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Sunday, 1 January 2017

भाभी और भैया का नौकर-Super Hindi sexy story

भाभी और भैया का नौकर-Super Hindi sexy story

 


हैल्लो दोस्तों.. में पंजाब का रहने वाला हूँ.. मेरी उम्र 20 साल है। दोस्तों.. में इस साईट का बहुत बड़ा फेन हूँ। आज में जो कहानी आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ.. वो मेरे भैया और भाभी की है जो कि मेरे मामाजी के लड़के हैं। यह बात आज से लगभग दो साल पहले की है। में अपनी गर्मी की छुट्टियों में अपने मामा जी के घर गया था। वहाँ पर मामाजी, मामी और भैया, भाभी रहते है। भाभी के बारे में क्या बताऊँ? में तो शुरू से ही उनके साथ सेक्स करना चाहता था.. क्या फिगर है भाभी का? एकदम सेक्सी, पतली कमर, गदराया हुआ बदन.. उनकी हाईट 5.7 इंच है और उनके बड़े बड़े बूब्स का साइज़ 36 है और उनकी गांड 34 इंच की होगी और मुझे भाभी की गांड सबसे प्यारी लगती थी और भाभी भी अपने शरीर की बहुत देख रेख करती थी.. मुझे भाभी का शरीर एकदम सेक्सी लगता था।

दोस्तों.. अब में सीधे स्टोरी पर आता हूँ.. एक दिन में भाभी के रूम में बैठा टीवी देख रहा था और भाभी नहा रही थी और मेरी मामीजी ऊपर वाले कमरे में बैठी थी। तभी टीवी देखते देखते मेरी नज़र भाभी के सेंडल पर पड़ी और में सीधा ज़मीन पर लेटकर भाभी के सेंडल और हील्स के तलवे चाटने लग गया और में उनको सूंघ रहा था सच में मुझे बाड़ा मज़ा आया और करीब 10-15 मिनट तक में तलवे ही चाटता रहा और मुझे यह भी पता नहीं चला की भाभी कब नहाकर रूम में आ गई और उन्होंने मुझे ऐसा करते हुए देख लिया.. तो वो ज़ोर से चिल्लाई कि क्या कर रहे हो? में बहुत डर गया और में एक दो मिनट तक कुछ नहीं बोला तो भाभी ने फिर से बोला कि कुछ बोलोगे या नहीं? तो में चुप रहा और फिर भाभी ने कहा की रूको में मम्मा को बताती हूँ। यह सुनकर में रोने लग गया और मैंने भाभी के पैर पकड़ लिए। फिर उनसे सॉरी कहने लगा.. लेकिन भाभी मेरी एक भी नहीं सुन रही थी। मैंने भाभी के पैर नहीं छोड़े तो कुछ देर बाद भाभी ने बोला कि चलो कोई बात नहीं में किसी को कुछ नहीं बताती.. लेकिन जो में कहूंगी वो तुम्हें करना होगा? मैंने एकदम से हाँ कर दी। भाभी ने कहा कि तुम यह तलवे अच्छी तरह से चाटो और इन पर जो भी गंदगी लगी है उसे भी साफ करो।

तभी में भाभी के मुहं की तरफ देखने लगा तो उन्होंने मुझे इशारा किया और बोला कि जो मैंने कहा वो जल्दी से करो। मैंने कहा कि ठीक है और में अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रहा था.. क्योंकि में अपनी भाभी का नौकर बन रहा था और वो मेरी मालकिन। मैंने सेंडल चाटकर साफ कर दिए तो भाभी ने कहा कि में अपनी अंडरवियर में जमीन पर लेट जाऊ। तो में लेट गया और भाभी ने अपनी सॅंडल पहनी और मेरे ऊपर खड़ी हो गई और मेरे खड़े लंड को अपने पैरों से मसलने लगी.. उस टाईम मेरी हालत बहुत खराब हो गई थी और में सिर्फ़ आहाह्ह्ह अहाह्ह्ह कर रहा था। फिर भाभी ने कहा कि खड़े हो कर मेरे पैर चाटो.. तो में अच्छी तरह से उनके पैर चाटने लगा और अब मेरी हिम्मत भी थोड़ी थोड़ी बढ़ रही थी। मैंने भाभी को कहा कि क्या में आपकी चूत भी चाट सकता हूँ? उन्होंने कहा कि कुत्ते कमीने क्या तू अपनी भाभी से ऐसे बात करेगा? तो मैंने फिर से सॉरी कहा.. तभी उन्होंने कहा कि आजा में तुझे चटवाती हूँ.. तू अब नीचे लेट जा। तो में नीचे जमीन पर लेट गया.. भाभी ने अपनी सलवार और पेंटी को नीचे सरकाया.. वाह क्या नज़ारा था? गोरी मोटी मोटी जांघे और उन पर एक भी बाल नहीं था। में तो जैसे जन्नत के नज़ारे ले रहा था और उनकी चूत पानी से गीली हो चुकी थी और चूत पर हल्के हल्के बाल थे। भाभी अभी मेरे सामने नंगी खड़ी थी.. में भाभी से कहने लगा कि भाभी प्लीज़ मुझे अपनी चूत टेस्ट करने दो.. तो उन्होंने बोला कि कुत्ते और भीख माँग में तुझे इतनी आसानी से चूत चाटने को नहीं दूंगी.. फिर में और भीख माँगने लगा.. उनके पैर चाटने लगा तो भाभी ने कहा कि चल ठीक है और फिर भाभी सीधे मेरे मुहं पर आ कर बैठ गई और चूत की जगह उन्होंने अपनी गांड मेरे मुहं पर रख दी.. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और में चाटने लग गया और भाभी आवाज़े निकालने लगी उफफफफफ्फ़ कुत्ते अच्छी तरह से चाट आहा हम्म अहहाा चाट और ज़ोर से चाट.. मैंने भी अपनी जीभ उनकी गांड के छेद में डाल दी और ज़ोर ज़ोर से चाटने लगा.. वो अब सातवें आसमान पर थी।

वो मुझे बहुत गालियाँ दे रही थी और अपनी चूत में उंगली अंदर बाहर कर रही थी। 15 मिनट चाटने के बाद वो झड़ गई और अपना सारा पानी मेरे ऊपर गिरा दिया मैंने उनका सारा पानी पी लिया और फिर वो बोली कि चल कुत्ते आज के लिए बहुत हुआ और आज रात को 11 बजे मेरे रूम में आ जाना। मैंने कहा कि रात को तो रूम पर भैया भी मौजूद रहेंगे। उन्होंने कहा की तू टेंशन मत ले.. मैंने तुझसे जितना कहा है उतना कर। मैंने कहा कि ठीक है और भाभी की चूत को चाट चाटकर अच्छी तरह से साफ करके बाहर आ गया। फिर में बड़ी बेसब्री से रात के होने का इंतज़ार कर रहा था और जैसे ही रात के 11 बजे में उनके रूम में गया और जैसे ही मैंने रूम का दरवाजा खटखटाया तो अंदर से भाभी की आवाज आई कि अंदर चले आओ.. दरवाजा खुला है। मैंने दरवाजा खोला और जैसे ही अंदर जाकर देखा तो भाभी बेड पर लेटी हुई थी और भैया, भाभी की चूत को कुत्ते की तरह अपनी जीभ से चाट रहे थे।

फिर में रूम से बाहर आने लगा.. तो भाभी ने बोला कि अबे कुत्ते कहाँ चला? इधर आ जा तो में बहुत दंग रह गया और फिर भैया मुझे देखकर हंस रहे थे और में उनके पास गया और भैया, भाभी को देखने लगा। फिर भाभी बोली कि कुत्ते क्या वहाँ पर खड़ा ही रहेगा या कुछ काम भी करेगा? तो मैंने कहा कि जी हाँ.. जो आप कहो तो उन्होंने कहा कि चल अब जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार। में भैया के कारण थोड़ा शरमा रहा था तो भैया ने भी बोला कि चल कोई बात नहीं उतार दे और जैसा तेरी भाभी बोल रही है.. तू वैसे ही कर और देख आज तुझे हम कैसे मज़े देते है। तभी में यह बात सुनकर दंग रह गया और अपने कपड़े उतार कर एक साईड पर खड़ा हो गया तो भाभी ने मेरा खड़ा लंड देखा.. लंड पूरा तनकर खड़ा था। भाभी ने भैया से बोला कि देखो तुमसे बड़ा लंड तो इसका है.. तो भैया ने बोला कि देर किस बात की है ले लो इसका भी लंड और दिखा दो इसको भी अपने नज़ारे। में उनकी यह बात सुनकर हैरान रह गया और वो दोंनो ऐसे बोलते हुए हंसने लगे। फिर भाभी ने कहा कि ठीक है.. लेकिन इतनी जल्दी नहीं और उन्होंने मुझसे कहा कि में भैया की गांड को चाटू। मैंने उनसे साफ मना कर दिया तो भाभी ने सीधे मेरी गांड पर ज़ोर से एक लात मारी और मुझे गलियाँ देने लगी। तभी में अपने आप को बिल्कुल मजबूर महसूस कर रहा था। मैंने कहा कि ठीक है और फिर में अपने भैया की गांड चाटने लगा और धीरे धीरे भैया भी अपनी गांड उठा उठाकर चटवा रहे थे और फिर कुछ समय बाद मुझे भी मज़ा आने लगा। तभी भाभी ने कहा कि उन्हें मेरा लंड टेस्ट करना है.. तो हम 69 पोज़िशन में आ गये में भाभी की चूत चाट रहा था और भाभी मेरा लंड और भैया बीच बीच में कभी भाभी के बूब्स चूस रहे थे।

जैसे ही भाभी ने लंड मुहं में डाला वाह वो क्या अहसास था और वो लंड को काट भी रही थी.. तो मेरी चीख निकल रही थी और फिर 5 मिनट के बाद में झड़ गया और भाभी ने मेरा सारा वीर्य पी लिया और फिर से मेरा लंड मुहं में डालकर चूसने लगी जैसे ही लंड फिर से खड़ा हुआ उन्होंने कहा कि चल अब यह लंड मेरी चूत में डाल। मैंने कहा कि ठीक है और मैंने एक झटका मारा और अपना पूरा लंड भाभी की चूत में डाल दिया। तभी भाभी बहुत ज़ोर से चिल्लाई और बोली कि हरामी थोड़ा आराम से कर.. क्या मुझे मार ही देगा? तू रुक तुझे तो में अभी बताती हूँ और भाभी ने भैया को कहा कि वो अपना लंड मेरे मुहं में डाल दे। मैंने अपना मुहं खोलने से मना कर दिया.. लेकिन भाभी और भैया ने ज़बरदस्ती मेरे मुहं में लंड डाल दिया और भाभी मेरे लंड पर ऊपर नीचे उछल रही थी और भैया ने मेरे सर के बालों को पकड़कर पूरा लंड मेरे मुहं में अंदर तक डाल दिया.. जिससे मेरी साँसे रुक गई.. लेकिन कुछ टाईम बाद जाकर थोड़ा आराम हुआ और भैया का लंड अभी में अच्छी तरह से चूस रहा था और उधर भाभी अपने जलवे दिखा रही थी।

फिर जैसे ही लंड अंदर जाकर चूत की दीवार से टकराता तो भाभी लंड को अंदर ही जकड़ लेती भाभी बहुत बड़ी चुदक्कड़ है.. भाभी आवाज़े निकाल रही थी और मुझे गलियाँ भी दे रही थी। मैंने भाभी का ऐसा रूप पहली बार देखा था वो बोल रही थी और ज़ोर से चोद कुत्ते हरामी मदारचोद भोसड़ा बना दे मेरी चूत का और में उनको फुल स्पीड से चोद रहा था। उधर भैया ने 5 मिनट के बाद सारा वीर्य मेरे मुहं में डाल दिया.. तो मुझे बहुत गंदा लगा। में जैसे ही थूकने लगा तो भाभी ने मुझे किस करना शुरू कर दिया और बड़े ही आराम से सारा वीर्य मुझे पिला दिया.. लेकिन मुझे उस टाईम बहुत अच्छा लगा और फिर हम दोनों ने 5 मिनट तक किस किया और उधर मेरा भी वीर्य निकलने वाला था और भाभी भी दो बार झड़ गई थी। मैंने भाभी को पूछा कि कहाँ गिराऊँ? तो उन्होंने बोला कि मेरी चूत के अंदर ही डाल दे.. तो में अपना सारा वीर्य उनकी चूत के अंदर ही डाल दिया और भैया हम दोनों को देखकर अपना लंड मसल रहे थे।

फिर भाभी जैसे ही उठी तो बोली कि चल अब मेरी चूत चाट चाटकर साफ कर में पहली बार अपना ही वीर्य टेस्ट कर रहा था। क्या चूत थी भाभी की एकदम मस्त और में चाट ही रहा था की पीछे से भैया ने अपना लंड मेरी गांड पर रख दिया और जैसे ही उनके लंड का टोपा मेरी गांड के अंदर गया तो मेरी चीख निकल गई.. तो भाभी ने मेरे मुहं पर हाथ रख दिया और मेरी आँखो से आंसू भी निकल गये। लेकिन वो दोंनो नहीं हटे और मेरी गांड मारते गये और कुछ टाईम बाद भाभी मेरे नीचे आ गई और मेरा लंड चूसने लगी और जैसे ही मेरा लंड फिर से तनकर खड़ा हो गया तो भाभी ने फिर से उसे अपनी चूत में डाल लिया और अब मुझमें बिल्कुल भी जान नहीं थी। जो भी कर रही थी वो भाभी ही कर रही थी वो अपनी गांड को उठा उठाकर मेरे लंड को अपनी चूत में आगे पीछे करने लगी। उधर भैया ने करीब 15 मिनट तक मेरी गांड मारी और अपना सारा वीर्य मेरी गांड में छोड़ दिया और भाभी अभी भी चूत में लंड अंदर बाहर कर रही थी। फिर कुछ देर बाद में भी झड़ गया.. लेकिन भाभी ने लंड को अपनी चूत से बाहर नहीं निकलने दिया और अंदर ही रहने दिया और जब मेरा सारा वीर्य भाभी की चूत के अंदर चला गया और लंड धीरे धीरे सिकुड़ कर अपने आप ही बाहर निकलने लगा।

तभी भैया आकर भाभी की चूत चाटने लगे और कुछ टाईम बाद भाभी खड़ी हुई और मेरे मुहं पर सूसू कर दिया में उनका सारा पेशाब पी गया। दोस्तों वो बहुत नमकीन था.. लेकिन मेरी चुदाई बहुत हॉट और स्वीट थी। फिर उस रात के बाद मैंने, भैया और भाभी ने लगातार तीन चार दिन तक सेक्स किया। फिर जब मुझे दिन में मौका मिलता तो में भाभी के कमरे में चला जाता और उनकी चूत चाटता और चुदाई भी करता.. उनके बूब्स चूसता और रात को हम तीनों एक साथ सेक्स करते थे। में जब तक वहाँ पर रहा हमारी चुदाई लगातार चलती रही भैया और भाभी ने मुझे चुदाई करना और गांड मरवाना सिखा दिया था.. वो मेरे काम से खुश थे और में उनके काम से ।।
धन्यवाद …
Published: By: Nirmala - 02:54

सुंदरबन आणि चंदूच्या कथा -Hindi sexy Story


नमस्कार चावट रसिकहो,

सुंदरबन आणि चंदू उर्फ राम-चंद्र ह्यांच्या कथा ग्रुपवर पोस्ट केली पण तुम्हा सर्वांना पाठवण्याचे राहून गेले... त्या मूळे क्षमस्व... तरी ह्या मैल मध्ये मी सर्व कथा - सुंदरबन आणि चंदूच्या कथा जोडून पाठवत आहे...

आपल्या प्रतिक्रिया लेखकाना जरूर पाठवा... 

आपला 
लकी

Namaskaar chawat rasikaho,

Sundarban aaNi Chandu urf Ram-chandra hyaanchyaa kathaa group var post keli pan tumhaa sarvaanaa paathavNyaache raahun gele... tyaa mule kshamasva... tari hyaa mail madhe me sarva kathaa - Sundarban aani Chanduchyaa kathaa jodun paathavat aahe...

aaplyaa pratikriyaa lekhakaanaa jarur paathavaa... 

खेल खेल मे - भाग  १ -


खेल खेल मे - भाग  2 -

खेल खेल मे - भाग  3 -

http://docdro.id/mXKdSJ4





aaplaa 
Lucky
Published: By: Nirmala - 02:27

Thursday, 15 December 2016

Hindi sexy Story - Office ki tarakki ka safar

Hindi sexy Story - Office ki tarakki ka safar 


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Published: By: Nirmala - 02:06

Sunday, 19 June 2016

मजेदार हिंदी कहानी का खजाना

दोस्तों मै rajbr1981
आप का हमदर्द,
आप का दोस्त, खास आपके लिए प्रस्तुत करता हूँ, "मजेदार हिंदी कहानी का खजाना"कई दिनों से मै यह सोच रहा था की अपने दोस्तों के लिए कुछ करू. खास एक ही वजह के लियें हवस, इस जवानी की उम्र में कई बेचेनियाँ होती है और इन सब को मिटने के लिए कुछ रास्ते है जिनमे से एक आपके सामने में रख रहा हूँ. हवस मिटा देने वाली कहानियां.

तो आपके लिए मैंने कई सारी मदहोश पूर्ण कहानियां जगह जगह से इकठ्ठा करके यहाँ पे आपके लिए रख रहा हूँ. तो मै चाहता हूँ के आप अपनी पूरी लगन से इन कहानियों को पढ़े और हमारे साथ अपनी कहानिया शेयर करें.

