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Tuesday, 12 March 2013

अपनी चाची अनीता

अपनी चाची अनीता


दोस्तो, मेरी पहली कहानी में मैंने अपनी अपनी चाची अनीता के साथ हुए हसीं लम्हों को सुनाया था ! इस कहानी मैं में आगे की बातें करने जा रहा हूँ।

अनीता चाची के साथ चुदाई समारोह अब रोज चलता था। मैं और चाची हमेशा साथ में खाना खाते थे। हम सबके सामने काफी गप्पें मारते थे। शायद मेरी छोटी चाची हेमा को कुछ शक हो गया था .. .

एक दिन डिनर के बाद मेरी दोनों चाचियाँ गप्पे हांक रही थीं ..

मैं पीछे छुप कर उनकी बात सुन रहा था।

हेमा: दीदी, मैं कुछ पूछूँ आपसे ?

अनीता: हाँ हेमा। पूछ ना !

हेमा: आजकल राज हमेशा आपके साथ ही रहता है, आपके कमरे में ही पढ़ता है और आप दोनों हमेशा इतने खुश रहते हैं, इसके पीछे कोई खास बात तो नहीं है?

अनीता: अरे नहीं हेमा ! वो राज को गणित में प्रोब्लम है और मुझे गणित आता है तो मैं उसे पढ़ा देती हूँ इसलिए वो मेरे कमरे में ही पढ़ता है और हम दोनों खुश रहते हैं तो इसमे बुरा क्या है?

हेमा: दीदी तब आप लोग लंच के बाद रोज दरवाजा क्यूँ बंद के पढ़ते हो?

अनीता: अरे हेमा वो तो ऐसे ही कि कोई तंग न करे !

हेमा: दीदी आप तो ऐसे जवाब दे रही हो जैसे कि मैं बच्ची हूँ, मुझे कुछ पता ही नहीं है।

अनीता: तू ऐसा क्यूँ बोले रही है ?

हेमा: मैंने एक दिन दरवाज़े पे कान लगा के आपकी पढ़ाई की कहानी सुनी थी ! मुझे सब पता है वहां कैसी गणित की पढ़ाई होती है !


अनीता:(मुस्कुराते हुए) अच्छा तो तुझे सब पता है ! तो ऐसा बोलो ना ! देखो सोनम दीदी को बोलना मत ! पर क्या करूँ, राज ने पता नहीं कैसे मुझे पटा लिया यह सब करने के लिए ! फिर मुझे अच्छा लगने लगा तो मैंने भी शर्म छोड़ दी। अब रात में पति जी से और दिन में राज से चुदवाती हूँ। बूर को अजब सी शान्ति मिलती है, राज का जवान लंड मेरी सारी प्यास बुझा देता है। तेरा रमेश तुझे अच्छे से चोदता है ना?

हेमा: अरे कहाँ दीदी ! आजकल वो काफी थके हुए आते हैं, कुछ भी नहीं करते, मैं तो भूल ही गई कि पिछली बार मैंने कब चुदवाया था ! इसलिए तो !

अनीता: अच्छा तो यह बात है ! तो तू चाहती है कि राज तुझे भी चोदे?

हेमा: चाहने से क्या होगा दीदी ! आप इतनी सेक्सी हो, आपको छोड़ के मुझे क्यूँ चोदेगा वो?

अनीता: (हँसते हुए) अरे तू तो काफी प्यासी लगती है .. अच्छा यह बता ! तेरे स्तन से दूध अभी भी आता होगा ना ?

हेमा: हाँ दीदी, दूध तो निकलता है और अब सोनू भी नहीं पीता .. सो भरा हुआ है ..

अनीता: तब तो राज तुझे जरूर चोदेगा .. उसे दूध पीने की बहुत इच्छा है .. राज, वो मुझसे बोलता है ! रुक जा मैं उसे कल हिंट दे दूँगी !

हेमा: दीदी पर कोई परेशानी तो नहीं हो जाएगी ना?

अनीता: अरे नहीं, कुछ नहीं होगा .. जा अब तू ! रमेश आएगा .. उससे अच्छे से प्यार कर .. उसे शक नहीं होने देना कि तेरा कहीं और का मन भी है .. .

फिर वो दोनों अपने-अपने कमरे में चली गई।

आज तो जैसे मैंने दुनिया की सबसे हसीं मूवी देखी थी .. दोनों चाचियाँ मेरे बारे में जो बात कर रही थी .. उससे मेरा लंड तो सलामी देने को तैयार था ..

दूसरे दिन जब मैंने हेमा चाची को देखा तो चाची मुझे दुनिया की सबसे हसीन औरत लगी .. मैंने उन्हें देख के हल्की सी मुस्कान दी .. चाची भी बड़े अंदाज़ से हँसी ..

