख कर बाबुराव इतना कड़क हो गया था की अंडरविअर में तम्बू बन चूका था. एक बड़ा सा धब्बा सामने की तरफ आ गया था जो मेरे लार टपकाते लंड की कारस्तानी थी. मैंने चाची की टाला की आप जाओ मैं आ रहा हूँ. पर वो तो जिद्दी नंबर वन थी. मानी नहीं और मुझे ऊपर खिंच लिया. मैं बाहर आ के उनके सामने सर झुका के खड़ा हो गया. वो मुंह पर हाथ रख कर बोली :

चाची : हाय राम.....लल्ला टंकी साफ़ कर रहा था कि गन्दी ??
मैं : न न नहीं चाची.......व व वो .....मैं

मैं अपने खड़े लंड को हाथ से छुपा रहा था और वो ऑंखें सिकोड़ कर कभी मेरा चेहरा तो कभी मेरा लौड़ा देख रही थी. तभी फिर से माँ की आवाज़ आई. चाची ने मेरे लंड से बगैर नज़रे हटाये माँ से कहाँ कि वो आ रही है और मुझे मंद मंद मुस्कान देती हुयी गांड हिलाते हिलाते नीचे चली गयी. मुझे ऐसा लगा कि शायद आज उनकी गांड ज्यादा ही लचक खा रही है. मैं जानना चाहता था की उनकी जांघ पर क्या नाम गुदा हुआ है.
  मैं : ह ह हेल्लो...
पिया : हाईइ ....क्या कर रहे हो ?
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मैं एक दम हडबडा गया.

मैं : म म म कहानी .....पढ़ .....म म म मतलब की......कहानी मूवी देख रहा हूँ...
पिया : क्या...घर पर ? अरे मुविस तो मल्टीप्लेक्स में देखते है.

मैं : हुह ? मतलब ?
पिया : अरे क्या तुम भी....आई मीन की घर पर मूवी क्या मूवी देख रहे हो....फ्रेंडस के साथ देखना चाहिए समझे

मुझे लगा की वो शायद चाहती है की मैं उसे ही साथ में चलने के लिए पूछ लूँ. तभी मुझे उस सांड नवजोत की शकल याद आ गयी और मेरे अरमानो की हवा निकल गयी. वो अब भी कुछ बोले जा रही थी

मैं : क्या ? क्या कह रही हो ?
पिया : अरे मैं पूछ रही हूँ की तुम आ रहे हो न घर पर ? कहाँ खोये रहते हो मिस्टर ? GF को मिस कर रहे हो क्या ?
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मैं : न न नहीं ....म म मेरा मतलब है की ह ह हाँ मैं तुम्हारे घर आ रहा हूँ......व व वो तुम्हारे भैया को कोई ओब्जेक्शन तो नहीं है न ?
पिया : नहीं यार.....पहले तो उसने साफ़ मना कर दिया पर फिर मैंने पापा को बोला तो पापा ने उसको डांट दिया. मेरा साल ख़राब हो जायेगा तो ?

मुझे समझ नहीं आ रहा था की हँसु या रोऊ....उस सांड को मेरे उसकी बहन को पढ़ाने में दिक्कत थी, पर इस शाणी ने अपने बाप के थ्रू गेम जमा लिया था.......जितनी सीधी दिखती हैं उतनी सीधी तो नहीं हैं. मैंने उसको शाम 6 बजे आने का बोल दिया.शाम को ६ बजे पता ढूंढता हुआ मैं सरदार प्रताप सिंह के घर पहुंचा. घर तो क्या था.....हवेली थी .....आगे जो लॉन बना था वो ही मेरे घर से बड़ा था. सरदार प्रताप सिंह, दारू और govt का बहुत बड़ा ठेकेदार था. येही समझो की सफ़ेद कपड़ो में डोन.
पुलिस हो या नेता.....सब उसकी जेब में रहते थे. इसीलिए तो नवजोत इतनी माँ चुदाता था.

मैंने बेल बजाई.......दरवाजा खुला और उसके साथ मेरा मुंह ही खुल गया ....

जिसने दरवाजा खोला था......हाईट करीब 5 फुट 8 इंच. दूध में मिले गुलाब के जैसा रंग. काला सलवार सूट बदन पर ऐसा कसा हुआ था की एक एक उभार चीख चीख के बुला रहा था. मस्त गदराया हुआ बदन था यार..........
आँखों में गहरा काजल था.......और बिलकुल गुलाबी होंट........और गले पर चिपके दुप्पट्टे के नीचे एक खाई...जी हाँ....खाई....
दो पहाड़ों के बीच की घाटी......उसके मम्मे इतने बड़े थे की उनको मम्मे नहीं थन कहना चाहिए था........
एक दुधारू भैंस के थन. पर अजीब बात यह थी की इतने बड़े मम्मे भी उस पर फब रहे थे क्योकि वो लम्बी भी थी और चौड़ी भी. डनलप का गद्दा थी साली.....सेक्सी आँखों से वो भी मुझे ऊपर से नीचे तक नाप रही थी और मैं तो उसको कभी से नाप चूका था. बल्कि अब तो मेरा सेकंड रिविजन चालू हो गया था.
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उसकी शक्ल नवजोत और पिया से मिलती थी, शायद उनकी बड़ी बहन थी. मैं बोला

मैं : न न नमस्ते जी......म म म शील हूँ....व व

वो मेरी बात बीच में ही काट कर बोली, " हाँ हाँ शील बेटा......आओ आओ, पिया भी अभी आई हैं"

बेटा ??? अबे ये है कोन ? तभी अन्दर से पिया की आवाज़ आई.