शुक्रियां.
आप का अपना,
rajbr1981




मेरी गरम गरम सालियां

सुमित की शादी हुए 2 साल हो चुके थे . सीमा नाम है उसकी बीबी का . सुमित का गारमेंट बनाने की फैक्ट्री है . उसके कारखाने मे बनाये हुए लेडीज़ नाईटी बहुत पोपुलर है . काफी सेक्सी नाईटी बनाता है . कभी कभी अपनी फैक्ट्री की बनी हुई नाईटी को और काट छांट कर अपनी बीबी सीमा के लिए घर ले कर आ जाता था . सीमा के गोरे और सुंदर बदन पर यह नाईटी काफी सेक्सी लगाती थी . उसके बदन पर नाईटी से ज्यादा उसका बदन झलकता था . सुमित भी चाहता था की सीमा जब रात को रूम मे आए तो उसके मखमली बदन को देखने के लिए ज्यादा तडपना न पड़े . उसकी गोरी चिट्टी चुचिया उसकी नाईटी से झलक पड़ती थी . उसे देखकर सुमित का लंड फन फना जाता था..और लंड उसके बदन से नाईटी के उतरनेका इंतज़ार करता था. सुमित कभी भी कंडोम नही लगाता था और इसीलिये सुहागरात को ही सीमा गर्भवती हो गई थी...उसके बाद उसे मासिक ही नही हुआ.सीमा प्रेगनेंट है और उसकी डिलिवरी का टाइम आ चुका था . सीमा ने अपने पीहर फ़ोन करके अपनी चचेरी बहन रीना को बुलवाया था . रीना अपनी एक और बहन कंचन के साथ अपने जीजी के घर पर आती है . कंचन को पेंटिंग करना पसंद था . वोह अपनी पेंटिंग की प्रदर्शनी लगवाना चाहती थी इसीलिये रीना के साथ मुम्बई चली आई . कंचन एक कुशल डांसर भी थी . कॉलेज के फंक्शन मे जब वोह डान्स करती थी तो कई मनचलों के दिल की धड़कन बढ़ जाया करती थी .रीना जब पिछली बार एक साल पहले जब अपने जीजी के घर आई थी तब सीमा , सुमित और रीना काफी हँसी मज़ाक कर के अपना टाइम पास कर लिया करते थे . रीना अपने जीजा जी के काफी क़रीब हो गई थी . हालांकि उनके शारीरिक सम्बन्ध नहीं बने थे लेकिन अपनी जीजी के सामने सुमित से काफी लिपट चिपट कर रहती थी . आलिंगन और चुम्बन तक ही सम्बन्ध कायम हो पाए थे . और सीमा भी उसे बुरा नही मानती थी .कहती थी की जीजा और साली के बीच मे यह सब चलता है .सीमा , रीना और कंचन आपस मे चचेरी बहने थी . उनकी उम्र मे ज्यादा फरक नही था . तीनो काफी गोरी और सेक्सी बदन की मलिक थी . तीनो मे कौन ज्यादा खूबसूरत है यह कहना काफी मुश्किल था .जब शाम को सुमित घर आया तो उसे बेडरूम से काफी आवाजे और हंसाने की आवाजे सुने दी . वोह समझ गया की रीना आ गई है . उसका मन हिचकोले खाने लगा . क्यों नही आख़िर उसकी सबसे सेक्सी साली जो थी .वैसे भी पिछले तीन महीने से उसके लंड को चूत नही मिली थी और उसे पूरा भरोसा था की इस बार वो रीना की चूत चोद लेगा वोह जैसे ही रूम मे घुसा तो देखता है की उसकी साली एक नही दो -दो सालिया सीमा के साथ बेड पर बैठ कर उसके द्वारा लायी गई नाईटयों को देख रही है . सुमित सीधा रीना के पीछे जाकर उसकी आंखों को अपने हाथों से बंद कर अपने से चिपका लिया ..ऐसे ही उसका लंड भी खड़ा हो रहा था और वो रीना के पीठ पर तुका दिया था उसने पैंट के अन्दर से..रीना कहने लगी , "अरे क्या जीजा जी , बड़ी देर करदी घर आने मे . आपको तो मालूम था की हम लोग आज ही आने वाले है फिर भी देर से आए हो ."सुमित ने पलट -ते हुए जबाब दिया , "सॉरी my डार्लिंग . थोड़ा ऑफिस मे काम आगया था इसलिए लेट हो गई . चलो अब हमे माफ़ कर दो ."और अपने लंड को अभी भी उसके पीठ से चिपकाये रखा..रीना भी थोड़ा पीछे झुक कर उसे और दबा रही थी .लंड झटके मार रहा था.रीना ने सुमित के हाथों को अपने हाथों मे लेते हुए कहा , "चलो जाओ माफ़ किया .

लेकिन आपको भी हमारी जीजी का ध्यान रखना चाहिए . इस हाल मे ज्यादा अकेले नही छोड़ना चाहिए ."तभी कंचन बोल पड़ी , "हम भी है इस महफ़िल मे ."सुमित कंचन की तरफ़ आँख मरते हुए कहा , "अब तुम्हारी जीजी को तो क्या , तुम दोनों को भी अकेले नही छोडूंगा ."फिर सुमित कंचन को थोड़ा खिसका कर वहीँ बेड पर ही अपने लिए जगह बाना कर बोला , "क्या बात है ?नाईटियों की प्रदर्शनी लगा रखी है ."रीना ने एक नाईटी को उठाकर उसके बीच मे से झांकते हुए बोली ," नही जीजा जी . हम सब तो यह देख रहे थे की इन नाईटियों को पहनने के बाद बदन पर नाईटी दीखती है या हमारा बदन ."कंचन आंख मारते हुए बोली , "जीजा जी बड़ी सेक्सी नाईटी डिज़ाइन करते हो . पुरा बदन उघाड़ कर रख देती है यह नाइटिया ."सुमित भी हाजिर -जवाब था . तुरंत बोल पड़ा , "जाओ इन्हे पहनकर आओ . हम भी जरा देखें की हमारी नाईटी ज्यादा सेक्सी है या तुम्हारा बदन ."इसी तरह उनके बीच हँसी मज़ाक चल रहा था . तभी एक जोक्स के बीच सीमा को ज्यादा ही हँसी छुट गई . ज्यादा हंसने से उसके दरद उठाने लगा . सो फोरुं सीमा को ले कर वोह तीनो हॉस्पिटल रवाना हो गए . और आधे घंटे के बाद नर्स ने एक लड़के के जनम लेने की बधाई उनको दी . सुमित , रीना और कंचन तीनो ही लड़के के जनम पर काफी खुश हुए . और एक दुसरे को बधाईयाँ दी . फिर Dr. की इज़ाज़त ले कर अन्दर जा कर सीमा को भी बधाई दी . रात को रुकने के नाम पर पहले तो Dr. ने साफ मना कर दिया पर ज्यादा जोर देने पर Dr. ने कहा , "चलो आज रात तो एक जन रुक सकता है लेकिन कल किसी को रुकने की इज़ाज़त नही दूँगी . आख़िर हमारी नर्सें है जच्चा और बच्चा की देखभाल के लिए ."एक रात के लिए हाँ भरने पर रीना ने वहीँ रुकने का इरादा बताया..असाल मे उसे लगा की कंचन उसे रुकने नही देगी और ख़ुद रुकेगी..वो जीजा जी के साथ घर जायेगी..और फ़िर जीजा जी ने उस दिन जो लंड उसकी पीठ मे लगाया था उसे आज अपने मुह मे और चूत मे लेगी...लेकिन कंचन ने कुछ नही कहा..इसलिए रीना को ही रुकना पड़ा . सुमित रीना को वहीँ रुकते देख थोड़ा मायूस हुवा क्योंकि वोह आज रात रीना के साथ सेलेब्राते करने का प्लान बना रहा था . लेकिन कुछ न कहकर कंचन को लेकर वापस घर की तरफ़ चल पड़ा . घर के नीचे कंचन को छोड़ उस -से कहा की मई आधे घंटे मे आता हूँ .सुमित आधे घंटे बाद एक व्हिस्की की बोतल और एक शेम्पन की बोतल ले कर घर पर आ गया . डुप्लिकेट चाबी से दरवाज़ा खोल कंचन को आवाज दी . कंचन उस समय बाथरूम मे थी . बाथरूम से वापस जवाब दिया , "जीजा जी बाथरूम मे नहा रही हूँ . पंद्रह -बीस मिनट मे आती हूँ ."सुमित कंचन को बाथरूम मे देख हॉल मे व्हिस्की की बोतल बर्फ और ग्लास लेकर सोफा पर ही पसर गया . साथ ही VCD प्लेयर चालू कर इरोटिक डान्स की एक CD चालू कर दी . CD मे इंग्लिश धुन के साथ कई लडकिया आधी से ज्यादा नंगी हो कर नाच रही थी . सुमित भी इंग्लिश धुन के साथ बैठा बैठा झूम रहा था . उसकी भूखी आंखें उन गोरी लड़कियों के बदन पर जमी हुयी थी . उन नाचती गोरी हसीनो के मम्मे उनके कपड़े से बाहर आने को बैचेन थे . अपनी गोरी -गोरी झंघें फैला कर अपनी छुपी हुयी चूत का इजहार कर रही थी . सुमित की आँखें उनकी जांघों के बीच चिपकी हुयी थी . उसका भूखा लंड भी उनको नंगा देख बैचेनी से अन्दर ही अन्दर मचल रहा था . बूखा तो होना ही था कारन की Dr. ने सीमा के साथ सोने से फिछले तीन महीने से ना कर रखा था जो .जब तक कंचन बाथरूम से आई तब तक सुमित दो पैग चढ़ चुका था . उसके आँखों मे व्हिस्की का सुरूर चढ़ाने लग गया था . कंचन ने अपनी जीजी सीमा की एक नाईटी निकल कर पहन ली . जब कांच से अपने बदन को देखा तो कुछ झेम्प सी गई . बदन पर नाईटी तो थी फिर भी पुरा बदन साफ दिखाई दे रहा था .
आप पढ़ रहे है मेरी गरम गरम सालियां