लंच के बाद जब मैं अनीता चाची के पास गया तो .. आज चाची बेड पे लेटी हुई थी .. जैसे बीमार हो ..

मैं: चाची आपकी तबियत ठीक नहीं है क्या?

चाची: नहीं रे .. पता नहीं आज कुछ अच्छा नहीं लग रहा .. आज तुझे चोदने नहीं मिलेगा .. .

मैं: कोई बात नहीं चाची .. आप अच्छी हो जाओ पहले ..

अनीता: तुझे पता है .. हेमा चाची क्या समझती है .. कि मेरे से गणित पढ़ने आता है मेरे कमरे में .. तो आज वो बोल रही थी कि दीदी आपकी तबियत ठीक नहीं है .. यदि उसे कोई प्रॉब्लम है तो भेज देना मेरा पास .. मैं बता दूंगी .. अब तू चला जा हेमा के पास, नहीं तो उसे शक हो जाएगा ..

चाची को क्या पता था कि मुझे सब पता है .. उनके बीच क्या चल रहा है ..

मैं: चाची पर वहां जाकर मैं क्या करूँगा ..

चाची: अरे कुछ पूछ लेना गणित में.. और एक बात बोलूं ! तू जो रोज बोलता है चाची दूध नहीं है आपकी चूची में .. . हेमा की चूची भरी हुई है दूध से .. जा देख शायद तुझे पीने को मिल जाए ..

मैं: चाची आप तो मजाक कर रही हो .. हेमा चाची ऐसे थोड़े दे देगी अपना चूची निकाल के .. ठीक है, आप बोलती हो तो मैं जाता हूँ .. कुछ गणित से सम्बन्धित सवाल पूछ लूँगा ..

मन में तो मैंने सोच लिया था कि आज ही हेमा चाची की चूत का रस और चूची का दूध सब पी जाना है। मैं वहां से सीधा हेमा चाची के कमरे में गया ..

चाची ने जैसे ही दरवाजा खोला, मैं तो देखता ही रह गया .. चाची कुछ माल लग रही थी .. उन्होंने कोई नया सूट पहन रखा था ..

मैं: चाची क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ .. आपसे कुछ गणित के सवाल पूछने हैं .. वो अनीता चाची बीमार है ना ..

चाची: हाँ राज, मुझे दीदी ने बोला था .. मैं तेरा ही इन्तज़ार कर रही थी, आ ना .. .

मैं: चाची आप इस ड्रेस में बहुत खूबसूरत लग रही हो ..

चाची: तुझे अच्छा लगा ये ड्रेस? आज पहली बार पहनी है ..

मैं: हाँ चाची, आप ऐसे ही ड्रेस पहना करो .. आप पर बहुत अच्छी लगती हैं ..

चाची: चल आ बैठ ..! और बोल ! क्या चल रहा है तेरी जिन्दगी में? तू तो बस अनीता दीदी से ही बातें करता है .. मैं तेरी अच्छी चाची थोड़े ही हूँ !

मैं: नहीं चाची ऐसी कोई बात नहीं है .. आप भी बहुत अच्छी हो ..

बात करते करते चाची ने अपना दुपट्टा सरका दिया .. चाची के उभार अब छुपाये नहीं छुप रहे थे .. मैं भी अपने आप को रोक न सका .. चाची की चूचियों को देखने लगा .. चाची: मुझसे नज़रें भी नहीं मिला रहे हो .. क्या देख रहे हो नीचे?

मैं: चाची कुछ नहीं, सच्ची में आप भी बहुत अच्छी हो ..

चाची: तू मुझसे नजरें क्यूँ नहीं मिलाता .. क्या देख रहा है नीचे?

मैं: कुछ नहीं चाची ..

चाची: कहीं तू मेरे सीने को तो नहीं देख रहा ? .. बदमाश !

मैं : चाची आपके वक्ष इतने अच्छे और बड़े हैं कि मेरी नज़र ही नहीं हट रही है वहां से ..

चाची: अपनी चाची की चूची को ऐसे थोड़े देखते हैं .. ये तेरे छोटी बहिन को दूध पिलाने के लिए है .. .

मैं: चाची, सोनू तो अब बड़ी हो गई है ! आप उसे अभी भी दूध पिलाती हो?

चाची: नहीं ! अब सोनू नहीं पीती दूध !

मैं: चाची, आपकी चूची में दूध है क्या?

चाची: हाँ अभी भी दूध है .. इसलिए तो इतने बड़े हैं !

मैं: चाची मुझे प्यास लगी है ..

चाची: जा वहां पानी रखा है, पी ले ..

मैं: चाची, पानी नहीं दूध पीना है .. आपकी चूची का दूध ..