पिया : कौन हैं मम्मा ?

मम्मा ? ये पटाखा पिया की माँ ? तभी मुझे समझ में आ गया की जब खेत इतना उपजाऊ है तो फसल तो हरी हरी ही आनी हैं.
उन दोनों ने मुझे ले जा कर सोफे पर बिठा दिया. पिया की माँ मेरे सामने बैठी थी और पिया उसके पीछे सोफे का सहारा लेकर खड़ी थी. दोनों की आँखों में वो चमक थी जिसे मैं न सिर्फ देख रहा था बल्कि अपने रोम रोम पर महसूस भी कर रहा था. पिया की माँ खनकती हुयी आवाज़ में बोली, "कहाँ रहते हो शील ? ", मैं जैसे नींद से जगा मैंने कहा, " गुलमोहर में, आंटी".

वो मुंह बनाती हुयी बोली, "आंटी नहीं, पम्मी नाम हैं मेरा, आंटी वांटी मत कहा करो, यु नो अजीब लगता है".
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एक मैंने चाची को आंटी बोल दिया था तो पूरा शरीर नापने को मिल गया था. इसको तो आंटी - आंटी बोल कर चोद ही दूंगा.
वो इधर उधर की बातें करती रही और मैं उसको थनों और बैठने से फैली हुयी गांड की साइज़ नापने में लग गया. उनकी बातों से साफ़ था की सरदार प्रताप सिंह के रुतबे और डर की वजह से दोनों माँ बेटी का कोई सामाजिक जीवन नहीं था. सरदार जी को अपने काले कामो से फुर्सत नहीं थी और यहाँ पर इस दुधारू भैंस को कोई पूछने वाला नहीं था. काफी देर बाद पिया बोली, "ओफ्फो मम्मा, वो मुझे पढ़ाने आया है की आप की गोसिप सुनने, आप को भी गोसिप के अलावा कोई काम नहीं. चलो शील स्टडी करना है." मैंने कहा "ठीक हैं तुम बुक्स ले आओ".

"बुक्स ले आओ मतलब", पिया ने माथे पर सल लाके कहा, " मिस्टर, मेरे रूम में स्टडी टेबल हैं"

यह हसीना मुझे, अपने रूम में ले जा रही थी. और इधर उसकी माँ मुझे ऐसा देख रही थी जैसे मैं कोई दिल्ली दरबार में लटका चिकन हूँ. कसम से, मुझे ऐसा लगने लगा था की मेरी ग्रह दशा में कोई बहुत ही बड़ा बदलाव हुआ है. इतना सब कुछ इतने कम समय में हो रहा था की कुछ समझ नहीं आ रहा था.

रूम में जाते ही पिया ने दरवाजा बंद कर दिया, फिर मुझे देखकर बोली, "अरे यार, सब लोग इतना डिसटर्ब करते की पूछो मत.
इसी लिए डोर बंद कर दिया. अब कोई नहीं आएगा क्योकि अगर मेरे रूम का डोर बंद है तो फिर पापा भी पहले नोक करते है."
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मैंने मन ही मन सोचा मेडम ये ज्ञान हमे क्यों दे रही हो. फिर मैंने थोडा सिरियस होके उसे पढने के लिया कहा. उसकी टेबल पर मैगज़ीन का अम्बार लगा हुआ था. वो उन्हें हटाने लगी मैंने उसकी स्टडी टेबल की चेयर खिंची और बैठ गया. बैठते ही मुझे लगा की चेयर पर कुछ रखा था, मैं उठा और मैं उस कपडे को उठा कर उसे देने लगा, "ये लो" और तभी मेरी नज़र उस कपडे पर पड़ी और मेरे कान गरम हो गए. वो एक डिज़ाइनर लेस वाली ब्रा थी, जिसका मटेरियल नेट का था. मतलब पूरा पारदर्शी.
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उसने लपक के मेरे हाथो से ब्रा छीन ली और ड्रावर में रख ली. वो शर्म से हौले हौले मुस्कुरा रही थी और मुझे उस से भी ज्यादा शर्म आ रही थी.http://goo.gl/oSu6W

Published: By: Nirmala - 02:56

Friday, 22 June 2012

कादंबरी..६ भाग.. पूर्ण वाटचाल

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Published: By: Nirmala - 02:12

Monday, 28 May 2012

JANU KI CHUDAI



















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Published: By: Nirmala - 21:07

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