कांच मे अपने बदन को गौर से देखने लगी . अपने दोनों हाथों से अपने चुन्चियों को सहलाने लगी और अपनी निपल को चुटकी में भर कर दबाने लगी . रूम मे बैठकर चारो जब हँसी मज़ाक कर रहे थे तभी से ही उसकी चूत मे खलबली मची हुई थी . नॉन -वेग . जोक्स से पुरे बदन मे स्त्री और पुरूष के सम्बन्ध की विवेचना चल रही थी . साथ मे जीजा जी का बारबार उसके गालों पर चुम्बन उसको वासना की आग मे जला रहा था . मन ही मन जीजा जी के पसंद के दाद देने लगी . फिर भी उसने उसके ऊपर एक झीना गाऊन और पहन लिया .सुमित ने कहा कुछ नही . आओ बैठो . कंचन वहीँ खड़ी खड़ी बोली , "अकेले ही पियोगे या हमे भी कुछ चखने दोगे ."सुमित ने अपनी ग्लास को कंचन के चहरे के नजदीक ला कर उसके मदमस्त होंठों से लगा दिया . कंचन एक साँस मे ग्लास मे जितना था (आधे पैग से भी ज्यादा ) गटक लिया और लगी खांसने . अपना मुहं बिगाड़ते हुए बोली , "उफ़ , कैसी कड़वी है यह शराब ."सुमित हंसने लगा . फिर कंचन को अपने क़रीब खींच कर उसके होंठों पर पड़ी शराब की कुछ बूंदों को चाट लिया और बोला , "हमे तो कड़वी नही लगाती . लगता है पहली बार टेस्ट कर रही हो ."कंचन की उखड़ी साँस थोड़ी शांत हुयी तब बोली , "हा , पहली बार पी रही हूँ . इससे पहले एक दो बार बियर जरूर पी है ." फिर TV पर डान्स देखने लगी . सुमित ने भी कंचन को अपने पास सोफा पर बैठाकर एक -दो घूंट और पिला दिया . नशा जब हल्का हल्का चढ़ाने लगा तो कंचन बोली , "क्या ऐसा डान्स देख रहे हो . इससे अच्छा तो मे नाच सकती हूँ ."सुमित ने पहले सोचा की सायद नशा होने की वजह से वोह बोल रही होगी . लेकिन दूसरी बार कहने पर उसने TV बंद कर दिया और बोला , "तो दिखाओ मेरी जान . हम भी देखें तुम कितना अच्छा नाच सकती हो ."चल्लेंज मान कर कंचन ने एक ऑडियो CD लगा कर नाचना चालू कर दिया . ऑडियो CD रीमिक्स सोंग्स की थी . और पहला गाना ही "कांटा लगा " था . कंचन कांटा लगा की धुन पर नाचने लगी . इसी बीच जो झीना गाऊन पहने हुए थी उसे निकाल कर सुमित की और उछाल फेंका . सुमित की साँसे ये सुब देख कर भारी हो उठी . उसके पुरे शरीर मे वासना की लहरे हिलोरे मार रही थी . लंड उत्तेजना से पागल हो रहा था . पुरे बदन मे लहू सन -सन -सन करके दौड़ रहा था .
आप पढ़ रहे है मेरी गरम गरम सालियां
अपने लंड को किसी तरह से उसने दबा रखा था..कंचन का बदन कहीँ से भी स्थिर नही था . उसका जलवा अपने पुरे उफान पर था . कभी नजदीक आकर तो कभी दूर से ही सुमित को अपने बदन की नुमाइश कर के उकसा रही थी . शराब और शबाब अपने पुरी रवानी पर था . पूरे हॉल मे जोर जोर से उठ बैठ रही सांसे म्यूजिक से ताल से ताल मिला रही थी . कंचन धून के साथ अपनी ताल मेल बैठा कर सुमित को बेकाबू करने मे लगी थी . सुमित भी बेकाबू हो कर अपने सूख रहे होंठों पर जीभ बार बार सहला रहा था . कंचन की भरी भरी छातियां उछल उछल कर सुमित को आमंत्रण दे रही थी की आओ मुझे दबोच लो . उसकी मस्त जंघे हठी की सूंड की तरह झूम रही थी . कभी फैला कर तो कभी सिकोड़ कर अपनी चूत को दिखा और छुपा रही थी . पीछे घूम कर अपने चूतड मटका मटका कर नाच कर सुमित के लंड को उसने शायद एक इंच ज्यादा लंबा कर दिया और मोती की तो बात ही क्या थी.वह बेकाबू हो चुका था..तभी सुमित सोफे से उठकर कंचन के पास जा ही रहा था की कंचन ने उसको वापस धकेल कर सोफे पर वापस बैठा दिया और अपने चूतड को उसकी गोद पर रख कर उसके लंड को रगड़ने लगी .लंड इस रगड़ाई से एकदम बौखला गया . सुमित के बदन का सारा लहू मनो इस वक्त उसके लौडे मे समाया हुआ था . उसने अपने दोनों हाथों से कंचन के कबूतरों को जकड लिया . भारी -भारी दोनों उरोज सुमित के हाथों मे भी नही समां रहे थे . चिकनी नाईटी की वजह से दोनों कबूतरों पर से उसके हाथ फिसल रहे थे . कंचन के कबूतर शिकारी को इतना नजदीक देख कर फड़फडाने लगे . वोह अपने सीने को अपने कंधे पीछे की और करके आगे तान रही थी . जिससे उसके भरपूर मस्त उरोज और आगे आकर इस समा को और रंगीन बना रहे थे . सुमित ने पागल होते हुए उसकी नाईटी को उरोजो के सामने से पकड़ कर फाड़ दिया और उसके चुंचियों को को अपने हाथो मे लेकर तौलने लगा . फिर उसके दोनों घुन्डियों को अंगुली के बीच मे लेकर जोर से मसल दिया .हॉल मे पहुँची तो उसकी आग और बढ़ गई . TV मे मादक धुन के साथ नाच रही इंग्लिश मेमो को अपने बदन पर से बचे खुचे कपडे उतार कर फेंकते हुए देख उसके दिल की धड़कन और बढ़ गई . ख़ुद एक अच्छी डांसर तो वोह थी ही . पीछे से आकर अपना चेहरा जीजा जी के गाल से चिपका कर बोली , "बोलो क्या बोल रहे थे ."कंचन के मुँह से सिस्कारी निकल गई . "उई.ई.ई.ई.i माँ आ.अ.अ.आ....स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्. धीरे से ."सुमित अब आराम से उसकी चुचियो को सहलाने लगा .
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कंचन अपने चूतड की रगड़ाई चालू रखी थी . सुमित के लंड को काफी दिनों बाद चूत की महक मिल रही थी . फिर यह तो साली की चूत . नशा शराब के साथ शबाब का डबल हो रहा था . उसके नशीले बदन को अपनी बाँहों मे समेट कर इस रगड़ाई को रोक कर अपनी अनियंत्रित हो रही सांसों को समेटने मे लगा . कंचन के शरीर को सामने कर उसके रसीले होंठों को चूमने लगा . उसके होंठों के रस को पीकर वोह और मतवाला हो गया . कंचन के गुलाब की पंखुड़ियों जैसे नाजुक होंठों को अपने होंठों से दबाने लगा . अपनी जीभ को कंचन की जीभ से टकरा रहा था . दोनों की जीभें पेंच लड़ा रही थी और हाथ उसके दोनों कबूतरों को अपने मे समाते हुए धीरे धीरे मसल रहे थे और कंचन के मुह से आह्ह..ओह्ह..उफ़..स्.स्.स्.स्.स्...जीजा जी ..आई..ल व ..यु...ओओओह..जैसी मादक सिस्कारी निकल रही थी.सुमित होठों से अपने होठों को छुड़ा कर अपनी जीभ को कंचन के चुंचियों की तरफ़ ले आया . "उफ़ क्या क़यामत है ," ऐसे कहते हुए अपनी जीभ से उसकी गुलाबी चूचियों को चाटने लगा . अपनी साली की चुचिया अपनी इतनी नजदीक देख सुमित और पागल होने लगा . उसके होंठों को अमृत का स्वाद मिल रहा था . अपनी गीली जीभ से उप्पेर से नीचे और नीचे से उप्पेर उसके स्तनों और घुन्डियों को चाटने में लग गया . कभी कभी गोल गोल जीभ फिराने लगा..घुन्ड़ियां सख्त होने लगी और उसके ठोस स्तन पर से उसकी जीभ बार बार फिसलने लगी. फिर अपनी अन्गूलियो से निपल को पकड़ लिया और लगा मसलने कंचन के सिस्करियो की आवाजे तेज होने लगी..आह्ह्ह.. उफ़..श श श .स्..स्...स्..ई..ईई.ई.इईई...जीजा जी ...और करो..अच्छा..लग..रहा..है...ऊह्ह माँ..कंचन के मुह से सिस्कारी निकल रही थी . उसके दोनों उरोज भरी हो चुके थे . उसकी सांसे जोर जोर से ऊपर नीचे होने लगी . "और जोर जोर से मेरी चूची .. को.. मसलों.,. बहुत.. मज़ा.. आ. .रहा.. है... तुम्हारे.. हाथ... मे.. जादू. ..है.... इधर... तुम... मेरी.. चूची.. को.. दबा.. रहे.. हो. और.... उधर... मेरी चूत पानी छोड़ रही है ," कंचन बेकाबू हो कर बड़बडाने लगी और वो सुमित के लंड के ऊपर कसमसाने लगी थी..दोनों निपल कड़क हो कर सुमित के मुह मे जाने को उतावले थे . फिर बेकाबू हो कर चीख पड़ी , "Suck it. Take it in your mouth. मेरे निपल को अपने होंठों से दबाव ."सुमित ने भी अपने होंठों के बीच उसके निपल को दबा के चूसना शुरू किया कंचन ने उसका सर अपने चुंचियों पर जोर से दबाया और उफ्फ्फ्फ़....हाँ..जीजा जी ..ऐसे..हीई..ऐसे ही चुसो ओ ओ..उसने अपनी चूचियों को उसके मुँह मे ठूंस दिया ..."येस ... येस... जीजा जी .... ऐसे ही चुसो ....देखो मेरे निपल्स की खुजली मिटा दो ," कंचन अपनी चाहत छुपा नही पायी . "उउउफ्फ्फ़ ... आ ... ह्ह्ह ... आ आ . .. ह .ह.ह.ह.ह. प्लीज़ थोड़ा धीरे ... काटो ...ना ... ऊ ..उ उ ई ई और जोर से चूसो मेरे चुंचियों को ."दोनों निपल्स को बारी -बारी से अपने मुह मे लेकर चूसने के बाद सुमित खड़ा होकर कंचन को अपनी बाँहों मे लेकर उसके पुरे बदन को जकड लिया . ऐसा कस कर आलिंगन किया की कंचन के मुह से चीख निकल पड़ी . कंचन का बदन सुमित की बाँहों में समा गया . सुमित उसके जिस्म को अपनी बाँहों में लेकर दबाने लगा . उसके बदन को अपने बदन से रगड़ने लगा . अपने गालों से कंचन के चिकने गालों को , अपने मजबूत सीने से उसके कड़क कबूतरों को , अपने लंड से उसकी छुपी हुयी चूत को और अपनी जांघों से उसकी चिकनी जांघों को रगड़ कर दोनों एक -दुसरे की बाँहों में झुमने लगे ."जब तुम्हारी चुन्ची इतनी खूबसूरत है तो चूत तो और भी खूबसूरत होगी ," कहकर सुमित उसके बदन पर लिपटी नाईटी के बाकी हिस्से को भी फाड़ने लगा .लेकिन कंचन उसको रोकते हुए कहा , "उफ्फ्फ ... इतने बेकाबू क्यों हो रहे हो . पहले मुझे अपना झुन झुना तो दिखाओ . मुझे भी उससे खेलना है ."सुमित बेकाबू था लेकिन कंचन वापस बोल पड़ी , "तुम अपना लंड मुझे दिखाओ मै तुम्हे अपनी चूत दिखा दूंगी ."कंचन ने अपने हाथ को बढ़ाकर सुमित की पैंट टटोलने मे लग गई . उसे अपना खिलौना चाहिए था . उसका खिलौना भूखे शेर की तरह अपने पिंजडे मे उछल कूद मचा रहा था . कंचन का हाथ उस पिंजडे की तरफ़ बढ़ कर उसके पहले ताले यानि पैंट की चैन को खोल दिया . सुमित ने उसके दोनों कबूतरों को सहलाते हुए अपनी पैंट को नीचे की और खिसका दिया ताकी लंड को बाहर निकालने मे ज्यादा परेशानी ना हो
फिर कंचन घुटने के बल बैठकर अंडसुमित यर की कैद मे बैठे उस भूखे शेर की दहाड़ सुनने लग गई . उसका फूला हुआ लंड अंडसुमित यर मे मचल रहा था . अंडसुमित यर तम्बू बन चुका था . कंचन ने अपने हाथो से उसको पुचकार कर शांत करने की कोशिश की . जब लंड ज्यादा ही मचलने लगा तो अपने होंठों से सुमित के लौडे को अंडसुमित यर के साथ ही दबा लिया . अब बारी थी सुमित के सिस्कारने की . तीन महीने मे Dr. के ना करने के कारण वोह अपनी बीबी , सीमा , को चोद नही पाया था लेकिन यदा -कदा सीमा अपने हाथ से सुमित के लंड को मसल जरूर देती थी .कंचन उसके लंड को अंडसुमित यर के ऊपर से चाटने लगी और बोल उठी.."जीजा जी ..क्या मस्त खिलौना है..कितना लंबा और मोटा...मेरी चूत को फाड़ डालोगे आज..लगता है..कुंवारी साली की चूत है..जरा प्यार से करना प्लीज़.."लंड फूल कर एक दम भड़क उठा "कुंवारी चूत छोड़ने के ख़्याल से ही सुमित जोश मे आ गया.. तभी कंचन ने झटके से अंडसुमित यर खींच कर नीचे खिसका दिया . सुमित का लंड एक दम तन कर कंचन के मुह के सामने नाचने लगा . "उफ़ ... क्या मोटा लंड है तुम्हारा जीजा जी ," कह कर अपने हाथों मे समेट लिया कंचन ने .लेकिन लंड पुरा का पुरा हाथों मे आया कहाँ था . मोटे के साथ साथ पुरा 8 " का लंड था सुमित का ..लंड का सुपाडा भुक्कड़ की तरह कंचन का चेहरा देख रहा था . कंचन ने लंड को अपने हाथों मे लेकर उसकी चमडी को ऊपर -नीचे करने लगी . "सच मुच तुम्हारा लंड तो बहुत लंबा और मोटा है ," कंचन के मुह से निकल पड़ा . सुमित से अब रहा नही जा रहा था .कंचन ने अपनी जीभ निकाल कर लंड के सुपाडे को धीरे -धीरे चाटने लगी . सुमित का लंड उचक -उचक कर उछल रहा था . तोधी देर तक कंचन उसके सुपाडे को ही चाट रही थी . सुमित और ज्यादा बेकाबू होने लगा . उससे रहा नही जा रहा था . वोह कांपते हुए स्वर मे बोला , "अरीए , मेरी साली , अब तो "सताना " बंद करो . मेरे लंड को चूसोलेकिन कंचन ने सुपाडे को चाटना नही छोड़ा . वोह सुमित को और भड़काना चाहती थी . सच तो ये था की सुमित का सोलोना लंड उसे भा गया था..और उसे आज अपनी सील अपने जीजा से ही तुड्वाना था..और उसे मालूम था की मर्द जब ज्यादा भड़कता है तो औरत की चुदाई भी उतनी ही ज्यादा और अच्छे से करता है.. कंचन अपनी चूत की चुदवाई बहुत जोर से करवाना चाहती थी अभी तक उसके बॉय फ्रेंड ने ऊपर ऊपर से सब किया था क्युकी कभी पूरी चुदाई का मौका ही नही मिलता था..वो कसार आज पूरी करनी थी..पर यहाँ तो सुमित का लंड भड़कता ही जा रहा था . उसने कंचन को कहा , "साली मादरचोद , चूस मेरे लंड को . पुरा का पुरा खा जा मेरे लंड को . साली यह लंड तीन महीने से तरस रहा है और तुझे सताने की पड़ी है . अगर नही चूसती तो मे तेरी चूत को ऐसा चोदुन्गा की तू भी जिन्दंगी भर याद रखेगी ."कंचन का मकसद पुरा हो गया . वोह सुमित को ऐसे ही भड़काना चाहती थी . तभी सुमित ने उसके बाल पकड़ कर अपना पुरा 8 इन्ची लंड उसके मुह मे गप से डाल दिया . "ले छिनाल चूस मेरे लंड को . बहुत ज्यादा मटक रही थी ना . अब चूस मेरे लंड को ."सुमित का लंड 6 इंच तक ही कंचन के मुह मे घुस पाया . बाकी दो इंच बाहर ही रहा . उसके लंड का किनारा उसके मुह की आखिरी दीवार को छू गया था . कंचन को साँस लेने मे तकलीफ होने लगी थी . उसने सुमित के लंड को पुरा बाहर निकाल कर कहा , "जीजा जी , मार ही डालोगे क्या . थोड़ा सब्र करो . चूसती हु तुम्हारे मूसल को ."फिर कंचन ने लंड को हाथ से पकड़ कर जो चूसाई की सुमित तो पागल हो गया . उसे लगा अगर मेने अपने लंड को बाहर नही निकला तो मेरी पिचकारी अभी छूट जायेगी . उसने अपना लंड बाहर निकल कर कंचन को खड़ी कर अपनी बाँहों मे उठा लिया और उसके होंठों को चूमते हुए अपने बेडरूम की और चल पड़ा . बेडरूम मे बेड पर कंचन को सुलाते हुए उसकी नाईटी के बाकी कपड़े को फाड़ते हुए उसकी जांघों को चाटने लगा . कंचन की गुदाज़ जांघे मखमल की तरह नरम और दूध जैसी गोरी थी . सुमित उन जांघों को चूसते हुए अपने हाथो को उसकी झाँटो को सहलाने लगा . क्या रानी तुम अपनी झाँटे साफ नही करती..लेकिन मुझे पसंद है कुंवारी चूत पर नरम झाँटे ..उफ़ क्या नरम नरम झाँटे थी . सुमित तो झाँटो मसलते हुए उसकी उठी हुई बुर (चूत ) को देख पागल हो गया .एक दम गीली लेकिन गुलाबी.. अपनी उंगली को धस से उसकी कोमल अनचुदी चूत मे धकेल दिया बोहोत टाईट चूत थी..इतनी गीली होने के बाद भी थोड़ी सी ऊँगली अन्दर घुसी..और ... कंचन के मुह से निकल पड़ा , "ऊईई माँ..आह्ह..दर्द होता है जीजा जी .. . धीरे से ."सुमित उसकी जांघों को छोड़ उसकी चूत के आस -पास अपनी जीभ से चाट रहा था और अपनी एक उंगली को उसकी चूत मे डाल कर अन्दर बाहर करने लगा वो उसके कुंवारी चूत को थोड़ा अभ्यस्त कर रहा था और चूत की उंगली -चुदाई कर रहा था . थोड़ी देर मे ही कंचन बोल पड़ी , "हाय ! क्यों टाइम बर्बाद कर रहे हो ? मेरे चूत को उंगली नहीं चाहिए . अभी तुम इसको अपने जीभ से छोड़ो . बाद मे उसको अपने लंड से फाड़ दो . वोह तुम्हारे लंड को खाने के लिए तरस रही है ."तभी सुमित ने अपनी उंगली निकाल कर उसकी जगह अपनी जीभ को लगा दिया . उसके दाने को चूस कर अपनी जीभ को उसकी चूत की गहराई मे उतार दिया . कंचन मादक स्वर मे कहने लगी , ""हाय ! क्या चीज बनाईं हाय भगवान ने , चुसो चुसो , और जोर से चुसो मेरी चूत को . और अन्दर तक अपनी जीभ घुसेडो लेकिन कुंवारी चूत मे कितनी जीभ घुसेगी... हाय ! ऊपर मेरी चूत के दाने को भी चाटो . बहुत मज़ा आ रहा हाय ."सुमित ने उसकी चूत चूस चूस कर उसकी हालत ख़राब कर दी . कंचन बैठ कर अपनी चूत को देख रही थी और मुह से सी सी ..ही..उफ्फ्फ..जीजा जी ..आह्ह..स्...स्...स्...कर रही थी ..इधर सुमित के मुह पर धक्के लगाने लगी . साथ ही बड़ -बड़ा रही थी ,"येस डार्लिंग , चूसो मेरे रजा , चूत को चूसो , अपनी जीभ को मेरी चूत के अन्दर तक चूसो . येस बड़ा मजा आ रहा हाय जीजा जी . येस , येस , चूसते जाओ . मेरे दाने को भी चूसो . आह्ह्ह .., येस , चूसो.... लो.. मेरी.. चूत. का.. पानी. निकल रहा हाय . आह्ह्ह , ऊह्ह ह , चूसो बहुत दिनों बाद मेरी चूओत का पानी निकलेगा . चूसते ऐ ऐ र...हो..., येस , येस , येस , ओह , oh, क्या जीभ से .. चोद.. रहे. हो.. लगता.. हाय... यह.. जीभ... नही..., तुम्हारा...ल ण्ड..ह है . आआह्ह ह्ह्ह, और छोसो .., अहह हह , मेरा पा ...नि ... निकल रहा है . ओह्ह hh येस स् स , मेरा पानी निकल गया आ आ आ आ आ ......"और कंचन ढीली पड़ गई.