चाची: बदमाश ! कोई अपनी चाची का दूध पीता है भला ?

मैं: चाची यदि माँ का पी सकते हैं तो चाची का क्यूँ नहीं?

चाची: अरे माँ का बचपन में पी रहा था .. चाची का अब ?

मैं: चाची, पीने दो न .. आपके दूध का क़र्ज़ जरूर चुकाऊंगा ..

चाची:: अच्छा ठीक है पी ले .. काफी दिन से भरी हुई हैं .. खाली करने वाला कोई है नहीं ..

फिर चाची ने अपना कमीज़ उतार दिया .. अब चाची ब्रा में आ गई ..

चाची: आ जा राज ! मेरी गोद में आ .. तुझे अपने बच्चे की तरह पिलाऊंगी ..

मैंने चाची की गोद में सिर रख लिया .. चाची ने अपनी ब्रा उतारी .. और अपनी चूची को ख़ुद मेरे मुँह में डाल दिया .. लो राज पी लो .. अच्छे से पीना ..

उसके बाद में दूध का प्यासा चाची की दूध को मेमने की तरह पीने लगा .. कभी बाएं चूची से तो कभी दायें से ..

साथ में चूची सहला भी रहा था।

चाची: तू तो ऐसे पी रहा है जैसे जन्मों से प्यासा हो !

मैं: चाची आज अपने मुझे वो खुशी दी है कि मैं सदा आपका आभारी रहूँगा .. आप जो बोलोगी वो सब करूँगा ..

चाची: जो बोलूंगी वो करेगा ?

मैं: हाँ चाची आप एक बार बोल के तो देखो ..

चाची: अच्छा ठीक है .. सुन मेरे नीचे में ना काफी खुजली हो रही है .. ज़रा मेरी खुजली मिटा दे ना?

मैं: नीचे कहाँ चाची?

चाची: तू सब जानता है फिर क्यूँ पूछ रहा है?

मैं: बोलो ना चाची ! आपके मुँह से सुनना चाहता हूँ।

चाची: अच्छा, चल मेरी चूत में खुजली हो रही है .. मिटा दे ना .. .

मैं: चाची कैसे मिटा दूं? ऊँगली से या चाट के? या फिर लंड ही डाल दूं?

चाची: मुझे तो तीनों की खुजली हो रही है .. .

मैं: क्यूँ चाची, चाचा आजकल खुजली नहीं मिटा रहे हैं क्या?

चाची: नहीं रे ! वो आजकल काफी रूखे से रहते हैं, मेरी चूत का तो ख्याल नहीं है उनको ..

मैं: चाची, आपका बेटा आपकी चूत का ख्याल रखेगा .. .

चाची: अपनी अनीता चाची से भी ज्यादा ख्याल रखेगा ना .. . दीदी तो तेरे लंड की बहुत तारीफ करती हैं ..

मैं: आप लोग ये सब बातें भी करती हो ? मेरी चाचियाँ कितनी अच्छी हैं !

चाची: तुझे कौन ज्यादा अच्छी लगती हैं?

मैं: चाची अभी आपने अपना पूरा जलवा दिखाया कहाँ है?

चाची: अच्छा तो ये बात है, तो जितना जलवा देख चुके हो उसमे कौन ज्यादा अच्छा लगा?

मैं: चाची इसमें तो पूछने की कोई बात ही नहीं है .. अनीता चाची की चूची में अमृत तो है ही नहीं ! दूध तो आप ही पिला सकती हो .. तब इसमें आप ही न हुई रानी .. चाची अब आप आपने कुछ और जलवे भी दिखाओ ना !

चाची: हाँ बेटे तेरी चाची आज ऐसे जलवे दिखायेगी कि तू पागल हो जायेगा ..

और फिर चाची ने आपने कपड़े खोलने शुरु किये .. चाची जब पैंटी और ब्रा में आ गई तो मैं उनकी मदद करने लगा ..

मैं: चाची, लाओ अब मैं खोल दूं ! आप क्यूँ कर रही हो?

चाची: हाँ बेटा ! आओ अपनी चाची को नंगी कर दो ..

फिर चाची मेरे पास आ गई .. मैं चाची की ब्रा को खोल के प्यार से सूंघने लगा .. . चाची की मादक मुस्कराहट ने और भी मज़ा भर दिया .. फिर चाची की पैंटी को एक ही झटके में खोल दिया .. .पैंटी की मादक सुगंध मुझे दीवाना कर रही थी।

चाची: क्यूँ रे काफी मज़े ले रहे हो .. . कैसी लगी तुम्हे मेरी पैंटी की खुशबू .. .

मैं: चाची मैं तो अपने होश मैं ही नहीं हूँ ..