लेकिन सुमित ने उसकी चूत को छोड़ा नही . वोह बहुत देर तक चूसता रहा जब तक उसकी जीभ नही थक i गई . कंचन की चूत की खाज और ज्यादा बढ़ गई . लेकिन अब वोह अपनी चूत को चत्वा कर नही बल्कि असली खेल कर अपनी प्यास बुझ्वाना चाहती थी . उसने अपने हाथ बढ़ा कर सुमित के लंड को अपने हाथ मे लेकर आगे पीछे करने लगी . जब लंड एकदम मूसल हो गया तो अपनी चूत को उसके मुह से हाथ कर उसके लंड पर बैठ गई सुमित भी चौंक गया..एक कुंवारी लड़की उसके मोटे और लंबे लंड को अन्दर लेने के लिए कितनी तड़प रही थी... सुमित के लंड को और क्या चाहिए . उसका लंड तो चूत का प्यासा था . चूत को देख कर लंड अपनी जगह पर ही उछल -कूद मचाने लगा . सुमित ने अपने हाथ बढ़ा कर अपने लंड के सुपाडे को कंचन की चूत के मुह पर रख दिया उसकी चूत इतनी गीली थी की जूस टपक रहा था इसलिए कुछ लगाने की जरुरत ही नही थी... कंचन ने ऊपर से बैठे बैठे अपनी चूत को थोड़ा धक्का दिया तो वो सम्हाल नही पायी और नीचे से सुमित ने धक्का दिया भस.स्.स्.स्.स् की आवाज़ के साथ चूत की सील तोड़ कर लंड अन्दर और कंचन के मुह से आह्ह्ह..आः...मर गयी.ई.ई.i.ई.ई.ई.ई.ई..ई निकला..जीजा जी ..फट गई...ई.ई.ई.ई.ई.इमेरी चूत.. सुमित का लंड फर्र र र र करके उसकी चूत मे जा कर फंस गया . इसी के साथ कंचन के मुह से फ़िर से चीख निकल पड़ी . यह चीख दर्द भरी भी थी और साथ ही आनंद से भरी भी थी ..सुमित के लंड से बहकर खून नीचे चादर पर टपक रहा था...इसी बेड पर उसने रीना की भी सील तोडी थी अआज वो रीना की सील तोडना चाहता था..लेकिन कंचन मिल गई..थोड़ी देर के बाद कंचन सुमित के ऊपर बैठ कर अपनी चूत की खाज मिटने लग गई . अपनी चूत की जकड मे लंड को ले कर उछल -कूद मचने लगी . साथ ही उसके मुह से सिस्कारियां निकल रही थी . सुमित अपने हाथो से उसके चुन्ची पकड़ कर सहला रहा था . कंचन उसकी छाती पर हाथ रख कर अपनी चूत ख़ुद ही चुद्वा रही थी . आनंद से मदहोश हो कर चुद्वा रही थी . स्पीड धीरे -धीरे बढ़ कर अपनी चरम सीमा पर चली गई . फुल फास्ट स्पीड मे चुदवाने से कंचन की सिस्कारी बड़बड़ाहट मे बदलने लगी ."येस .. येस .. क्या मजा आ रहा है .. येस .. येस .. आज पहली बार चूत को मजा मिल रहा है .. ओह्ह .. क्या जन्नत का मजा मिल रहा है .. उफ्फ्फ .. जीजा जी तुम्हारा लंड लाखों मे एक है एक दम लोहे के जैसा सख्त है ... उफ़ ... मेरी चूत ... ह आ ई ... मैं .... आह्ह्ह ... मेरी चूत का पानी निकलने वाला है .. ओह्ह्ह ... क्या हो रहा है मुझे ... हाय ... मेरी चूत ... उफ्फ्फ्फ़ ... मेरा पानी निकला ... येस .. मेरा पानी निकला ... येस ... ऊईई ... येस ... मेरा पानी निकल गया ..." ऐसा कह कर कंचन उसकी छाती पर गिर कर लम्बी -लम्बी साँसे छोड़ने लगी . चूत का पानी निकलते हुए वोह अब हलके हलके धक्के मर कर एकदम से निढाल हो गई .लेकिन सुमित ने उसकी चूत को छोड़ा नही . वोह बहुत देर तक चूसता रहा जब तक उसकी जीभ नही थक i गई . कंचन की चूत की खाज और ज्यादा बढ़ गई . लेकिन अब वोह अपनी चूत को चटवा कर नही बल्कि असली खेल कर अपनी प्यास बुझ्वाना चाहती थी . उसने अपने हाथ बढ़ा कर सुमित के लंड को अपने हाथ मे लेकर आगे पीछे करने लगी . जब लंड एकदम मूसल हो गया तो अपनी चूत को उसके मुह से हाथ कर उसके लंड पर बैठ गई सुमित भी चौंक गया..एक कुंवारी लड़की उसके मोटे और लंबे लंड को अन्दर लेने के लिए कितनी तड़प रही थी... सुमित के लंड को और क्या चाहिए . उसका लंड तो चूत का प्यासा था . चूत को देख कर लंड अपनी जगह पर ही उछल -कूद मचाने लगा . सुमित ने अपने हाथ बढ़ा कर अपने लंड के सुपाडे को कंचन की चूत के मुह पर रख दिया उसकी चूत इतनी गीली थी की जूस टपक रहा था इसलिए कुछ लगाने की जरुरत ही नही थी... कंचन ने ऊपर से बैठे बैठे अपनी चूत को थोड़ा धक्का दिया तो वो सम्हाल नही पायी और नीचे से सुमित ने धक्का दिया भस.स्.स्.स्.स् की आवाज़ के साथ चूत की सील तोड़ कर लंड अन्दर और कंचन के मुह से आह्ह्ह..आः...मर गयी.ई.ई.i.ई.ई.ई.ई.ई..ई निकला..जीजा जी ..फट गई...ई.ई.ई.ई.ई.इमेरी चूत.. सुमित का लंड फर्र र र र करके उसकी चूत मे जा कर फंस गया . इसी के साथ कंचन के मुह से फ़िर से चीख निकल पड़ी . यह चीख दर्द भरी भी थी और साथ ही आनंद से भरी भी थी ..सुमित के लंड से बहकर खून नीचे चादर पर टपक रहा था...इसी बेड पर उसने रीना की भी सील तोडी थी अआज वो रीना की सील तोडना चाहता था..लेकिन कंचन मिल गई..थोड़ी देर के बाद कंचन सुमित के ऊपर बैठ कर अपनी चूत की खाज मिटने लग गई . अपनी चूत की जकड मे लंड को ले कर उछल -कूद मचने लगी . साथ ही उसके मुह से सिस्कारियां निकल रही थी . सुमित अपने हाथो से उसके चुन्ची पकड़ कर सहला रहा था . कंचन उसकी छाती पर हाथ रख कर अपनी चूत ख़ुद ही चुदवारही थी . आनंद से मदहोश हो कर चुद्वा रही थी . स्पीड धीरे -धीरे बढ़ कर अपनी चरम सीमा पर चली गई . फुल फास्ट स्पीड मे चुदवाने से कंचन की सिस्कारी बड़बड़ाहट मे बदलने लगी ."येस .. येस .. क्या मजा आ रहा है .. येस .. येस .. आज पहली बार चूत को मजा मिल रहा है .. ओह्ह .. क्या जन्नत का मजा मिल रहा है .. उफ्फ्फ .. जीजा जी तुम्हारा लंड लाखों मे एक है एक दम लोहे के जैसा सख्त है ... उफ़ ... मेरी चूत ... ह आ ई ... मैं .... आह्ह्ह ... मेरी चूत का पानी निकलने वाला है .. ओह्ह्ह ... क्या हो रहा है मुझे ... हाय ... मेरी चूत ... उफ्फ्फ्फ़ ... मेरा पानी निकला ... येस .. मेरा पानी निकला ... येस ... ऊईई ... येस ... मेरा पानी निकल गया ..." ऐसा कह कर कंचन उसकी छाती पर गिर कर लम्बी -लम्बी साँसे छोड़ने लगी . चूत का पानी निकलते हुए वोह अब हलके हलके धक्के मर कर एकदम से निढाल हो गई .सुमित ने अपनी बाँहों मे भरकर उसके होंठों को अपने होंठों से जकड लिया . थोड़ी देर बड़ जब कंचन की धड़कन एकदम सामान्य हुयी तो अपने सरीर से उसे उतरकर अपने बाजु मे सुला लिया और उसके चुन्ची को सहलाता हुआ एक निपल को मुह मे दबा लिया . थोड़ी देर मे दोनों चुन्ची को चूस कर अपनी उंगली से उसकी चूत के दाने को सहलाने लगा . उसकी चूत को सहला कर उसकी चूत की चोदाई की तय्यारी कर रहा था . उसका भूखा लंड अब उसे चोदने को एकदम तैयार था . कंचन के मुह से जब सिस्कारी निकलने लगी तो उसे डौगी स्टाइल मे कर उसके नितंबो को अपने हाथ से सहलाने लगा . उसकी चूत दोनों चुतडो के बीच एकदम से दबी हुई थी . अपने लंड को हाथ मे लेकर उसके चूतडो पर हलके से सहला रहा था .कंचन की चूत काफी गरम हो चुकी थी . उससे अब सहा नही जा रहा था . वोह बोल पड़ी , "हाय जीजा जी , क्यों तद्पा रहे हो . लंड हमारी चुदासी चूत को दिखा रहे हो और उसको चूत के अन्दर नही पेल रहे हो . अब जल्दी से अपने मूसल जैसे लंड को चूत मे घुसाओ , प्लीज़ . "तभी अपने लंड को उसकी चूत की खाई के सामने रखकर उसकी दरार मे टिका दिया और एक जोर का धक्का मारा की कंचन के अभी अभी सील टूटे चूत मे लंड सनसनाता घुस गया.कंचन के मुह से जो चीख निकली वो तो भयानक थी थोड़ी देर धक्के खाने के बाद कंचन के मुह से आनंद -भरी चीख निकल पड़ी . "हाय . दैय्या ." लंड आधा एक ही धक्के मे चूत के अन्दर घुस गया था..बाद मे हलके धक्के लगे और फ़िर एक जोर का धक्का लगा..इस . दूसरे जबर्दस्त धक्के मे लंड पुरा का पुरा चूत के अन्दर था कंचन का कलेजा दहल गया लेकिन वो अभी पूरी चुदासी थी... सुमित ने धीरे -धीरे अपने धक्के लगाने चालू रखे . लंड चूत मे पिस्टन की तरह अन्दर बाहर हो रहा था . उसका लंड लंड चूत की गरमी पाकर और फूल गया . कंचन भी धक्के का जवाब धक्के से दे रही थी . फिर अपने हाथ बढ़ा कर सुमित ने कंचन के चुंचियों को अपनी गिरफ्त मे ले लिया और धक्को की स्पीड बढ़ा दी . लंड चूत की ज़द तक जा रहा था . सुमित का लंड चूत के धक्के से एकदम बेकाबू हो उठा . सुमित के मुह से आवाजे आणि शुरू हो गई ."लो रानी ... मेरे लंड के झटके ... खाओ , ख़ूब खाओ .. देखो तुम्हारी चूत की प्यास बाकी नही रहे .. लो यह लो .. "कंचन की चूत धक्के पर धक्के खा कर अपना पानी छोड़ना शुरू कर दिया . "येस .. मेरे जीजा जी . .. ऊफ्फ .. मारो धक्के .. और मारो धक्के ... मेरी चूत से फिर से पानी निकल रहा हाय . तुम्हारा सख्त लंड ही मेरा पानी इतनी जल्दी -जल्दी निकाल पाया ." फिर भी सुमित अपने धक्के मरने चालू रखा . वोह भी अपना पानी निकलना चाहता था . कंचन ने देखा की सुमित इसी तरह चोद्ता रहा तो पानी उसकी चूत मे ही छोड़ देगा तो अपनी चूत को एकदम से हटा लिया . सुमित चिहुंक पड़ा , "यह क्या रानी . मेरा पानी निकलने वाला था .""यही तो मैं नही चाहती की तुम मेरे अन्दर झडो. मैं तुम्हारे वीर्य को अपने पुरे बदन पर झड़वाना चाहती हूँ .""ऐसी बात हाय तो लो अपना मुह खोलो और इसको चूसो . अब थोड़ा इंतज़ार करना पड़ेगा मेरे झड़ने का ."कंचन ने सुमित के लंड को हाथ से पकड़ कर पहले अपने चूंची पर सहलाया फिर लेट कर उसके मूसल को अपने दोनों बूब्स के बीच डाल कर सुमित से बोली , "लो जीजा जी , अब मेरे tits को छोड़ो . अपने लंड को मेरे बूब्स की खाई ई मे डाल कर यहाँ भी अपना झंडा गाड़ दो ."सुमित अपने लंड को कंचन के कबूतरों के बीच मे लाकर उसकी tit -fucking चालू कर दी . लेकिन जो टेंपो डौगी -स्टाइल मे बना हुआ था वोह वापस नही बन रहा था . पानी निकलता नही देख उसने अपना ध्यान उसके कबूतरों पर टिका दिया ."मेरी प्यारी साली , अब इस tit-fucking के बाद तुम्हारी चूत की फिर एक बार चुदाई करूंगा . तेरे कबूतरों का जवाब नहीं .....तेरे बूब कितने मलाई जितने चिकने हाय .....और तेरे गुलाबी निपल्स ...इन्हे तो मैं खा जाऊंगा ," कहता हुआ अपने लंड को चुंचियों से निकाल कर उसके ऊपर टूट पड़ा और उसकी चूचियों को मसल मसल कर दबोचने लगा ."प्लीज़ मेरी चूची को और जोर से दबाओ , बहुत मज़ा आ रहा हाय . मुझे नशा सा हो रहा है . तुम मेरी चूची दबा रहे हो और मेरी चूत मे कुछ कुछ हो रहा है . है ! तुम्हारा तो लंड भी अब वापस से कड़क हो गया है ."कंचन नीचे पड़ी पड़ी अपनी चूचियों की खाज मिटा रही थी . जीजा जी को पागल होते देख उसकी चूत मे फ़िर खाज शुरू हो गई थी . अपनी चूत पर उसके लंड को रख कर अपने बदन को उसके बदन से जकड लिया और कहने लगी , "मुझे चूत में बहुत ...आः ....खुजली हो रही है .....अब अपना चाक़ू मेरी चूत पे चला दो ....जीजा जी तुम्हारे लंड ने मेरी चूत से खून निकाला है आज चूत से .मुझे औरत बना दिया तुमने और दीदी को माँ आज मेरी चूत की मिटा दो खुजली ..... मिटाओ ."कंचन को भी तड़पते देख अपने लंड को उसकी चूत के ऊपर रख कर एक जोर से धक्का दिया और बोला , "ही ! मेरी रानी , ले ! ले ऐ ई ऐ ! और ले , जीं भर कर खा अपनी चूत मे मेरे लंड के धक्के ." फिर धक्के पर धक्के चालू हो गए . कंचन के पैर उसके सर तक मोड़ दिए..थोड़ी देर तक कमरे मैं केवल "उफ़ " "है " "ओह्ह " "मर गई..ओह्ह माँ...जीजा जी ..धीरे..दर्द हो रहा है..आह्ह भी अभी किया है...आह्ह..ऊह्ह ह की ही आवाजे आ रही थी . तभी सुमित और कंचन दोनों एक साथ हाय चीख पड़े अह्ह्ह...कंचन ...जीजा जी ... दोनों का ही पानी एक साथ छूटने लगा . दोनों निढाल हो कर पलंग पर लेटे रहे और उसी हालत मे नींद आ गई .दुसरे दिन सुबह ..कंचन अब कुंवारी नही थी...और चादर पर खून के छिंटे उसकी औरत बनने की गवाही दे रहे थे....सुबह कंचन ने उठकर सुमित को उठाया . रात की मस्ती झड़ी नही थी .सुमित ने कंचन को नंगी देखा तो फ़िर से अपने पास खींच लिया..चूमा चाटी शुरू हुयी और लंड लोहे जैसा हो गया... एक बार फिर दोनों आपस मे लग कर चुदाई शुरू कर दी . सुमित कंचन को नीचे ले कर उसकी दोनों टांगो को आसमान मे फैला कर और उसके चूतड के नीचे दो तकिये रख दिए..जिससे उसकी उभरी हुयी चूत और उभर आयी थी. अभी भी..सुमित ने जैसे ही अपना लंड उसकी गीली हो रही चूत के अन्दर घुसाया..कंचन चीख पड़ी..सुमित ने दो धक्को मे पूरा लंड चूत के अन्दर डाल दिया था..और कस कस कर उसकी चूत को चोदना शुरू कर दिया . सिस्कारियों से कमरे का वातावरण काफी मदहोश हो गया . कंचन नीचे से हर धक्के का जवाब अपनी सिस्कारी से दे रही थी .आह्ह..अह्ह्ह.औच..आ..ऊ..च....आह्ह...जीजा जी ....सच मुच तुम्हारा लंड लाजवाब है और बहुत लंबा और मोटा है . उस लड़की को बहुत मजा आएगा जो तुमसे चुदवायेगी ," कंचन सुमित से चुदवाती हुयी बोली .सुमित कस -कस कर धक्के मरते हुए बोला , "हाँ जाने -बहार , तुम्हारी चूत भी एकदम लाज़वाब है .एकदम तिघ्त, उभरी हुयी..कितनी गरम और नरम है..हाय.और इसकी गुलाबी रंगत... लगता है इसे चोद्ता ही जाऊं ."नीचे से कंचन सिस्कारी मरते हुए बोली , "ओह्ह ! मेरे राजा और पेलो और पेलो अपनी रानी की चूत मे अपना मोटा लंड . आह ! ..मेरी चूत तुम्हारा लंड खा कर और अपनी सील तुड़वा कर निहाल हो रही है . हाय ! लंबे और मोटे लंड की चुदाई ही कुछ और ही होती है . बस मज़ा आ गया . हाँ हाँ , तुम ऐसे ही अपनी कमर उछाल उछाल कर मेरी चूत मे अपने लंड से धक्का मारते रहो . मेरी चूत को भी बहुत दिनों से शौक था मोटे और लंबे लंड से सील तुड्वाने का.और फ़िर उससे चुदवाने का.जम कर.. उसको और जोर जोर से खिलाओ अपना मोटा और लंबा लंड ."लेकिन जल्दी ही खत्म हो गई उनकी चुदाई . दोनों का पानी आधे मिनट के फरक पर निकल गया . कंचन ऐसी चुदाई प कर मस्त हो गई . रात की चोदाई से ज्यादा कड़क चोदाई उसे सुबह वाली लगी .हॉस्पिटल जाकर सीमा को देखने और रीना को फ्री करने के कारण सुमित को बिस्तर पर से जल्दी उठना पड़ा . बाथरूम मे जाने के बाद पता चला की बाथटब का शावर और नल दोनों ख़राब हो गए है . पानी नही आ रहा था . तो सुमित यह कहकर निकल गया की मैं प्लंबर को भेज रहा हूँ . अगर जल्दी आ गया तो ठीक है नही तो रीना को बता देना की प्लंबर से नल ठीक करवाना है . सुमित हॉस्पिटल जाकर रीना को फ्री किया और बोला की घर पहुंचकर कंचन को जल्दी भेज देना ताकी वोह ख़ुद ऑफिस जा सके .रीना घर पहुँची तो कंचन बाथरूम से निकल कर अपने कपडे बदल रही थी . बाथरूम मे स्टोरेज किए हुए पानी से उसने अपना काम चला लिया था . कंचन के चहरे पर छायी हुयी खुशी को देखकर रीना समझ गई की रात भर क्या क्या हुआ होगा उसने सोच लिया की कंचन की सील कल रात मे खुल गई है..क्युकी बेड रूम की चादर पर खून उसे दिख गया था... फिर भी अनजान बनते हुए उसने कंचन को छेड़ते हुए पूछा , "है मेरी जान , बड़ी खुश दिख रही हो . रात भर सोयी नही थी क्या ? लगता है जीजा जी ने बहुत परेशान किया है .""नही तो . ऐसी तो कोई बात नही है .""अच्छा हमसे ही नाटक .""जब कुछ हुआ ही नही तो क्या नाटक करूं ."फ़िर रीना ने उसे बेडरूम की चादर पर खून दिखाया और बिस्तर के नीचे पड़ी हुयी फटी हुई नाईटी की ओर इशारा किया. तो कंचन शरमा गई और फिर धीरे धीरे सारी बात रात की उगल दी कंचन ने .रीना ने कहा जीजू का लैंड बहुत मज़बूत और मोटा है ये तो मैं जानती हु..मैंही कल उनसे चुदवाने के मूड मे थी..लेकिन तेरी लॉटरी लग गई. बहुत मज़ा आया होगा ना?..और दोनों फ़िर रस ले कर बातें करने लगी . रीना और कंचन रात की बात करते करते दोनों ही उत्तेजित हो गए . आपस मे अनजाने ही एक दूसरे के बदन को सहलाने लगी . दोनों की चूतें अन्दर की गरमी से पिघलने लगी . तभी टेलीफोन की घंटी बजी . कंचन ने फ़ोन उठाया ."मैं सुमित बोल रहा हूँ .""बोलो जीजा जी , मैं कंचन बोल रही हूँ .""देखो प्लंबर को बोल दिया है . थोड़ी देर मैं आ जाएगा . लेकिन तुम जल्दी आ जाओ . मुझे कुछ दवाई लाना है फिर मैं ऑफिस निकल जाऊंगा ."कंचन जल्दी ही हॉस्पिटल के लिए निकल गई साथ मे कह कर गई की बाथरूम का नल ख़राब है , प्लंबर आएगा . रीना मन मसोस कर रह गई . रात मे भी मौका नही मिला और अब सुबह थोड़ी बहुत गरमी शांत होती वह भी नही हुयी .उसे सुमित पर ग़ुस्सा आ रहा था..ऐसे तो मेरी चुन्ची दबाते है...गांड दबाते है..आज छुट्टी ले कर घर रुक जाते तो मै भी उस मोटे और लंबे लंड से एक बार तो चुदवा लेती.. आख़िर चूत तड़पती ही रह गई . वोह उसे शांत करने के लिए जीजी की एक नाईटी पहन कर बाथरूम मे चली गई . उससे बदन तो ढक गया लेकिन गला काफी खुला हुआ था और नीचे से भी घुटने के ऊपर तक ही थी .नाईटी को उतार कर जैसे ही नल खोला तो ध्यान आया की वोह तो ख़राब है . उसी हालत मे बैठी बैठी अपनी चूत को हाथ से सहलाने लगी . चूत को सहलाते -सहलाते उसे ध्यान ही नही पड़ा की दरवाजे की बेल कितनी देर से बज रही है . फटा - फट नाईटी पहन कर बाहर निकली और गेट खोल दिया . सामने खड़ा था प्लंबरएक मजबूत किस्म का इंसान . रंग सांवला लेकिन कद काठी कसरती . वोह भी अपने सामने खड़ी रीना को देखता ही रह गया . उफ़ क्या नशीला बदन है . एक मिनी नाईटी पहने हुए तो क़यामत ढा रही थी . छातियां नाईटी मे समां नही रही थी . आधे मम्मे बाहर छलक रहे थे . गहरी साँस लेते हुए बोला , "सुमित साहेब ने बुलाया है . क्या कोई नल ख़राब है .""हाँ .. हाँ . बाथरूम का शावर और नल दोनों ख़राब है . पानी नही आ रहा है ."संजय , यही नाम था प्लंबर का , सीधे बाथरूम मे चला गया . बाथ टब का शोवेर और नल चालू कर के देखा लेकिन पानी नही आ रहा था . तो उसने शावर को निकाल दिया और फिर बाथरूम के अन्दर बनी हुयी टंकी जो सीलिंग से लगी हुयी थी , से नल को चेक करने लगा ."लगता है की टंकी से पानी नही आ रहा है . ऊपर चेक करना पड़ेगा . कोई टेबल है क्या ?"रीना ने एक मध्यम साइज़ की टेबल ला कर दी . वोह उस पर चढ़ कर टंकी चेक करने लगा और बोला , "पानी तो पुरा भरा पड़ा है . पाइप और फिटिंग चेक करना पड़ेगा ."यह कह कर अपनी पैंट और शर्ट निकलने लगा . एक बनियान और स्वीमिंग कास्ट्युम जैसा अंडसुमित यर पहने हुआ टेबल पर चढ़ गया . रीना उसके गठीले बदन को देखी तो देखते ही रह गई . मजदूर आदमी का जिस्म था . एक दम कड़क .ऊपर से पाइप को खोलते हुआ बोला "मेम साहेब , आप जरा बाथ टब के पास रहना . जब पानी आए तो शावर को पाइप के ऊपर पकड़ कर रखना ."बाथरूम मे जगह कम थी . टेबल ने जगह घेर कर रखी थी . रीना बाथ टब मे जाकर खड़ी हो गई . जब पानी आने लगा तो वोह शावर को पाइप के ऊपर लगाने लगी लेकिन बाथ टब मे खड़ी होने की वजह से रीना पुरी तरह से भीग गई . उसका बदन नाईटी से झलकने लगा . उसके कबूतर नाईटी से आधे तो पहले ही दिख रहे थे अब बाकी आधे नाईटी के पारदर्शी (transparent) हो जाने की वजह से दीखने लगे . उसके दर्क निपल एक दम से तन कर आमंत्रण दे रहे थे . जांघों से नाईटी चिपक गई थी . उसके उभरे हुए नितम्ब आकर्षित कर रहे थे . संजय ने जब नजर नीचे कर यह नज़ारा देखा तो उसका लंड दन -दन करता हुआ खड़ा हो गया . उसका लंड एक गोरी और मस्त लौंडिया को देख कर फड़फडाने लगा . वोह पाइप वापस फिटिंग करते हुए कभी पाइप को देख रहा था तो कभी रीना की उफनती हुयी जवानी को देख रहा था .तभी उसके हाथ से रेंच -पाना (an instrument to tight pipe) नीचे बाथ टब मे गिर गया और उसके हाथ से पाइप भी छूट गया .पानी ऊपर पाइप से नीचे गिरने लगा . ख़ुद भी पुरी तरह से भीग गया . उसके बदन के कपडे भी भीग गए . कोस्ट्युम जैसे अंडसुमित यर से लंड का साइज़ साफ दिख रहा था .बहुत ही मोटा और लंबा लग रहा था.और मुड़ा हुआ था.. ऊपर से ही कहा , "मेम साहेब , जरा वोह रेंच -पाना देना प्लीज़ ."रीना ने रेंच -पाना उठाया तो शावर अपनी जगह से खिसक गया . जिसकी वजह से पानी फिर गिरने लगा . एक हाथ से शावर को पकडे हुए दूसरे हाथ से झुक कर उस ने रेंच -पाना को उठाया और उसकी मस्तानी गांड ..ऊह्ह..ओह्ह ..क्या दृश्य था ..मोटे गदराये नितम्बो की गोलाई और उसमे वो गांड..वो हाथ से रेंच पाना देने लगी . लेकिन पानी गिरते रहने की वजह से उसका ध्यान शावर की तरफ़ ही था . दूसरा हाथ रेंच -पाना संजय को देने के लिए आगे बढाया हुआ था . ऊपर संजय भी पाइप से पानी गिरते रहने की वजह से पाइप की और ही देख रहा था . उसने ऊपर ही मुह किए हुए वापस कहा , "मेम साहेब , प्लीज़ . वह रेंच -पाना देना ."रीना भी शावर की और देखते देखते बोली , "दिया तो है . लेलो ."तभी दोनों की नज़र आपस मे टकराई तो देखा की रेंच -पाना रीना ने अनजान -वश संजय के मोटे फूले हुए लंड मे फंसा दिया था .संजय यह देखकर मुस्कुराया और रीना ने अपनी नज़र नीचे झुका ली . संजय रेंच -पाना अपने लंड पर से निकाल कर पाइप को फिटिंग करने लग गया .संजय बोला , "अच्छा मेम साहिब , अब धक्का नही दूँगा . मैं थोड़ा ज्यादा ही जोश मे आ गया था . लेकिन अब इसे चूसो . तड़पाओ मत मुझे ."रीना उसके लंड को चाट रही थी ऊपर से फव्वारे से पनि गिर रहा था . संजय को जन्नत का मजा मिल रहा था . तभी संजय को महसूस हुवा की अगर लंड को रीना के मुह से नही निकला तो फव्वारे की तरह उसका लंड भी पानी फेंकने लगेगा . उसने रीना को बाथ टब मे लेटकर उस पर छा गया और उसके मम्मे अपने हाथों से पकड़ एक को मुह मे लेकर आम की तरह चूसने लगा . रीना के मुह से सिस्कारी निकल गई ..आह्ह..उफ्फ्फ..इश..श.स्.स्.स्.स्. धीरे..लेकिन अब संजय कुछ नही सुनने वाला था . संजू बगैर दांतों से नुकसान पहुँचाये उसके एक -एक करके दोनों उरोजो को बारी -बारी से मुह मे लेकर चूस रहा था . साथ मे बोलता भी जा रहा था , "मेम साहेब , तुम्हारे चुचियो का जवाब नहीं .....तुम्हारे चूंची कितने मलाई जितने चिकने है .....और तुम्हारे गुलाबी निपल .. उफ़ ....इन्हे तो मैं खा जाऊंगा ."रीना सिस्कारी लेते हुए बोली , ""हाय ! और जोर से मेरी चूची मसलों , इनको ख़ूब दबाव , दबा दबाके इनका सारा रस पी जाओ . मुझे बहुत मज़ा आ रहा है . मेरे पुरे बदन मे नशा छा रहा है . हाय मुझको इतना मज़ा कभी नही मिला . और दबाव मेरी चूची को ."संजय उसके मम्मे चूसते हुए अपने एक हाथ को उसके मम्मे से सरकाते हुए उसकी चूत के ऊपर हाथ से मालिश करने लगा . रीना का जोश दुगुना हो गया . उसकी सिस्कारियां बढती ही जा रही थी . जिनको सुनकर संजय का भी जोश बढ़ गया . उसका मुह और दोनों हाथ की स्पीड डबल हो गई . अपनी जीभ से उसकी कड़क हुयी निपल को चूसने के साथ उसकी चूत और झांटो पर अपनी रगड़ बढ़ा दी . "आः आह्ह ......प्लीज़ आहिस्ता करो . रगडो मेरी चूत को .. आराम से करो .. मजा आ रहा है तुम ने क्या कर दिया है .. आज ऐसा पहली बार फील कर रही हूँ और बहुत अच्छा लग रहा है .. हाँ ऐसे .. आराम से .. मगर रुकना मत .. करते रहो .. ओह्ह हह स्.स्.स्.स्.स्.स्.उफ्फ्फ....और उसने टटोल कर फ़िर से उसके लंड को पकड़ा जो की फुफकार रहा था... "लोहे को गरम होते देख संजय ने अब अपना हथोडा मारना ही अच्छा समझा . उसने रीना को दीवाल के सहारे उठा के खड़ा कर उसके पीछे से अपने दोनों हाथो से उसके चूतड को सहलाना शुरू कर दिया . उफ़ ... क्या गुदाज़ जिस्म के उसके चूतड थे . दूध मे सिन्दूरी कलर डाले हुए रंग के चूतड . वोह अपनी किस्मत पर यकीन ही नही कर पा रहा था . वाकई मे ऐसी चूत और चूतड किस्मत वाले को ही मिलते है . उसने अपनी जीभ निकल कर उसके चूतड को चाटना चालू कर दिया . रीना के मादक बदन मे एक सिहरन दौड़ गई . उसका बदन का एक -एक रोंया सिहर उठा . पुरे बदन मे बिजली कड़क रही थी . चूतड को चाट -ते चाट -ते अपनी जीभ को उसकी पीछे से उभर कर बाहर आई हुयी चूत पर लगा दिया . जीभ चूत पर लगते ही रीना के मुह से "ऑफ़ फ . ..ओफ्फ्फ " की आवाज आनी शुरू हो गई . अपनी जीभ को संजय ने धीरे धीरे आगे बढ़ाते हुए चूत की चुदाई अपनी जीभ से चालू कर दी . चोदना -चाटना , चोदना -चाटना , चोदना -चाटना यही कर रहा था अपनी जीभ से उसकी गुलाबी चूत को दोनों फांक चिपकी हुयी थी..उसे ऊँगली से थोड़ा फैला लिया था..."ओओओह मा .. ओह आहा आया .. यह क्या कर रहे हो , बहुत मज़ा आ रहा है और चाटो , चूस डालो ... पानी निकल दो इसका .... बहुत प्यासी है मेरी चूत ," रीना की लहराती हुयी आवाज बाथरूम मे गूँज रही थी . मेरी प्यास बुझा दो , मुझे ठंडा कर्दो .. मेरा जिस्म बहुत जल रहा है .. कुछ कुछ हो रहा है मन मे , प्लीज़ मेरी आग बुझा दो मेरी .. प्लीज़संजय ने उसकी रसीली छूट की चुसाई कर उसे वैसे ही खड़ा रहने दिया और अपने सख्त लंड को उसके चूतड पर दबाना शुरू कर दिया . लंड को एकदम नजदीक देख उसकी चूत का पानी बहना चालू हो गया . चूत एकदम से जूसी हो गई . अपने हाथ को पीछे ले कर संजय को अपने बदन से चिपका लिया . उसकी चूत की भूख अब बढती ही जा रही थी . अब उससे सहन नही हो पा रहा था . वोह भड़क कर बोली , "उफ्फ्फ ... देख क्या रहे हो ... चालू करो .... लगाओ अपने लंड को निशाने पर और मारो धक्का ."संजय ने अपने लंड को उसकी चूत के निशाने पर ला थोड़ा सा धक्का दिया . आधा सुपाडा लंड का चूत मे जा कर फँस गया . दूसरा धक्का मारा तो उसके लंड का पूरा सुपाडा उसकी चूत मे जा कर धंस गया . तीसरा धक्का मारा तो आधा लंडउसकी गुफा मे गायब हो गया . साथ ही रीना की चीख पूरे घर मे फ़ैल गई..ऊह मेरी माँ..मर गयी..निकालो....अह्ह्ह..आह्ह..बाप रे..इतना मोटा...निकालो..मैं मर जाऊंगी.. लेकिन संजय रुका नही..वो समझ गया था की ये चुदी हुयी चूत है ..थोड़ा चिल्लायेगी..क्युकी इतना मोटा लंड कभी चूत मे नही घुसा है ..उसके शहरी दोस्त का नए ज़माने का लंड ही घुसा होगा..उसने रीना को थोड़ा दबा के पकड़ा और फ़िर धीरे धीरे चोदने लगा..एक और धक्का मारा तो इस बार रीना की आनंद भरी चीख भी निकल गई . "हाय .... क्या लंड है तुम्हारा .... एक दम से तगड़ा और सख्त .... उफ़ ..... वाकई मे ही ... जैसे कोई गरम गरम हथोडा जाकर मेरी चूत मे फँस गया हो ."अब संजय ने अपने धक्के लगाने शुरू कर दिए . खड़े होने की वजह से पूरा लंड तो अन्दर नही जा रहा था लेकिन जितना भी जा रहा था वह रीना की चूत मे खलबली जरूर मचा रहा था . थोड़ी देर इस तरह दक्के मरने के बाद उसने अपने लंड को बाहर निकाल दिया और रीना को बाथरूम के फर्श पर लेटा कर अपने लंड को उसके मुह मे दाल दिया . रीना ने गप्प से उसको मुह मे ले लिया . थोड़ी देर चूसाने के बाद बाहर निकाल उसके लंड को हाथ से पकड़ सुरेश को कहा , "प्लीज़ अपना लंड मेरी चूत मैं डाल दो . मुझे और मत तड़पाओ ज़ालिम . मुझे छोड़ो , मैं तुम्हारे लंड की दीवानी बन गयी हूँ . अपने लंड से मेरी चूत की प्यास बुझाओ ."संजय ने उसकी जांघों को चौड़ा कर अपने लंड को उसकी चूत पर टिका दिया . फिर कस कर एक धक्का मारा .लंडउसकी रस से भरी हुयी उसकी चूत को ककड़ी की तरह फाड़ता हुआ चूत की अन्दर वाली दीवार से सीधा जा टकराया . रीना तो एक बार पुरी तरह कंप गई और पूरा बदन दहल उठा और मुह से चीख निकल गई..उईई माँ.मार डाला ..मेरी फट गयीई...आह्ह्ह..लेकिन संजय को अब कोई परवाह नही थी..उसने आव देखा ना ताव..और फटके लगाने शुरू कर दिए..उसने देखा उसके लंड पर कुछ खून के दाग लगे है..आज सच मे रीना की चूत फट गई..संजय ने . लंड को बाहर निकाल वापस धक्का मारा तो उसकी सिस्कारी निकालनी चालू हो गई . "उफ़ ... अह्ह्ह ..." संजय अपनी फुल्ल स्पीड से उसकी चूत के अन्दर बाहर अपने लंड को कर रहा था .रीना बड़बड़ा रही थी , "ओह्ह ह ... क्या चोद रहे हो तुम .... वाकई मे मेरी चूत धन्य हो रही है ... तुम्हारी चुदाई से .... उफ्फ्फ .... मेरी चूत को आज चोद -चोद कर ख़ूब रगड़ाई करो .... आह्ह्ह ह .... चोदो .... चोदो .... और चोदो .... चोदते ही जाओ .मुझे मार डालो..मेरी चूत का पूरा पानी निकालो "हाँ रानी .... ख़ूब चोदुंगा तुझे आज ...तुम्हारी जीं भर की कसर निकालूँगा आज मैं ....लो संभालो मेरे लन्ड को .....उफ्फ्फ ....तुम्हारी चूत .....क्या नरम और नाजुक है ....तुम्हारे संतरों का भी जवाब नही ....उफ़ क्या चुचिया है तुम्हारी ....आज तुझे ऐसा चोदुन्गा मैं की जिंदगी भर याद रखोगी ."धक्कों की स्पीड बढती ही जा रही थी . दोनों मदहोश हुए चुदाई मे लगे हुए थे रीना इस बीच दो बार झाड़ चुकी थी..और चूत ने इतना पानी फेंका था की लंड अन्दर अब आराम से फिसलता हुआ जा रहा था और बाहर भी आ रहा था..और बाथ रूम मे . घचा -घच ....फचा -फच .की आवाज़ आने लगी थी. दोनों आँखों से एक -दूसरे को देखते हुए एक दूसरे मे ज्यादा से ज्यादा सामने की कोशिश मे लगे हुए थे लंड अन्दर जता फिर बाहर आकर दुगने जोश से वापस अन्दर चला जाता . चूत उसका थोड़ा ऊपर उठके स्वागत करती फिर गुप्प से उसको अपने अन्दर समां लेती .रीना की चीखें बढती गई , "राजा चोदो मुझे . और तेज .. और जोरसे ... चोदो . ऊफ्फ्फ , ओह्ह्ह , आह्ह्ह , ऊईई माँ , मार गई मैं आज . फाड़ दो मेरी चूत को .... और जोर से चोदो मुझे ...अपने लंड से फाड़ दो मेरी चूत को ... मुझको अपना बनालो .... चोदो मुझको ... जोर से चोदो ... प्लीज़ .....इसको अन्दर तक चोदते रहो .... ऊईए ... उफ़ ... कितना मोटा लंड है , ऐसा लगता है की गधे का लंड हो ....मुझे ऐसा लग रहा है की मैं पहली बार चूदी हूँ ....तुम बहुत मजे का चोदते हो देखो मेरी चूत फटी क्या..और उसने ख़ुद अपना एक हाथ चूत और लंड पर लगाया..और देखा की खून निकला है..वो बोल उठी..राजा..आज सच मे मेरी सील टूटी है..साली कंचन ने कल सील तुडवाई लेकिन..मेरी चुदी हुयी चूत की भी आज फ़िर से सील टूट गई..ई.ई.ई.आह्ह..."संजय अपने लंड को थोड़ा निकाल उसकी जांघों को और फैला कर उसकी चूत की चुदाई चालू कर दी . अन्दर तक जा रहे लंड से अब उसकी चूत पिघलने को तैयार हो गई . रीना ने अपनी टांगो से उसकी टांगो को एकदम से जकड लिया और बड़ बड़ाई , येस्स ... मेरे राजा ... चोदो मुझे .... उफ्फ्फ .... और .... और ..... अह्ह्ह . ... मेरा पानी .... हाय .....मेरा पानी निकलने वाला है ....राजा ....चोदो ..आह आह आह्हा आह ओफ्फ्फ ..मेरा पानी निकला .....हाँ .... निकला ..... हाँ .हाँ हाँ हाँ उफ़ इश श स्.स् स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्. .... निकल गया ."संजय के साथ एक -दम से चिपट कर अपनी चूत के पानी से उसके लंड को सींच ही रही थी ..इस बार उसका पानी बहुत तेजी से और बहुत सारा निकला..और उसके इस तरह चिपकाने से संजय के लंड ने भी अपना फव्वारा छोड़ दिया . चूत और लंड का मिलन अपने चरम पर पहुँच गया . दोनों एक दूसरे की बाँहों मे खोते हुए निढाल हो कर फर्श पर ही लेट गए . थोड़ी देर बाद संजय उठा और अपनी नज़रे रीना की आँखों मे गडाते हुए बोला , "मेम साहिब ये चुदाई मुझे जिंदगी भर याद रहेगी ."रीना ने भी कहा ,"और नही चोदोगे मुझे .""नही मेम साहिब , अब दूकान पर जन होगा . नही तो सेठ को बोलना भारी पड़ेगा मुझे ."इच्छा नही होते हुए भी संजय को विदा करने रीना उठ खड़ी हुयी .उसकी चूत की हालत ख़राब हो गई थी..ऐसी चुदाई उसने सपने मे भी नही सोची थी..पुरा बदन टूट रहा था..लेकिन फ़िर भी अच्छा लग रहा था...संजय खड़ा होकर अपने कपड़े पहने और रीना को चूमता हुवा बाथरूम से बाहर निकल गया .दरवाजे पर आया रीना उसके पीछे थी उसने देखा फिर बगैर कपड़ों मे खड़ी रीना को अपनी बाँहों मे समेत -ते हुए उसके होंठों को चूमा , चुचियो को सहलाया , चूत को मसला . रीना भी उसकी बाँहों से अपने एक हाथ को फ्री कर पैंट के ऊपर से ही उसके लंड को मसलने लगी . लंड झट से खड़ा हो गया . खड़े हुए लंड ने रीना के हाथों मे फुर्ती ला दी . और जोर से मसलने लगी और बोली , "देखो इसे . इसको अभी नही जाना है ."फिर नीचे बैठ कर उसके लंड को पैंट की चैन खोल कर बाहर निकाल ली और चूसाने लग गई . लंड मुह मे जाते ही उछल कूद मचने लग . अपनी पैंट को नीचे खिसका कर रीना को घोड़ी बना कर अपना लंड उसकी नाजुक चूत मे एक धक्के मे पेल दिया और क़रीब २० मिनिट ऐसे ही चोदा और फ़िर अपना पूरा माल उसकी चूत मे डाला..ये चुदाई बहुत ही घमासान थी..रीना सिर्फ़ चीखती रही..आह्ह..मर..गयी.ई.ई..अआछ..चोदो..और संजय ने हुमच हुमच कर चोदा जब रीना झड़ी उसके १ मिनिट बाद ही संजय ने अपना पानी भी उसकी चूत मे डाल दिया... रीना की जान मे जान आई . उसकी चूत लंड खाने को ही उतावली थी और उसे लंड मिल गया ..प्यारी चूत