चाची: अरे कपड़े से तेरा ये हाल है तो फिर जब सही में मेरी चूत सूंघेगा तो तेरा क्या होगा .. .

फिर चाची अपने हाथ मेरी पैंट के उपर से लंड को सहलाने लगी .. . मेरी हालत भी ख़राब हो रही थी .. . मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं मैं झड़ ना जाऊँ. चाची ने देखते ही देखते मुझे पूरा नंगा कर दिया .. .अब कमरे में दो नंगे एक दूसरे से खेलने लगे .. चाची मेरे लंड से ऐसे खेल रही थी कि कोई बच्चा अपने सबसे मनपसंद खिलौने के साथ खेलता है ..

चाची: बेटा तेरा लंड तो तेरे चाचा जी से काफी बड़ा है रे .. तेरी पत्नी काफी खुश रहेगी ..

मैं: चाची मेरे लंड से ऐसे खेलोगी तो ये जल्दी ही ढीला हो जायेगा .. .

चाची: क्या करूँ बेटा ऐसे लंड मेरे हाथ में पहली बार आया है .. .

मैं: चाची आपको पता है बड़ी चाची तो इसे आइसक्रीम से भी अच्छा प्यार करती हैं .. .

चाची: वाह रे बदमाश ! अपनी चाची को लंड मुँह में लेने बोल रहा है .. .ये गरम आइसक्रीम सच में है तो मुँह में लेने के लिए ही ..

मैं: चाची तो ले लो ना इसे ..

फिर चाची प्यार से मेरे लंड को चूसने लगी .. . इतना तो पता चल ही गया था कि चाची को लंड चूसने में बहुत मज़ा आता है .. अनीता चाची ने इतने प्यार से कभी नहीं चूसा था .. फिर जब चाची मेरे लंड से खेल रही थी .. मैं चाची की चूची को मज़े देने लगा .. . इतनी मुलायम चूचियां को सहलाना, निचे लंड का चाची से चुसवाना .. सच्ची काफ़ी बढ़िया कॉम्बिनेशन है ..

मैं: चाची लंड चूसवाने में इतना मज़ा आज तक नहीं आया .. चाची मेरा मुँह भी रसपान के लिए तड़प रहा है, चाची उल्टा-पुल्टा करें .. .

चाची: उल्टा पुल्टा ये क्या होता है रे?

मैं: क्या चाची आप मुझसे पूछोगी तो कैसे चलेगा .. .अच्छा चलिए मैं बताता हूँ- उल्टा पुल्टा मतलब आप मेरे ऊपर रह कर मेरा लण्ड चूसना और मैं नीचे से आपकी चूत का रसपान करूँगा !

चाची: अच्छा तो तू ६९ पोज़िशन की बात कर रहा है .. अच्छा नाम है उल्टा पुल्टा .. चल इसमें तो और भी मज़ा आएगा ..

फिर हम ६९ में एक दूसरे से मज़े लेने लगे .. चाची की चूत का स्वाद आते ही मन चंगा तो आया था .. चाची की चूत काफी गीली हो गई थी .. . इसलिए चाटने में बहुत मज़ा आ रहा था .. मैं चाची को बहुत मन से चाट रहा था .. . चाची भी काफी उत्तेजित हो गई थी .. चाची ने अचानक इतना पानी निकाला कि मेरा मुँह उनके रस से भर गया था। .. ऐसा मज़ा हेमा चाची ने दिया कि बस मैं तो उनका दीवाना हो गया था ..

मैं: चाची आपके रस कितने स्वादिस्ट हैं .. चाची अब मेरा रस भी निकाल दो .. चाची अब मेरी लंड आपकी चूत के लिए और नहीं तड़प सकता ..

चाची : आ न बेटा, तूने तो आज अपनी चाची की एक दम रंडी बना दिया .. अब ऐसा चोद कि बस मैं पानी पानी हो जाऊँ ..

फिर चाची बिस्तर पे लेट गई .. अपनी चूत एकदम फाड़ के मुझे अपने तरफ बुलाने लगी .. चूत तो जैसे कि लंड के लिए बनी हो .. मैंने भी अपना लंड हाथ में लेकर चाची की चूत पर लगा दिया .. .

चाची: दे धक्का मेरे लाल .. . चोद अपनी चाची को .. चोद बेटा ..

मैं: ले चाची .. ये गया मेरा लंड आपकी चूत में .. चुद अपने बेटे से मेरी प्यारी चाची ..

फिर चाची गाण्ड उठा उठा कर मेरा लंड लेने लगी .. मैं भी चाची को जी जान लगा के चोदने लगा .. . फिर चाची ने कुतिया बन के मुझे कुत्ता बना दिया .. उस पोजिशन में बहुत मज़ा आया .. फिर चाची मेरे ऊपर सवार हो गई .. इसमें तो मेरा लंड सबसे ज्यादा अंदर तक जा रहा था .. करीब ३० मिनट के बाद मैं चाची की चूत में ही झड़ गया .. चाची ने बड़े प्यार से फिर मेरे लंड को साफ़ किया .. मुझे बेतहाशा किस कर रही थी .. चाची बहुत खुश थी .. मैं भी चाची की खुशी से खुश था ..

चाची: बेटा, चाची को चोदने में कैसा लगा .. अनीता चाची को चोदने में ज्यादा मज़ा आया था क्या?

मैं : नहीं चाची आप कुछ माल हो .. आपको चोदने में बहुत मज़ा आया .. मैं अब आप हो ही चोदूंगा ..

चाची: अरे नहीं बेटा ! दोनों चाचियों को चोदना .. अनीता दीदी भी बहुत अच्छी है उन्होंने ही तो मुझे तेरा लंड दिलाया

..तू उन्हें कभी नाराज़ न करना ..

फिर मैं दोनों चाचियों के साथ मस्ती कर करने लगा .. दोनों प्यार से मुझसे चुदती है ..

Published: By: Nirmala - 04:56

Thursday, 16 August 2012

नौकरानी

सोना कई वर्षों से घर में नौकरानी का काम करती थी। नीरजा और करण पति पत्नी थे और उनकी कोई सन्तान नहीं थी। करण का व्यवसाय अच्छा चल रहा था। नीरजा तो बस अपनी सहेलियों के साथ किटी पार्टी और दूसरे कामों में लगी रहती थी। उसका झुकाव करण के एक व्यवसायी मित्र आनन्द और मन्जीत की तरफ़ भी था। उनकी और नीरजा की मित्रता के कारण वो करण को अधिक समय नहीं दे पाती थी, रात्रि-मिलन भी कम ही हो पाता था। करण को उसके इन सम्बन्धों का पता था, ऐसे में कई महीनों से करण का झुकाव घर की नौकरानी सोना की तरफ़ हो चला था। उसका बदन तराशा हुआ था। वो दुबली पतली इकहरे बदन की थी, उसकी छातियाँ सुडौल और मांसल थी। बदन पर लुनाई थी। कसे बदन वाली सोना से करण कई बार प्रणय की कोशिश भी कर चुका था। पर सोना सब समझ कर भी उनसे दूर रहती थी। उसे पता था कि नीरजा को पता चलेगा तो उसकी जमी हुई नौकरी हाथ से चली जायेगी। सोना का दिल भी करण को चाहने लगा था।

सोना का पति एक बूढ़ा आदमी था जो लगभग 60 वर्ष का था, बीमार रहता था। पैसों का लालच देकर उसने कम उम्र सोना को ब्याह लिया था। पर उसके साथ शारिरिक सम्बन्ध ना के बराबर थे। नीरजा अक्सर उससे चुदाई की बातें पूछा करती थी। सोना निराशा से उसे बरसों पहले हुई अपने आदमी की चुदाई की बातें बताती थी, कि कैसे वो दारू पी कर उसके साथ चुदाई क्या बल्कि बलात्कार करता था। सोना जब उससे करण से चुदाई के बारे में पूछती तो वो नीरजा बहुत रंग में आकर उसे सेक्सी बातें बताया करती थी। सोना तो जैसे उसकी बातें सुन कर सपनो में खो जाया करती थी। नीरजा उसके चेहरे के उतार-चढ़ाव को देखती थी, उसके भावों को समझती थी।

एक दिन सोना को नीरजा ने बड़े प्यार से झटका दे दिया,"सोना, करण से चुदवायेगी ?"

सोना की आँखें फ़टी की फ़टी रह गई। उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि नीरजा क्या कह रही है।

"जी, क्या कहा आपने ?"

"करण तुझ पर मरता है, तुझे चोदना चाहता है !"

"दीदी, यह आप कह रही है, वो तो मुझे भी अच्छे लगते हैं, पर यह सब? तौबा !"

"अच्छा, मैं तुझे इस काम के लिये बहुत पैसे दूंगी, प्लीज सोना मान जा !"

सोना ने मुस्करा कर अपना सर झुका लिया। वो धीरे से नीरजा के पास जाकर नीचे बैठ गई और उसके पैर पकड़ लिये।

"मेरी किस्मत ऐसी कहाँ है, दीदी ... आपकी मेहरबानी सर आँखो पर ... मैं तो हमेशा के लिये आपकी दासी हो गई..."