दोस्तो अभी तक आपने पढ़ा की कैसे कंचन की कुंवारी चूत की चुदायी सुमित ने की और रीना की गरम तड़पती चूत मे प्लंबर संजय ने अपना लावा डाल के उसकी आग को ठंडा किया


कहानी अभी बाकि है भाई आगे आप जानेगे कैसे सुमित ने अपने दोनों साली की चुदाई की को पढ़ते रहे
मेरी गरम गरम सालियां
Published: By: Nirmala - 04:50

लड़की को पटाने के टोटके-How to cheat with woman

लड़की को पटाने के टोटके-How to cheat with woman

मेरा एक ई-मित्र है तरुण ! बस ऐसे ही जान पहचान हो गई थी। वो मेरी कहानियों का बड़ा प्रशंसक था। उसे किसी लड़की को पटाने के टोटके पता करने थे। एक दिन जब मैं अपने मेल्स चेक कर रहा था तो उस से चाट पर बात हुई थी। फिर तो बातों ये सिलसला चल ही पड़ा। यह कहानी उसके साथ हुई बातों पर आधारित है। लीजिये उसकी जबानी सुनिए :

दोस्तों मेरा नाम तरुण है। 20 साल का हूँ। कॉलेज में पढता हूँ। पिछले साल गर्मियों की छुट्टियों में मैं अपने नानिहाल अमृतसर घूमने गया हुआ था। मेरे मामा का छोटा सा परिवार है। मेरे मामाजी रुस्तम सेठ 45 साल के हैं और मामी सविता 42 के अलावा उनकी एक बेटी है कनिका 18 साल की। मस्त क़यामत बन गई है अब तो अच्छे-अच्छो का पानी निकल जाता है उसे देख कर। वो भी अब मोहल्ले के लौंडे लपाडों को देख कर नैन मट्टका करने लगी है।



एक बात खास तौर पर बताना चाहूँगा कि मेरे नानाजी का परिवार लाहोर से अमृतसर 1947 में आया था और यहाँ आकर बस गया। पहले तो सब्जी की छोटी सी दूकान ही थी पर अब तो काम कर लिए हैं। खालसा कॉलेज के सामने एक जनरल स्टोर है जिसमें पब्लिक टेलीफ़ोन, कंप्यूटर और नेट आदि की सुविधा भी है। साथ में जूस बार और फलों की दूकान भी है। अपना दो मंजिला मकान है और घर में सब आराम है। किसी चीज की कोई कमी नहीं है। आदमी को और क्या चाहिए। रोटी कपड़ा और मकान के अलावा तो बस सेक्स की जरुरत रह जाती है।

मैं बचपन से ही बहुत शर्मीला रहा हूँ मुझे अभी तक सेक्स का ज्यादा अनुभव नहीं था। बस एक बार बचपन में मेरे चाचा ने मेरी गांड मारी थी। जब से जवान हुआ था अपने लंड को हाथ में लिए ही घूम रहा था। कभी कभार नेट पर सेक्सी कहानियां पढ़ लेता था और ब्लू फिल्म भी देख लेता था। सच पूछो तो मैं किसी लड़की या औरत को चोदने के लिए मरा ही जा रहा था। मामाजी और मामी को कई बार रात में चुदाई करते देखा था। वाह… 42 साल की उम्र में भी मेरी मामी सविता एक दम जवान पट्ठी ही लगती है। लयबद्ध तरीके से हिलते मोटे मोटे नितम्ब और गोल गोल स्तन तो देखने वालों पर बिजलियाँ ही गिरा देते हैं। ज्यादातर वो सलवार और कुरता ही पहनती है पर कभी कभार जब काली साड़ी और कसा हुआ ब्लाउज पहनती है तो उसकी लचकती कमर और गहरी नाभि देखकर तो कई मनचले सीटी बजाने लगते हैं। लेकिन दो दो चूतों के होते हुए भी मैं अब तक प्यासा ही था।

जून का महीना था। सभी लोग छत पर सोया करते थे। रात के कोई दो बजे होंगे। मेरी अचानक आँख खुली तो मैंने देखा मामा और मामी दोनों ही नहीं हैं। कनिका बगल में लेटी हुई है। मैं नीचे पेशाब करने चला गया। पेशाब करने के बाद जब मैं वापस आने लगा तो मैंने देखा मामा और मामी के कमरे की लाईट जल रही है। मैं पहले तो कुछ समझा नहीं पर हाईई ओह … या … उईई … की हलकी हलकी आवाज ने मुझे खिड़की से झांकने को मजबूर कर दिया। खिड़की का पर्दा थोड़ा सा हटा हुआ था।

अन्दर का दृश्य देख कर तो मैं जड़ ही हो गया। मामा और मामी दोनों नंगे बेड पर अपनी रात रंगीन कर रहे थे। मामा नीचे लेटे थे और मामी उनके ऊपर बैठी थी। मामा का लंड मामी की चूत में घुसा हुआ था और वो मामा के सीने पर हाथ रख कर धीरे धीरे धक्के लगा रही थी और आह… उन्ह…। या … की आवाजें निकाल रही थी। उसके मोटे मोटे नितम्ब तो ऊपर नीचे होते ऐसे लग रहे थे जैसे कोई फ़ुटबाल को किक मार रहा हो। उनकी चूत पर उगी काली काली झांटों का झुरमुट तो किसी मधुमक्खी के छत्ते जैसा था।

वो दोनों ही चुदाई में मग्न थे। कोई 8-10 मिनट तक तो इसी तरह चुदाई चली होगी। पता नहीं कब से लगे थे। फिर मामी की रफ्तार तेज होती चली गई और एक जोर की सीत्कार करते हुए वो ढीली पड़ गई और मामा पर ही पसर गई। मामा ने उसे कस कर बाहों में जकड़ लिया और जोर से मामी के होंठ चूम लिए।

“सविता डार्लिंग ! एक बात बोलूं ?”

“क्या ? “

“तुम्हारी चूत अब बहुत ढीली हो गई है बिलकुल मजा नहीं आता ?”

“तुम गांड भी तो मार लेते हो वो तो अभी भी टाइट है ना ?”

“ओह तुम नहीं समझी ?”

“बताओ ना ?”

“वो तुम्हारी बहन बबिता की चूत और गांड दोनों ही बड़ी मस्त थी ? और तुम्हारी भाभी जया तो तुम्हारी ही उम्र की है पर क्या टाइट चूत है साली की ? मज़ा ही आ जाता है चोद कर”

“तो ये कहो ना कि मुझ से जी भर गया है तुम्हारा ?”

“अरे नहीं सविता रानी ऐसी बात नहीं है दरअसल मैं सोच रहा था कि तुम्हारे छोटे वाले भाई की बीवी बड़ी मस्त है। उसे चोदने को जी करता है ?”

“पर उसकी तो अभी नई नई शादी हुई है वो भला कैसे तैयार होगी ? “

“तुम चाहो तो सब हो सकता है ?”

“वो कैसे ?”

“तुम अपने बड़े भाई से तो पता नहीं कितनी बार चुदवा चुकी हो अब छोटे से भी चुदवा लो और मैं भी उस क़यामत को एक बार चोद कर निहाल हो जाऊं !”

“बात तो तुम ठीक कह रहे हो, पर अविनाश नहीं मानेगा ?”

“क्यों ?”

“उसे मेरी इस चुदी चुदाई भोसड़ी में भला क्या मज़ा आएगा ?”

“ओह तुम भी एक नंबर की फुद्दू हो ! उसे कनिका का लालच दे दो ना ?”

“कनिका … ? अरे नहीं. वो अभी बच्ची है !”

“अरे बच्ची कहाँ है ! पूरे अट्ठारह साल की तो हो गई है ? तुम्हें अपनी याद नहीं है क्या ? तुम तो केवल सोलह साल की ही थी जब हमारी शादी हुई थी और मैंने तो सुहागरात में ही तुम्हारी गांड भी मार ली थी !”

“हाँ ये तो सच है पर ….”

“पर क्या ?”

“मुझे भी तो जवान लंड चाहिए ना ? तुम तो बस नई नई चूतों के पीछे पड़े रहते हो मेरा तो जरा भी ख़याल नहीं है तुम्हें ?”

“अरे तुमने भी तो अपने जीजा और भाई से चुदवाया था ना और गांड भी तो मरवाई थी ना ?”

“पर वो नए कहाँ थे मुझे भी नया और ताजा लंड चाहिए बस कह दिया ?”

“ओह… तुम तरुण को क्यों नहीं तैयार कर लेती ? तुम उसके मज़े लो और मैं कनिका की सील तोड़ने का मजा ले लूँगा !”

“पर वो मेरे सगे भाई की औलाद हैं क्या यह ठीक रहेगा ?”

“क्यों इसमें क्या बुराई है ?”

“पर वो… नहीं ..। मुझे ऐसा करना अच्छा नहीं लगता !”

“अच्छा चलो एक बात बताओ जिस माली ने पेड़ लगाया है क्या उसे उस पेड़ के फल खाने का हक नहीं होना चाहिए ? या जिस किसान ने इतने प्यार से फसल तैयार की है उसे उस फसल के अनाज को खाने का हक नहीं मिलना चाहिए ? अब अगर मैं अपनी इस बेटी को चोदना चाहता हूँ तो इसमें क्या गलत है ? “

“ओह तुम भी एक नंबर के ठरकी हो। अच्छा ठीक है बाद में सोचेंगे ?”

और फिर मामी ने मामा का मुरझाया लंड अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी। मैं उनकी बातें सुनकर इतना उत्तेजित हो गया था कि मुट्ठ मारने के अलावा मेरे पास अब कोई और रास्ता नहीं बचा था। मैं अपना 7 इंच का लंड हाथ में लिए बाथ रूम की ओर बढ़ गया। फिर मुझे ख़याल आया कनिका ऊपर अकेली है। कनिका की ओर ध्यान जाते ही मेरा लंड तो जैसे छलांगें ही लगाने लगा। मैं दौड़ कर छत पर चला आया।

कनिका बेसुध हुई सोई थी। उसने पीले रंग की स्कर्ट पहन रखी थी और अपनी एक टांग मोड़े करवट लिए सोई थी। स्कर्ट थोड़ी सी ऊपर उठी थी। उसकी पतली सी पेंटी में फ़सी उसकी चूत का चीरा तो साफ़ नजर आ रहा था। पेंटी उसकी चूत की दरार में घुसी हुई थी और चूत के छेद वाली जगह गीली हुई थी। उसकी गोरी गोरी मोटी जांघें देख कर तो मेरा जी करने लगा कि अभी उसकी कुलबुलाती चूत में अपना लंड डाल ही दूँ।

मैं उसके पास बैठ गया। और उसकी जाँघों पर हाथ फेरने लगा। वाह.. क्या मस्त मुलायम संग-ए-मरमर सी नाज़ुक जांघें थी। मैंने धीरे से पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर अंगुली फिराई। वो तो पहले से ही गीली थी। आह … मेरी अंगुली भी भीग सी गई। मैंने उस अंगुली को पहले अपनी नाक से सूंघा। वाह क्या मादक महक थी। कच्चे नारियल जैसी जवान चूत के रस की मादक महक तो मुझे अन्दर तक मस्त कर गई। मैंने अंगुली को अपने मुंह में ले लिया। कुछ खट्टा और नमकीन सा लिजलिजा सा वो रस तो बड़ा ही मजेदार था।

मैं अपने आप को कैसे रोक पाता। मैंने एक चुम्बन उसकी जाँघों पर ले ही लिया। वो थोडा सा कुनमुनाई पर जगी नहीं। अब मैंने उसके उरोज देखे। वह क्या गोल गोल अमरुद थे। मैंने कई बार उसे नहाते हुए नंगा देखा था। पहले तो इनका आकार नींबू जितना ही था पर अब तो संतरे नहीं तो अमरुद तो जरूर बन गए हैं। गोरे गोरे गाल चाँद की रोशनी में चमक रहे थे। मैंने एक चुम्बन उन पर भी ले लिया। मेरे होंठों का स्पर्श पाते ही कनिका जग गई और अपनी आँखों को मलते हुए उठ बैठी।

“क्या कर रहे हो भाई?” उसने उनिन्दी आँखों से मुझे घूरा।

“वो. वो… मैं तो प्यार कर रहा था ?”

“पर ऐसे कोई रात को प्यार करता है क्या ? “

“प्यार तो रात को ही किया जाता है ?” मैंने हिम्मत करके कह ही दिया।

उसके समझ में पता नहीं आया या नहीं। फिर मैंने कहा,”कनिका एक मजेदार खेल देखोगी ?”

“क्या ?” उसने हैरानी से मेरी और देखा।

“आओ मेरे साथ !” मैंने उसका बाजू पकड़ा और सीढ़ियों से नीचे ले आया और हम बिना कोई आवाज किये उसी खिड़की के पास आ गए। अन्दर का दृश्य देख कर तो कनिका की आँखें फटी की फटी ही रह गई। अगर मैंने जल्दी से उसका मुंह अपनी हथेली से नहीं ढक दिया होता तो उसकी चीख ही निकल जाती। मैंने उसे इशारे से चुप रहने को कहा। वो हैरान हुई अन्दर देखने लगी।

मामी घोड़ी बनी फर्श पर खड़ी थी और अपने हाथ बेड पर रखे थे। उनका सिर बेड पर था और नितम्ब हवा में थे। मामा उसके पीछे उसकी कमर पकड़ कर धक्के लगा रहे थे। उन 8 इंच का लंड मामी की गांड में ऐसे जा रहा था जैसे कोई पिस्टन अन्दर बाहर आ जा रहा हो। मामा उनके नितम्बों पर थपकी लगा रहे थे। जैसे ही वो थपकी लगाते तो नितम्ब हिलने लगते और उसके साथ ही मामी की सीत्कार निकलती,”हाईई और जोर से मेरे राजा और जोर से आज सारी कसर निकाल लो और जोर से मारो मेरी गांड बहुत प्यासी है ये हाईई …”

“ले मेरी रानी और जोर से ले … या … सऽ विऽ ता… आ.. आ ……” मामा के धक्के तेज होने लगे और वो भी जोर जोर से चिलाने लगे।

पता नहीं मामा कितनी देर से मामी की गांड मार रहे थे। फिर मामा मामी से जोर से चिपक गए। मामी थोड़ी सी ऊपर उठी। उनके पपीते जैसे स्तन नीचे लटके झूल रहे थे। उनकी आँखें बंद थी। और वह सीत्कार किये जा रही थी,”जियो मेरे राजा मज़ा आ गया !”

मैंने धीरे धीरे कनिका के वक्ष मसलने शुरू कर दिए। वो तो अपने मम्मी पापा की इस अनोखी रासलीला देख कर मस्त ही हो गई थी। मैंने एक हाथ उसकी पेंटी में भी डाल दिया। उफ़ … छोटे छोटे झांटों से ढकी उसकी बुर तो कमाल की थी। नीम गीली। मैंने धीरे से एक अंगुली से उसके नर्म नाज़ुक छेद को टटोला। वो तो चुदाई देखने में इतनी मस्त थी कि उसे तो तब ध्यान आया जब मैंने गच्च से अपनी अंगुली उसकी बुर के छेद में पूरी घुसा दी।

“उईई माँ ….” उसके मुंह से हौले से निकला। “ओह … भाई ये क्या कर रहे हो ?” उसने मेरी ओर देखा। उसकी आँखें बोझिल सी थी और उनमें लाल डोरे तैर रहे था। मैंने उसे बाहों में भर लिया और उसके होंठों को चूम लिया।

हम दोनों ने देखा कि एक पुच्क्क की आवाज के साथ मामा का लंड फिसल कर बाहर आ गया और मामी बेड पर लुढ़क गई। अब वहाँ रुकने का कोई मतलब नहीं रह गया था। हम एक दूसरे की बाहों में सिमटे वापस छत पर आ गए।

“कनिका ? “

“हाँ… भाई ?”

कनिका के होंठ और जबान कांप रही थी। उसकी आँखों में एक नई चमक थी। आज से पहले मैंने कभी उसकी आँखों में ऐसी चमक नहीं देखी थी। मैंने फिर उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठ चूसने लगा। उसने भी बेतहाशा मुझे चूमना शुरू कर दिया। मैंने धीरे धीरे उसके स्तन भी मसलने चालू कर दिए। जब मैंने उसकी पेंटी पर हाथ फिराया तो उसने मेरा हाथ पकड़ते कहा,”नहीं भाई… इस से आगे नहीं !”

“क्यों क्या हुआ ? “

“मैं रिश्ते में तुम्हारी बहन लगती हूँ, भले ही ममेरी ही हूँ पर आखिर हूँ तो बहन ही ना ? और भाई और बहन में ऐसा नहीं होना चाहिए !”

“अरे तुम किस ज़माने की बात कर रही हो ? लंड और चूत का रिश्ता तो कुदरत ने बनाया है। लंड और चूत का सिर्फ एक ही रिश्ता होता है और वो है चुदाई का। ये तो केवल तथाकथित सभ्य कहे जाने वाले समाज और धर्म के ठेकेदारों का बनाया हुआ ढकोसला (प्रपंच) है। असल में देखा जाए तो ये सारी कायनात ही इस प्रेम रस में डूबी है जिसे लोग चुदाई कहते हैं।” मैं एक ही सांस में कह गया।

“पर फिर भी इंसान और जानवरों में फर्क तो होता है ना ?”

“जब चूत की किस्मत में चुदना ही लिखा है तो फिर लंड किसका है इससे क्या फर्क पड़ता है ? तुम नहीं जानती कनिका तुम्हारा ये जो बाप है अपनी बहन, भाभी, साली और सलहज सभी को चोद चुका है और ये तुम्हारी मम्मी भी कम नहीं है। अपने देवर, जेठ, ससुर, भाई और जीजा से ना जाने कितनी बार चुद चुकी है और गांड भी मरवा चुकी है ?”

कनिका मेरी ओर मुंह बाए देखे जा रही थी। उसे ये सब सुनकर बड़ी हैरानी हो रही थी ” नहीं भाई तुम झूठ बोल रहे हो ? “

“देखो मेरी बहना तुम चाहे कुछ भी समझो ये जो तुम्हारा बाप है ना वो तो तुम्हें भी भोगने के चक्कर में है ? मैंने अपने कानों से सुना है !”

“क … क्या … ?” उसे तो जैसे मेरी बातों पर यकीन ही नहीं हुआ। मैंने उसे सारी बातें बता दी जो। आज मामा मामी से कह रहे थे। उसके मुंह से तो बस इतना ही निकला “ओह… नोऽऽ ?”

“बोलो … तुम क्या चाहती हो अपनी मर्जी से प्यार से तुम अपना सब कुछ मुझे सौंप देना चाहोगी या फिर उस 45 साल के अपने खडूश और ठरकी बाप से अपनी चूत और गांड की सील तुड़वाना चाहती हो … बोलो ?”

“मेरी समझ में तो कुछ नहीं आ रहा है ?”

“अच्छा एक बात बताओ ?”

“क्या ?”

“क्या तुम शादी के बाद नहीं चुदवाओगी ? या सारी उम्र अपनी चूत नहीं मरवाओगी ?”

“नहीं पर ये सब तो शादी के बाद की बात होती है ?”

“अरे मेरी भोली बहना ! ये तो खाली लाइसेंस लेने वाली बात है। शादी विवाह तो चुदाई जैसे महान काम को शुरू करने का उत्सव है। असल में शादी का मतलब तो बस चुदाई ही होता है !”

“पर मैंने सुना है कि पहली बार में बहुत दर्द होता है और खून भी निकलता है ? “

“अरे तुम उसकी चिंता मत करो ! मैं बड़े आराम से करूँगा ! देखना तुम्हें बड़ा मज़ा आएगा !”