नीरजा ने उसे उठा कर अपने गले से लगा लिया।

शाम को सोना काम पर आई तो सोना ने अपने हिसाब से अपना मेकअप किया हुआ था। पर नीरजा ने उसे फिर से अच्छा सा सजाया और उसे करण के कमरे में काम करने के लिये भेज दिया। करण ने उसे देखा तो वो देखता ही रह गया। सोना इतनी खूबसूरत है यह तो उसने कभी सोचा भी नहीं था। नीरजा जानती थी कि करण को क्या पसन्द है उसने उसे वैसा ही सजा दिया था।

"सोना, तुम तो बहुत सुन्दर हो ... जरा पास तो आओ !"

सोना सकुचाती हुई उसके पास चली आई।

करण उसे छू कर बोला,"ये तुम्हीं हो ना या कोई सपना !"

सोना ने अपनी बड़ी बड़ी आँखें धीरे धीरे करके ऊपर उठाई और मुस्कराई।

"आपने तो हमें कभी ठीक से देखा तक नहीं, भला नौकरों की तरफ़ क्यूँ कोई देखेगा?"

करण ने उसके मुख पर अपनी अंगुली रख दी। सोना एक कदम और आगे बढ़ गई, उसे नीरजा की तरफ़ से छूट जो मिल गई थी। करण ने उसको इतना समीप से कभी नहीं देखा था। उसकी शरीर की खुशबू करण के नथुनो में समाती चली गई। करण ने अन्जाने में सोना का हाथ पकड़ लिया। सोना पर जैसे हजारों बिजलियाँ कड़क उठी, शरीर थर्रा गया। करण की गरम सांसें अपने चेहरे पर आती हुई प्रतीत हुई। उसने आँखें खोली तो देखा करण के होंठ उस तक पहुँच रहे थे। सोना घबरा सी गई, उसे लगा कि यह पाप है।

"ना, भैया, नहीं ! मैं गरीब मर जाऊंगी !" उसकी आवाज में घबराहट और कम्पन था।

"नहीं, आज ना मत कहो, कब तक मैं जलता रहूंगा?"

"गरीब पर दया करो, भैया जी।"

पर करण ने उसे दबोच लिया और उसके पतले पंखुड़ियों जैसे होंठों को अपने होंठों से लगा लिया। करण के हाथ उसकी पीठ को यहाँ-वहाँ दबाने लगे थे। सोना होश खोती जा रही थी। उसके सपनों का साथी उसे मिल गया था।

तभी ताली की आवाज आई,"बहुत खूब ! तो यह सब हो रहा है? तो करण, तुमने सोना को पटा ही लिया?" नीरजा सभी कुछ देख रही थी, बस उसे उसे अच्छा मौका चाहिये था, कमरे में प्रवेश करने के लिये।

"नहीं, नीरजा वो तो यूँ ही मैं..."

"... किस कर रहा था, किये जाओ, रुक क्यों गये ?"

"अरे तुम तो बुरा मान गई, सोना, जाओ यहाँ से... चलो !"

"अरे नहीं, करण मुझे बुरा नहीं लगा, हां पर सोना को जरूर लगेगा। लगे रहो, मैं खुश हूँ कि तुमने सोना को पटा लिया ... चलो शुरू हो जाओ !"

नीरजा वापस अपने कमरे में लौट गई। जाते जाते उसने कमरे का दरवाजा बन्द कर दिया। सोना ने करण को फिर से अपने से चिपका लिया और दोनों प्यार करने लगे।

करण ने सोना का स्तन अपने हाथों में लेकर उसे सहलाना आरम्भ कर दिया। सोना की चूचियाँ सख्त होने लगी। चुचूक कड़े हो कर और भी सीधे हो गये। सोना के दिल पर उन दोनों के इस नाटक का कोई असर नहीं हुआ था, वो तो चुदने को बेताब थी। करण ने सोना का ब्लाऊज सामने से खोल दिया था और उसके नंगे उरोजों को दबा रहा था। सोना से भी नहीं रहा गया तो उसने उसका कड़क लण्ड पकड़ लिया, उसकी पैन्ट खोल कर खींच कर बाहर निकाल लिया और उसे धीरे धीरे मलने लगी। दोनों के मुख से सिसकारियाँ निकलने लगी थी।
तभी नीरजा बिल्कुल नंगी हो कर कमरे में आ गई। उसने आते ही करण को आंख मारी जो सोना ने भी देख लिया था। उसने पीछे से आकर सोना का ब्लाऊज उतार दिया और उसकी साड़ी भी उतार दी।

"कहो सोना, पेटीकोट भी उतार दूँ या इसे ऊँचा करके काम चलाओगी?" नीरजा हंसीयुक्त आवाज ने सोना को शर्म से पानी पानी कर दिया। नीरजा ने जल्दी से उसका नाड़ा खोला और पेटीकोट नीचे सरका दिया। सोना का दमकता रूप देख कर वो स्वयं भी हैरान रह गई। कीचड़ में कमल का फ़ूल ! सोना का एक एक अंग तराशा हुआ था, गजब के कट्स थे। उसकी गहराईयाँ और उभार बहुत पुष्ट और सुघड़ थे। नीरजा ने सोचा कि तभी करण इस पर मरता था, मरना ही चाहिये था ! उसे खुद का जिस्म देख कर शर्म सी आने लगी थी, साधारण सा उभार, कोई विशेष बात नहीं, फिर भी करण उसे बहुत प्यार करता था, बहुत इज्जत देता था।

नीरजा करण के पास गई और उसकी पैंट और चड्डी उतारने लगी। फिर उसकी बनियान भी उतार दी। नीरजा ने उन दोनों देखा, लगा कि जैसे ये दोनों एक दूसरे के लिये ही बने हैं। किस्मत का खेल देखो, सोना को मिला बुढ्ढा और मुझे मिला एक सजीला खूबसूरत जवान, जिसकी उस स्वयं ने कभी कदर नहीं की।
नीरजा बड़े प्यार से दोनों को धीरे धीरे सेज पर ले गई।

" सोना, कहो, पहले आगे या पिछाड़ी, ये गाण्ड बहुत प्यारी मारते हैं।"

वो शर्म से सिमटने लगी। उसका चेहरा लाल हो चुका था।

"दीदी, कैसी बातें करती हो, मैं तो आपकी दासी हूँ ... ये तो जैसी आपकी इच्छा..."

"अच्छा करण तुम बताओ, क्या मारोगे, सोना की चूत या गाण्ड ?"

"मेरी प्यारी सोना की गोल गोल गाण्ड बड़ी मोहक है, नीरजा चलो वहीं से आरम्भ करते हैं।"

"तो सोना जी, हो जाओ तैयार, और कर दो अपनी मेहरबानी करण पर, उठ जाओ और बन जाओ घोड़ी !"

सोना उठ कर पलट कर अपनी गाण्ड ऊंची कर ली और घोड़ी सी बन गई। उसके खूबसूरत गोरे गोरे चूतड़ो का जोड़ा चमक रहा था, उसमें से उसकी प्यारी गाण्ड का फ़ूल खिलता हुआ नजर आ रहा था। भूरा और गुलाबी रंग का द्वार ... करण से रहा नहीं गया। वो झुक गया गया। उसकी लम्बी सी जीभ लपलपा कर उसकी गाण्ड चाटने लगी। जीभ को मोड़ कर उसने गाण्ड के भीतर भी घुसाने की कोशिश की। उसका यह कृत्य सोना को बहुत आनन्दित कर रहा था। नीरजा भी अपने हाथों से सोना के चूतड़ों को पकड़ कर खींच कर और खोल रही थी। सोना की चूत रस से भर गई थी और उसका गीलापन बाहर निकल रहा था। उसकी चूत का जायका भी उसकी जीभ ने मधुरता से ले ही लिया। सड़ाक सड़ाक करके उसका रस करण के मुख में प्रवेश कर गया। सोना ने वासना से भर कर नीरजा की जांघ को अपने दांतों से काट लिया।

"अब हो जाये ... एक भरपूर वार !" नीरजा ने करण को इशारा किया और अपनी कोल्ड क्रीम की शीशी खोल कर सोना के गाण्ड के भीतर और बाहर चुपड़ दी। थोड़ी सी करण के लौड़े पर भी लगा दी। करण तो बहुत उतवला होने लगा था। वो अपना लण्ड सोना की गाण्ड पर लगा कर दबाने लगा। क्रीम का असर था, लण्ड फ़क से भीतर चला गया। सोना चिहुंक उठी। फिर एक हल्का झटका, लण्ड एक चौथाई अन्दर घुस गया। उसे दर्द हुआ, उसका जबड़ा दर्द से भिंच गया। दूसरे झटके में लण्ड आधा अन्दर पहुँच गया था। उसके चेहरे पर दर्द की लकीरें उभर आई थी। एक हल्की सी कराह निकल पड़ी थी। नीरजा का इशारा पा कर करण ने भी अब रहम करना छोड़ दिया और आखिरी शॉट जोर से मार दिया। लण्ड पूरा घुस चुका था। सोना के मुख से एक चीख निकल पड़ी।
"बहुत दर्द होता है, दीदी, कहो ना धीरे से चोदें !"