“पर तुम गांड तो नहीं मारोगे ना ? पापा की तरह ?”

“अरे मेरी जान पहले चूत तो मरवा लो ! गांड का बाद में सोचेंगे !” और मैंने फिर उसे बाहों में भर लिया।

उसने भी मेरे होंठों को अपने मुंह में भर लिया। वह क्या मुलायम होंठ थे, जैसे संतरे की नर्म नाज़ुक फांकें हों। कितनी ही देर हम आपस में गुंथे एक दूसरे को चूमते रहे। अब मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर फिराना चालू कर दिया। उसने भी मेरे लंड को कस कर हाथ में पकड़ लिया और सहलाने लगी। लंड महाराज तो ठुमके ही लगाने लगे। मैंने जब उसके उरोज दबाये तो उसके मुंह से सीत्कार निकालने लगी। “ओह…। भाई कुछ करो ना ? पता नहीं मुझे कुछ हो रहा है !”

उत्तेजना के मारे उसका शरीर कांपने लगा था साँसें तेज होने लगी थी। इस नए अहसास और रोमांच से उसके शरीर के रोएँ खड़े हो गए थे। उसने कस कर मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया।

अब देर करना ठीक नहीं था। मैंने उसकी स्कर्ट और टॉप उतार दिए। उसने ब्रा तो पहनी ही नहीं थी। छोटे छोटे दो अमरुद मेरी आँखों के सामने थे। गोरे रंग के दो रस कूप जिनका एरोला कोई एक रुपये के सिक्के जितना और निप्पल्स तो कोई मूंग के दाने जितने बिलकुल गुलाबी रंग के। मैंने तड़ से एक चुम्बन उसके उरोज पर ले लिया। अब मेरा ध्यान उसकी पतली कमर और गहरी नाभि पर गया।

जैसे ही मैंने अपना हाथ उसकी पेंटी की ओर बढ़ाया तो उसने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा,”भाई तुम भी तो अपने कपड़े उतारो ना ?”

“ओह… हाँ ?”

मैंने एक ही झटके में अपना नाईट सूट उतार फेंका। मैंने चड्डी और बनियान तो पहनी ही नहीं थी। मेरा 7 इंच का लंड 120 डिग्री पर खड़ा था। लोहे की रॉड की तरह बिलकुल सख्त। उस पर प्री-कम की बूँद चाँद की रोशनी में ऐसे चमक रही थी जैसे शबनम की बूँद हो या कोई मोती।

“कनिका इसे प्यार करो ना ?”

“कैसे ? “

“अरे बाबा इतना भी नहीं जानती? इसे मुंह में लेकर चूसो ना ?”

“मुझे शर्म आती है ?”

मैं तो दिलो जान से इस अदा पर फ़िदा ही हो गया। उसने अपनी निगाहें झुका ली पर मैंने देखा था कि कनखियों से वो अभी भी मेरे तप्त लंड को ही देखे जा रही थी बिना पलकें झपकाए।

मैंने कहा,”चलो, मैं तुम्हारी बुर को पहले प्यार कर देता हूँ फिर तुम इसे प्यार कर लेना ?”

“ठीक है !” भला अब वो मना कैसे कर सकती थी।

और फिर मैंने धीरे से उसकी पेंटी को नीचे खिसकाया :

गहरी नाभि के नीचे हल्का सा उभरा हुआ पेडू और उसके नीचे रेशम से मुलायम छोटे छोटे बाल नजर आने लगे। मेरे दिल की धड़कने बढ़ने लगी। मेरा लंड तो सलामी ही बजाने लगा। एक बार तो मुझे लगा कि मैं बिना कुछ किये-धरे ही झड़ जाऊँगा। उसकी चूत की फांकें तो कमाल की थी। मोटी मोटी संतरे की फांकों की तरह। गुलाबी चट्ट। दोनों आपस में चिपकी हुई। मैंने पेंटी को निकाल फेंका। जैसे ही मैंने उसकी जाँघों पर हाथ फिराया तो वो सीत्कार करने लगी और अपनी जांघें कस कर भींच ली।

मैं जानता था कि यह उत्तेजना और रोमांच के कारण है। मैंने धीरे से अपनी अंगुली उसकी बुर की फांकों पर फिराई। वो तो मस्त ही हो गई। मैंने अपनी अंगुली ऊपर से नीचे और फिर नीचे से ऊपर फिराई। 3-4 बार ऐसा करने से उसकी जांघें अपने आप चौड़ी होती चली गई। अब मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी बुर की दोनों फांकों को चौड़ा किया। एक हलकी सी पुट की आवाज के साथ उसकी चूत की फांकें खुल गई।

आह. अन्दर से बिलकुल लाल चुर्ट। जैसे किसी पके तरबूज की गिरी हो। मैं अपने आप को कैसे रोक पाता। मैंने अपने जलते होंठ उन पर रख दिए। आह … नमकीन सा नारियल पानी सा खट्टा सा स्वाद मेरी जबान पर लगा और मेरी नाक में जवान जिस्म की एक मादक महक भर गई। मैंने अपनी जीभ को थोड़ा सा नुकीला बनाया और उसके छोटे से टींट (मदनमणि) पर टिका दिया। उसकी तो एक किलकारी ही निकल गई। अब मैंने ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर जीभ फिरानी चालू कर दी। उसने कस कर मेरे सिर के बालों को पकड़ लिया। वो तो सीत्कार पर सीत्कार किये जा रही थी।

बुर के छेद के नीचे उसकी गांड का सुनहरा छेद उसके कामरज से पहले से ही गीला हो चुका था। अब तो वो भी खुलने और बंद होने लगा था। कनिका आंह … उन्ह … कर रही थी। ऊईई … मा..आ… एक मीठी सी सीत्कार निकल ही गई उसके मुंह से।

अब मैंने उसकी बुर को पूरा मुंह में ले लिया और जोर की चुस्की लगाई। अभी तो मुझे 2 मिनट भी नहीं हुए होंगे कि उसका शरीर अकड़ने लगा और उसने अपने पैर ऊपर करके मेरी गर्दन के गिर्द लपेट लिए और मेरे बालों को कस कर पकड़ लिया। इतने में ही उसकी चूत से काम रस की कोई 4-5 बूँदें निकल कर मेरे मुंह में समां गई। आह क्या रसीला स्वाद था। मैंने तो इस रस को पहली बार चखा था। मैं उसे पूरा का पूरा पी गया।

अब उसकी पकड़ कुछ ढीली हो गई थी। पैर अपने आप नीचे आ गए। 2-3 चुस्कियां लेने के बाद मैंने उसके एक उरोज को मुंह में ले लिया और चूसना चालू कर दिया। शायद उसे इन उरोजों को चुसवाना अच्छा नहीं लगा था। उसने मेरा सिर एक और धकेला और झट से मेरे खड़े लंड को अपने मुंह में ले लिया। मैं तो कब से यही चाह रहा था। उसने पहले सुपाड़े पर आई प्री कम की बूँदें चाटी और फिर सुपाड़े को मुंह में भर कर चूसने लगी जैसे कोई रस भरी कुल्फी हो।

आह … आज किसी ने पहली बार मेरे लंड को ढंग से मुंह में लिया था। कनिका ने तो कमाल ही कर दिया। उसने मेरा लंड पूरा मुंह में भरने की कोशिश की पर भला सात इंच लम्बा लंड उसके छोटे से मुंह में पूरा कैसे जाता।

मैं चित्त लेटा था और वो उकडू सी हुई मेरे लंड को चूसे जा रही थी। मेरी नजर उसकी चूत की फांकों पर दौड़ गई। हलके हलके बालों से लदी चूत तो कमाल की थी। मैंने कई ब्लू फिल्मों में देखा था की चूत के अन्दर के होंठों की फांके 1.5 या 2 इंच तक लम्बी होती हैं पर कनिका की तो बस छोटी छोटी सी थी। बिलकुल लाल और गुलाबी रंगत लिए। मामी की तो बिलकुल काली काली थी। पता नहीं मामा उन काली काली फांकों को कैसे चूसते हैं।

मैंने कनिका की चूत पर हाथ फिराना चालू कर दिया। वो तो मस्त हुई मेरे लंड को बिना रुके चूसे जा रही थी। मुझे लगा अगर जल्दी ही मैंने उसे मना नहीं किया तो मेरा पानी उसके मुंह में ही निकल जाएगा और मैं आज की रात बिना चूत मारे ही रह जाऊँगा। मैं ऐसा हरगिज नहीं चाहता था।

मैंने उसकी चूत में अपनी अंगुली जोर से डाल दी। वो थोड़ी सी चिहुंकी और मेरे लंड को छोड़ कर एक और लुढ़क गई।

वो चित्त लेट गई थी। अब मैं उसके ऊपर आ गया और उसके होंठों को चूमने लगा। एक हाथ से उसके उरोज मसलने चालू कर दिए और एक हाथ से उसकी चूत की फांकों को मसलने लगा। उसने भी मेरे लंड को मसलना चालू कर दिया। अब लोहा पूरी तरह गर्म हो चुका था और हथोड़ा मारने का समय आ गया था। मैंने अपने उफनते हुए लंड को उसकी चूत के मुहाने पर रख दिया। अब मैंने उसे अपने बाहों में जकड़ लिया और उसके गाल चूमने लगा। एक हाथ से उसकी कमर पकड़ ली। इतने में मेरे लंड ने एक ठुमका लगाया और वो फिसल कर ऊपर खिसक गया।

कनिका की हंसी निकल गई।

मैंने दुबारा अपने लंड को उसकी चूत पर सेट किया और उसके कमर पकड़ कर एक जोर का धक्का लगा दिया। मेरा लंड उसके थूक से पूरा गीला हो चुका था और पिछले आधे घंटे से उसकी चूत ने भी बेतहाशा कामरज बहाया था। मेरा आधा लंड उसकी कुंवारी चूत की सील को तोड़ता हुआ अन्दर घुस गया।

इसके साथ ही कनिका की एक चीख हवा में गूंज गई। मैंने झट से उसका मुंह दबा दिया नहीं तो उसकी चीख नीचे तक चली जाती।

कोई 2-3 मिनट तक हम बिना कोई हरकत किये ऐसे ही पड़े रहे। वो नीचे पड़ी कुनमुना रही थी। अपने हाथ पैर पटक रही थी पर मैंने उसकी कमर पकड़ रखी थी इस लिए मेरा लंड बाहर निकालने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता था। मुझे भी अपने लंड के सुपाड़े के नीचे जहां धागा होता है जलन सी महसूस हुई। ये तो मुझे बाद में पता चला कि उसकी चूत की सील के साथ मेरे लंड की भी सील (धागा) टूट गई है। चलो अच्छा है अब आगे का रास्ता दोनों के लिए ही साफ़ हो गया है। हम दोनों को ही दर्द हो रहा था। पर इस नए स्वाद के आगे ये दर्द भला क्या माने रखता था।

“ओह … भाई मैं तो मर गई रे ….” कनिका के मुंह से निकला “ओह … बाहर निकालो मैं मर जाउंगी !”

“अरे मेरी बहना रानी ! बस अब जो होना था हो गया है। अब दर्द नहीं बस मजा ही मजा आएगा। तुम डरो नहीं ये दर्द तो बस 2-3 मिनट का और है उसके बाद तो बस जन्नत का ही मजा है !”

“ओह. नहीं प्लीज. बाहर… निका … लो … ओह… या… आ…. उन्ह … या…”

मैं जानता था उसका दर्द अब कम होने लगा है और उसे भी मजा आने लगा है। मैंने हौले से एक धक्का लगाया तो उसने भी अपनी चूत को अन्दर से सिकोड़ा। मेरा लंड तो निहाल ही हो गया जैसे। अब तो हालत यह थी कि कनिका नीचे से धक्के लगा रही थी। अब तो मेरा लंड उसकी चूत में बिना किसी रुकावट अन्दर बाहर हो रहा था। उसके कामरज और सील टूटने से निकले खून से सना मेरा लंड तो लाल और गुलाबी सा हो गया था।

“उईई . मा .. आह .. मजा आ रहा है भाई तेज करो ना .. आह ओर तेज या …” कनिका मस्त हुई बड़बड़ा रही थी।

अब उसने अपने पैर ऊपर उठा कर मेरी कमर के गिर्द लपेट लिए थे। मैंने भी उसका सिर अपने हाथों में पकड़ कर अपने सीने से लगा लिया और धीरे धीरे धक्के लगाने लगा। जैसे ही मैं ऊपर उठता तो वो भी मेरे साथ ही थोड़ी सी ऊपर हो जाती और जब हम दोनों नीचे आते तो पहले उसके नितम्ब गद्दे पर टिकते और फिर गच्च से मेरा लंड उसकी चूत की गहराई में समां जाता। वो तो मस्त हुई आह उईई माँ. ही करती जा रही थी। एक बार उसका शरीर फिर अकड़ा और उसकी चूत ने फिर पानी छोड़ दिया। वो झड़ गई थी। आह ……। एक ठंडी सी आनंद की सीत्कार उसके मुंह से निकली तो लगा कि वो पूरी तरह मस्त और संतुष्ट हो गई है।

मैंने अपने धक्के लगाने चालू रखे। हमारी इस चुदाई को कोई 20 मिनिट तो जरूर हो ही गए थे। अब मुझे लगाने लगा कि मेरा लावा फूटने वाला है।

मैंने कनिका से कहा तो वो बोली,”कोई बात नहीं, अन्दर ही डाल दो अपना पानी ! मैं भी आज इस अमृत को अपनी कुंवारी चूत में लेकर निहाल होना चाहती हूँ !”

मैंने अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी और फिर गर्म गाढ़े रस की ना जाने कितनी पिचकारियाँ निकलती चली गई और उसकी चूत को लबा लब भरती चली गई। उसने मुझे कस कर पकड़ लिया। जैसे वो उस अमृत का एक भी कतरा इधर उधर नहीं जाने देना चाहती थी। मैं झड़ने के बाद भी उसके ऊपर ही लेटा रहा।

मैंने कहीं पढ़ा था कि आदमी को झड़ने के बाद 3-4 मिनट अपना लंड चूत में ही डाले रखना चाहिए इस से उसके लंड को फिर से नई ताकत मिल जाती है। और चूत में भी दर्द और सूजन नहीं आती।

थोड़ी देर बाद हम उठ कर बैठ गए। मैंने कनिका से पूछा,”कैसी लगी पहली चुदाई मेरी जान ?”

“ओह बहुत ही मजेदार थी मेरे भैया ?”

“अब भैया नहीं सैंया कहो मेरी जान ! “

“हाँ हाँ मेरे सैंया ! मेरे साजन ! मैं तो कब की इस अमृत की प्यासी थी। बस तुमने ही देर कर रखी थी !”

“क्या मतलब ?”

“ओह. तुम भी कितने लल्लू हो। तुम क्या सोचते हो मुझे कुछ नहीं पता ?”

“क्या मतलब ? ”

“मुझे सब पता है तुम मुझे नहाते हुए और मूतते हुए चुपके चुपके देखा करते हो और मेरा नाम ले ले कर मुट्ठ भी मारते हो ?”

“ओह … तुम भी ना … एक नंबर की चुद्दकड़ हो ?”

“क्यों ना बनूँ आखिर खानदान का असर मुझ पर भी आएगा ही ना ?” और उसने मेरी और आँख मार दी। और फिर आगे बोली “पर तुम्हें क्या हुआ मेरे भैया ?”

“चुप साली अब भी भैया बोलती है ! अब तो मैं दिन में ही तुम्हारा भैया रहूँगा रात में तो मैं तुम्हारा सैंया और तुम मेरी सजनी बनोगी !” और फिर मैंने एक बार उसे अपनी बाहों में भर लिया। उसे भला क्या ऐतराज हो सकता था।
Published: By: Nirmala - 03:13

Hindi sex stories रीतु दीदी

 

            Hindi sex stories रीतु दीदी 


 

 

येह घतना कैए साल पहले कि है जब मेरि उमर 19-20 साल कि थि और मैन BA मेन पधता था। मैन देखने मेन गोरा चित्ता खूबसूरत इनसान था। मेरि लमबै 5 फ़ीत 11 इनच थि और मेरा शरीर हत्ता कत्ता था। मैन होसकेय तेअम का सपतैन था और रोज़ सविम्मिनग भि करता था। मेरा बदन अथलेते के बदन जैसा था।


मेरे पदोस मेन एक सोलोनेल सहब अपने परिवार के साथ रहते थे। परिवार मेन वोह सवयम, उनकि पतनि और एक बेति थि। सोलोनेल सहब का नाम सोल।बलविनदेर सिनघ था उनकि उमर लगभग 54 साल कि होगि। उनकि पतनि का नाम नीतु था और वोह एक खूबसूरसत महिला थीन उमर लगभग 52 साल होगि पर देखने मेन 45-46 साल कि हि लगति थिन। उनकि जवन बेति का नाम रितु था और उमर करीब 27 साल कि थि। देखने मेन बहुत सुनदर। बदन एक दम धला हुआ । बदे बदे उभरे हुए मम्मे पतलि कमर और भरे हुए कुलहे। हर दरेस्स मेन बहुत जमति थीन। 27 साल कि हो जाने पर भि उनहोन ने शादि नहिन कि थि कयोन कि उनहोन्ने गरमेनतस बनाने का काम शुरू किया था और उनका बुसिनेस्स अच्चहा चल निकला था। कहते हैन कि विदेश मेन भि उनके गरमेनतस एक्सपोरत होते थे जिस्से उनकि अच्चहि इनसोमे हो रहि थि। उनके माता पिता भि उनके वयोपार मेन उनकि सहायता करते थे।

सुना था कि सोलोनेल सहब का परिवर बहुत हि बरोअद मिनेद था। किसि चीज़ से परहेज़ नहिन था। शराब उनके घर मेन सुना था कि सभि पीते हैन। सेक्स मेन भि लिबेरल थे। आए दिन उनके यहान परती होति थीन। या वोह लोग कहिन परती मेन जाते थे। सेक्स परतनेरस मेन भि अदला बदली होति थी जैसा कि लोगोन के मुनह से मैने सुना था।

हुम लोगोन का उनके यहन आना जाना कम हि था। तीज तयोहारोन मेन हुम लोग उनके यहान जाते थे या वोह आते थे।

उन दिनोन दशेहरा कि छुतियान थीन।मेरे पास कोइ काम धाम तो था नहिन कभि किसि दोसत के यहन कभि किसि और दोसत के यहन चला यहान चला जाया करता था।

उस दिन असमनजस मेन था कि किस के यहान जाउन। तभि मेरे कान मेन रितु दिदि कि आवाज़ सुनाई दि: विजय।

मैन उनके पास गया उनसे पूनछा कया आप ने बुलाया है। वोह बोलीन कि कया तुम इस समय खालि हो। अगर खालि हो तो मेरा एक काम कर दो।

मैन ने कहा मैन आज कल बिलकुल खालि हुन। काम बताइये।

वोह बोलीन लतेसत विदेओ सतोरेस को जानते हो? मैन ने कहा हान जानता हुन

वोह बोलीन। अभि उसका फोने आया था कि एक नया सद आया है उसे मनगवा लीजिये। मेरे यहान आज कोइ नहिन है अगर तुम ला सको तो ला दो।

मैन ने कहा येह कौनसि बदि बात है अभि ला देता हुन

रितु दिदि बोलीन उस्से बता देना कि मैन ने भेजा है वोह दे दे गा

मैन लतेसत विदेओ सतोरेस चला गया और उस्से बोला कि रिता जि ने भेजा है आपने अभि उनहेन फोने किया था।

उस ने कहा अभि देता हुन और अनदर जा कर एक सद लाकर मुझे दे दि। मैन सद ले कर रितु दिदि के पास गया और उनहेन वोह सद दे दि।

रितु दिदि बोलीन अगर तुम खालि हो तो आओ मोविए साथ बैथ कर देखेन

मैन ने कहा मैन तो बिलकुलहि खालि हुन चलिये आप के साअथ मोविए हि देख लून।

तव के सामने सोफ़ा पर हुम दोनोन बैथ गये। रितु दिदि ने सद लगा दि मोविए शुरू हो गैए।

मोविए कि शुरूआत ऐसी थि कि एक लदकि किसि लदके को फोने कर के बुलाति है । लदका लदकि के घर आता है। आ कर सल्ल बेल्ल बजाता है। लदकि दरवाज़ा खोलति है और दोनोन एक दूसरे को बाहोन मेन ले कर एक दूसरे का चुम्मा लेने लगते हैन। फिर लदकि लदके कि कमीज़ उतारती है और लदका लदकि का बलौसे।फिर धीरे धीरे दोनोन एक दूसरे के कपदे उतार के बिलकुल ननगे हो जाजे हैन।

फिर लदका लदकि को पीथ के बल लिताल कर उसकि चूचियोन के निप्पलेस एक एक कर के चूसता है लदकि मुनह से आअह आआह आह आह करने लगति है फिर लदकि लदके से चोदने को कहति है लदका अपना खदा लुनद उसकि बुर मेन धीरे धीरे दालता है और फिर चुदै करने लगता है।

रितु दिदि ने मुझ से पूनछा बताओ येह दोनोन लदके लदकि कया कर रहे हैन?