पर करण कहाँ सुनने वाला था। उसने उसे तीव्र गति से चोदना आरम्भ कर दिया था, वो कराहती जा रही थी। नीरजा उसके स्तनों को मसल मसल कर उसे मस्त करना चाह रही थी, पर शायद दर्द अधिक हो रहा था। कुछ देर यूँ ही गाण्ड चोदने के बाद उसने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया।

नीरजा समझ गई थी कि अब उसे चूत की चाह है। नीरजा ने सोना की चूत पर हाथ फ़ेरा और उसकी चूत खोल दी। रस से लबरेज चूत लप-लप कर रही थी। लण्ड के गाण्ड से निकलते ही सोना ने राहत की सांस ली। तभी नीरजा ने उसकी चूत खोली तो वो मस्त होने लगी। उसे लगा कि अब मुझे एक प्यारा सा लण्ड मिलने वाला है। वो वर्षों से नहीं चुदी थी, वो गाण्ड का दर्द भूल कर आसक्ति से करण को देखने लगी,"भैया, अन्दर डालो ना ... मुझे मस्त कर दो... हाय !"

नीरजा ने करण का लौड़ा पकड़ कर उसकी योनि में प्रवेश करा दिया। लण्ड के घुसते ही उसके मुख से सुख भरी आह निकल गई। उसने नीरजा का इशारा पा कर धीरे धीरे लण्ड से चूत में घर्षण आरम्भ कर दिया। पर एक स्थान पर जाकर वो रुक गया, उसने देखा कि लण्ड तो आधा ही अन्दर घुसा है, उसने जोर मार कर धक्का दिया।

सोना चीख उठी,"धीरे से ... यहाँ भी दर्द हो रहा है ... भैया प्लीज !"

पर करण ने फिर से एक धक्का और दिया। वो फिर से चीख उठी। तभी करण ने अगला करारा शॉट जोर से मारा। सोना दर्द से बिलख उठी।

"भैया, क्या फ़ाड़ ही डालोगे !"

"नहीं री मेरी सोना, देखो गाण्ड में भी दर्द हुआ था ना, क्या हुआ ... बस दर्द ही ना ... फिर तो रोज चुदवाओगी तो मजा आने लगेगा।"

"सच भैया, मुझे रोज चोदोगे..." सोना खुश हो गई।

अब करण जम के चुदाई करने लगा। कुछ ही देर में सोना भी मस्त होने लगी। उसे बहुत ही आनन्द आने लगा। वो भी सीत्कार के रूप में अपना आनन्द दर्शा रही थी। वो अपनी गाण्ड और भी पीछे की ओर उभार कर चुदवाने लगी थी। नीरजा मुस्कराती हुई उसके स्तन मसल रही थी। फिर नीरजा करण के पीछे चली आई। करण सोना का स्तन मर्दन करने लगा था। तभी करण की गाण्ड में नीरजा ने चिकनाई लगाकर अपनी एक अंगुली घुसेड़ दी। उसे पता था कि ऐसे करने से करण बहुत उत्तेजित हो जाता था। करण की लटकती गोलियाँ नीरजा दूसरे हाथ से पकड़ कर खींच रही थी और सहला रही थी। अंगुली तेजी से गाण्ड के अन्दर-बाहर आ-जा रही थी। करण जबरदस्त उत्तेजना का शिकार होने लगा। तभी सोना ने एक खुशी की किलकारी भरी और झड़ने लगी। उसके झड़ने के बाद नीरजा ने करण का कड़क लण्ड बाहर खींच लिया। सोना निढाल हो कर बिस्तर पर चित लेट गई।

नीरजा ने करण का लण्ड अपने मुठ में भर लिया। गाण्ड में अंगुली से चोदते हुये उसने करण का मुठ मारना आरम्भ कर दिया। करण आनन्द के मारे तड़प उठा और उसकी एक वीर्य की मोटी धार लण्ड मे से पिचकारी जैसी निकल पड़ी। वीर्य सोना के अंगो में गिर कर उसे गीला करता रहा। करण ईह्ह्ह्ह उफ़्फ़्फ़ करके झड़ता रहा। नीरजा ने करण को अपने वक्ष से लगा लिया और प्यार करने लगी।

"करण मजा आया ना?"

"पूछने की बात है कोई, ये तो कमाल की चीज़ है यार !"

"अब तो मुझे आनन्द से चुदाई के लिये मना तो नहीं करोगे ना ?" नीरजा ने अपना मतलब निकाला।

"अरे आनन्द क्या, वो मंजीत सरदार के लिये भी कुछ ना कहूँगा।"

नीरजा ने उसे करण को बहुत प्यार किया फिर सोना से लिपट कर बोली,"आज से तुम मेरी नौकरानी नहीं, सौत नहीं, मेरी बहन हो। तुम चाहो तो मैं तुम्हें आनन्द और मन्जीत से भी चुदवा दूंगी।" नीरजा भाव में बह कर बोलने लगी।
"दीदी, आप जिससे कहेंगी, मैं मजा ले लूंगी, देखो भूलना नहीं, वो आनन्द और मन्जीत वाली बात।"
Published: By: Nirmala - 22:28

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