मैन चुप रहा रितु दिदि मुझ से उमर मेन काफ़ि बदि थीन।

वोह बोली बताओ ना। मैन्ने कहा दोनोन चुदै कर रहे हैन।

रितु दिदि ने मुझ से पूनछा कया तुम भि चुदै कर चुके हो?

मैन ने कहा मेरि कोइ लदकि दोसत हि नहिन है फिर किसके साथ चुदाई करता?

रितु दिदि ने पूनछा फिर तुमहेन येह सब कैसे मालूम हुअ?

मैन ने बताया कि मेरा एक दोसत रमु है वोहि हिनदि कि गनदि गनदि किताबेन ला कर देता है। उसि मेन येह सब लिखा होता है।

वोह किताबेन पधने मेन बदा मज़ा आता है। पधते पधते लुनद खदा हो जाता है फिर अपना लुनद निकाल लेता हुन ।किताब फधता जाता हुन और लुनद को एक हाथ से पकद कर मुत्तहि मारता जाता हुन। थोदि देर मेन झद जाता हुन। रितु दिदि सचमुच बहुत मज़ा आता है।

रमु क्सक्सक्स विदेओ भि लाता है जब उसका घर खालि होता है तब हुम दोनोन वहिन बैथ कर क्सक्सक्स मोविएस भि देखते हैन।

रितु दिदि ने पूनछा कि बिना लदकि के तुम लोगोन को कया मज़ा आता होगा ?

मैन ने कहा कि हुम लोग बिना लदकि के भि खूब मज़ा लेते है।

रितु दिदि ने पूनछा कैसे?

मैने उनहेन बतया कि हुन दोनोन ननगे हो कर एक दूसरे कि गानद मारते हैन।

रितु दिदि ने पूनछा गानद कैसे मारते हो?

मैने बतया कि जैसे लदका लदकि कि बुर मेन अपना लुनद दाल कर अनदर बाहर करता है वैसे हि हुम लदके गानद मेन लुनद घुसेद कर अनदर बाहर करते हैन और गानद मेन हि झद जाते हैन।

रितु दिदि बोलीन अच्चहा कया इस मेन मज़ा आता है?

मैन ने बतया कि बहुत मज़ा आता है।

रितु दिदि ने पूनछा कि गानद मारने मेन ज़यदा मज़ा आता है कि गानद मराने मेन?

मैने कहा कि दोनोन मेन। शुरू शुरू मेन गानद मराने मेन दरद होता है पर कुछ बार गानद मराने के बाद गानद खुल जाति है तो फिर गानद मराने मेन भि उतना हि मज़ा आने लगता है जितना कि गानद मारने मेन। कुछ लोगोन को तो इनतना मज़ा आने लगता है कि वोह तो गानदू हो जाते हैन और गानद मारने कि जगह गानद मराना हि पसनद करने लगते हैन।

मैन ने उनहेन बताया कि गानद मारने मराने के अलावा हुम लोग कभि कभि 69 कि सथिति मेन लेत कर एक दूसरे का लुनद भि चूसते हैन या एक दूसरे का लुनद पकद कर सदका मारते हैन।

मैन ने रितु दिदि से पूनछा “ आप ने कभि अपनि गानद नहिन मरवाई”/

वोह हनसने लगीन। बोलीन कि दो एक बार मरवाई थि पर दरद बहुत हुआ मज़ा कोइ खास नहिन आया।

रितु दिदि ने फिर पूनछा कि कया तुमने किसि लदकि या औरत को ननगा देखा है? जैसे अपनि मा, बहेन, भभि, मौसि , नौकरनि को नहाते या कपदे बदलते?

मैने कहा कि नहिन तो वोह बोलीन मुझे ननगा देखो गे?

मैन ने कहा अगर आप दिखाएनगि तो ज़रूर देखूनगा।

वोह बोलीन कि एक शरत पर

मैन ने पूनछा वोह कया?

वोह बोलीन पहले तुमहेन ननगा होना पदेगा।

येह सुनकर मैन चुप चाप खदा रहा।

रितु दिदि बोलीन उतारो अपने सब कपदे।

मैन ने कहा कि मुझे शरम लग रही है। आज तक मैन किसि लदकि या औरत के सामने ननगा नहिन हुआ हुन।

वोह बोली मैन लदकि हो कर तुमहारे सामने ननगि होने को तैययर हुन और तुम लदके हो कर शरमा रहे हो?

रितु दिदि ने जब फिर कहा कपदे उतारने को तब मैन ने एक एक कर कपदे उतारने शुरू किये। पहले कमीज़ फिर पनत फिर बनियन उसके बाद मैन रुक गया। रितु दिदि बोली उतारो ना अपना उनदेरवेअर। फिर मैन ने आनखेन बनद करके उनदेरवेअर उतार हि दिया। मेरा लुनद बिलकुल तना हुआ खदा था।

रितु दिदि आगे बधिन और उनहोन ने मेरा लुनद हाथ मेन लेकर कहा कि तुमहारा लुनद तो अच्चहा खासा लमबा और मोता है। रितु दिदि ने पूनछा “मुझे चोदो गे?”

मैन ने कहा अगर आप चुदवाएनगी तो कयोन नहिन चोदूनगा। मगर पहले आप ननगि तो होइये।

वोह बोली चलो मेरे बेदरूम मेन। वोह आगे आगे चलीन मैन उनके पीछे पीछे।

बेदरूम पहुनच के वोह बोली अब मैन भि ननगि हो जाति हुन। फिर उनहोन ने एक एक कर अपने सब कपदे उतार दिये। पहले बलौसे फिर सलसकस फिर बरस्सिएरे और उसके बाद अपनि पनती। उनकि झानतेन कालि कालि और खूब बदि बदि थीन।

मैन अब तक काफ़ि खुल गया था रितु दिदि से। मैन ने उनसे पूनछा “आप अपनि झानतेन साफ़ नहिन करति हैन?”

वोह बोलीन कभि कभि करति हुन पर इधर समया हि नहिन मिल पाया। किसि दिन साफ़ कर लून गि।

मैन्ने कहा आज मैन पहलि बार किसि लदकि को ननगा देख रहा हुन और आप कि झानतेन आप पर बहुत हि अच्चहि लग रहिन हैन। इस्से आप कि खूबसूरति और भि बध गैए।

रितु दिदि कि चूचियन भि बदि बदि थीन और कसि हुई और गुलाबि निप्पलेस भि उनकि शोभा बधा रहे थे।

रितु दिदि ने पूनछा मैन ननगि कैसी लगि?

मैन ने कहा जैसा मैन समझता था उस्से खैन ज़यादा खूबसूरत।

रितु दिदि मुसकुराईन और बोलीन आओ अब चोदो मुझे।

उनहोन ने कहा कि चोदने से पहले मेरा चुम्मा लो फिर मेरि चूचियान एक एक कर चूसो फिर मेरि चूत चातो और जीभ से मेरि सलित सहलाओ उसके बाद चूत मेन लुनद दाल के चोदो।

वोह बोली “तुमने किसि लदकि कि चूत तो देखि नहिन होगि आओ पहले तुमहेन अपनि चूत और सलित दिखा देन।

फिर रितु दिदि ने अपनि तानगेन फैला कर अपने भगोशथ फैलाये और बतने लगेन कि येह बुर है येह सलित है।

फिर वोह लेत गैएन और मैन ने उनहेन चिपका कर उनके गालोन का चुम्मा लिया फिर उनकि चूनचियोन के निप्पलेस चूसने लगा। वोह सिसकारियान ले रहिन थीन फिर उनहोन ने मेरा लुनद पकद लिया और सहलाने लगीन। मेरा लुनद पहलि बार ज़िनदगि मेन किसि लदकि ने पकदा था और उनके सहलाने से मैन झदने कि हालत मेन आ गया। उनसे कहा तो बोलीन कि बगल मेन बथरूम है वहिन अपना निकाल आओ। मैन सोम्मोदे मेन अपना वीरया गिरा कर और लुनद धो कर आ गया। मुझे बहुत हि शरम लगी पर रितु दिदि ने मेरा धानधस बनधाते हुए कहा घबरओ मत पहलि बार कैए लोग ऐसे हि बिना चोदे झद जाते हैन।फिर रितु दिदि ने मेरा लुनद अपनि मुत्तहि मेन लेकर आगे पीछे करने लगिन। मेरा लुनद फिर खदा हो गया अब रितु दिदि बोलीन कि आओ अब इसे मेरि बुर मेन दाल दो और मुझे चोदो।

वोह लेत गैएन और मैने अपना लुनद उनकि बुर मेन दाल दिया धीरे धीरे फिर मैन उनहेन चोदने लगा वोह भि मेरे धक्के के साथ धक्के लगा रहीन थीन और अपनि सलित भि मेरे बदन से रगद रहीन थे थोदि देर मेन वोह सिसकारियान लेने लगीन और वोह झद गैएन फिर मैने भि ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाये और थोदि हि देर मेन मैन भि झदने के निकत पहुनच गया। मैने रितु दिदि से पूनछा कि अनदर झदून कि बाहर। वोह बोली अनदर हि झद जाओ। फिर मैन उनकि बुर के अनदर हि झद गया और थोदि देर बुर मेन लुनद दाले लेता रहा। उसके बाद मैन ने लुनद निकाल लिया।

रितु दिदि ने पूनछा लदकि को चोदने मेन ज़यदा मज़ा आया कि लदके कि गानद मारने मेन?

मैन ने कहा कि आप को चोदने मेन।

रितु दिदि ने मेरा चुम्मा लिया और बोलीन तुमसे चुदवाना बदा अच्चहा लगा।

इसके बाद रितु दिदि ने कहा “एक काम करोगे?”

मैन ने कहा ज़रूर करूनगा।

वोह बोलीन; “मैन ने आज तक ना वसतव मेन ना मोविए मेन एक लदके को दूसरे लदके कि गानद मारते नहिन देखा है। कया तुम मुझे येह दिखा सकते हो?”

मैन ने कहा कि ऐसी मोविए तो मैन्ने भि नहिन देखि।

वोह बोली” कया तुम अपने दोसत रमु कि गानद मेरे सामने मार सकते हो? और अपनि गानद मेरे सामने रमु से मरवा सकते हो?”

मैन्ने कहा कि मुझे तो कोइ एत्राज़ नहिन है आप के सामने गानद मारने मेन या मरवाने मेन पर रमु से पूनछना पदेगा कि वोह इसके लिये तैययर होगा कि नहिन।

वोह बोलीन रमु से पूनछ के बताना। मगर कल हि येह सब करना है।

मैन ने पूनछा कि कल हि कयोन तो वोह बोलीन कि कल रात या परसोन सुबह तक उनके माता पिता लौत आयेनगे फिर येह सब नहिन हो पाएगा।

मैन ने कहा कि मान लीजिये रमु इस शरत पर तैययर हो जाये कि वोह भि आप को चोदेगा तब?

वोह बोलीन कि थीक है उस्से भि चुदवा लूनगि पर मैन तुम दोनोन को गानद मारते हुए देखना ज़रूर चाहूनगि।

मैन्ने पूनछा रितु दिदि येह बतैये कया आप ने किसि लदके को लदकि को चोदते या लदकि को चुदते हुए देखा है?

रितु दिदि बोलीन हान कैए बार। मेरि एक सहेलि है उसका बोय फ़रिएनद मेरा भि दोसत है। वोह अकसर जब मेरा घर या उसका घर खालि होता है तो मेरे सामने हि मेरि सहेलि को चोदता है और मुझे भि मेरि सहेलि के सामने हि चोदता है बरि बारि से।

रितु दिदि ने पूनछा कि तुमहरे रमु का लुनद कैसा है तुमहारे जैसा हि या उस्से बदा?

मैन ने बतया कि उसका लुनद तो मेरे लुनद से छोता है 5 इनच का होगा और पतला भि है।

रितु दिदि बोली अच्चहा उस्से पूनछ कर बताना।

मैन ने कहा शाम तक बता दूनगा। फिर मैन घर लौता आया।

शाम को रमु को सब कुछ जो रितु दिदि के साथ हुआ था उसे बताया।

वोह बोला यार मुझ से भि उसे चुदवा दो। मेरि जाने कब से उसे चोदने कि इच्चहा है पर कोइ तरकीब समझ मेन नहिन आई।

मैन ने बतया कि एक हि शरत पर वोह तुमसे चुदवाने को तैययर हो सकति हैन।

रमु ने पूनछा वोह कया?

शरत येह है कि रितु दिदि के सामने तुम मुझ से अपनि गानद मरवाओ और रितु दिदि के सामने हि मेरि गानद मारो।

रमु बोला येह तो मैन नहिन करूनगा।

मैन ने उसे बताया कि मैन तो रितु दिदि से सब बता चुका हुन कि हुम तुम दोनोन एक दूसरे कि गानद मारते हैन लुनद भि चूसते हैन और सदका भि मारते हैन।

रमु बोला जब उनहेन सब मालूम हि हो गया है तो थीक है। मैन भि उनके सामने तुम से अपनि गानद मरवा लूनगा और तुमहारी गानद भि मार दूनगा पर वोह मुझे चोदने को तो मिलजाएनगि।

मैन ने कहा कि उनहोन ने वादा किया है कि वोह तुम से भि चुदवा लेनगि।

रमु ने कहा कि जा कर हान कह दो कल कब उनके यहान चलना है?

मैन्ने कहा कि मैन उनसे पूनछ कर तुमहेन बता दूनगा।

शाम के सात बजे मैन रितु दिदि के यहान गया और उनहेन बता दिया कि रमु उसि शरत पर तैययर है कि आप को उस्से चुदवाना पदेगा।

रितु दिदि बोलीन थीक है।

मैन ने पूनछा रमु को कब बुलाउन। वोह बोलीन कि कल दिन मेन तीन बजे बुलओ। मगर तुम पहले आ जाना।

मैन ने कहा कि कल सुबह उसे बता दूनगा और मैन चलने लगा।

वोह बोलेन कि कया जलदि मेन हो। मैन ने कहा कि मुझे आज कल कोइ काम हि नहिन है।

रितु दिदि बोली कि तब तो थोदि देर और बैथो मैन भि खालि हि हुन और अकेलि बोरे हो रहि हुन।उनहोन ने पूछा कि तुम बीर पीते हो?

मैन ने कहा कभि कभि जब कोइ पिला देता है वैसे मेरे पास इतने पैसे कहान हैन कि बीर पी सकून।

उनहोन ने अनदर बुला कर बैथाया और बोलीन कि मैन बीर ले कर आति हुन।

फिर वोह अनदर गैएन और कुछ नमकीन रख गैएन और फिर अनदर जा कर बीर कि चिल्लेद बोतल और दो गिलास ले आईन।

फिर उनहोने बोतल खोलि और गिलासोन मेन दालि। और चीरस के बाद हुम दोनोन बीर धीरे धीरे पीने लगे

वोह बहुत सि बातेन करति रहिन और मुझ से पूनछति रहिन।

उनहोन ने येह भि पूनछा कि कल रमु तो मुझे चोदे गा और तुम कया करोगे?

मैन ने कहा कि क्सक्सक्स मोविएस मेन मैन 3-सोमे के बहुत से ससेनेस देखे हैन आप ने भि देखे होनगे।

उनहोन ने कहा कि देखे तो हैन पर कभि किया नहिन।

मैन ने कहा कि अगर आप राज़ि होनोन तो हुम लोग थरी-सोमे भि कर के देखेन। मैन आप कि बुर चोदून और रमु आप कि गानद मरे साथ हि साथ। बीर का तो कुछ नशा था हि वोह बोलीन थीक है मैन भि इसे त्री करून गि। रितु दिदि ने मुझे अपने पास खीनच कर मेरा चुम्मा दो तीन बार लिया और एक हाथ से मेरा लुनद दबाया। मैन ने भि एक बार चुम्मा लिया और एक हाथ से उनकि एक चूचि दबा दि।वोह हनसने लगीन और बोली कि तुम दो बजे तक ज़रूर आ जाना।

फिर मैन वहान से चला आया। लौत- ते समय मैन रमु के घर गया और उसे बता दिया कि रितु दिदि के घर 3 बजे ज़रूर पहुनच जाए। उस ने पूनछा कि तुम साथ नहिन चलोगे? मैन्ने कहा कि मैन अलग से पहुनच जाउनगा और मैन रितु दिदि के घर पर हि मिलूनगा।
Published: By: Nirmala - 03:09

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